पंचतंत्र: जैसे को तैसा कहानी – जब चूहों ने खा ली लोहे की भारी तराजू | Short Panchatantra Stories in Hindi

जैसे को तैसा कहानी में लोहे की तराजू और दो व्यापारी | Short Panchatantra Stories

परिचय

“जैसे को तैसा कहानी ” पंचतंत्र की एक रोचक और बुद्धिमानी से भरी कहानी है, जिसमें जीर्णधन नाम का एक समझदार युवक एक लालची महाजन की चाल का उसी की चालाकी से जवाब देता है।

जीर्णधन के परिवार की आर्थिक स्थिति कभी बहुत अच्छी थी, लेकिन समय के साथ उसकी संपत्ति समाप्त हो गई। बेहतर भविष्य की तलाश में वह दूसरे स्थान पर जाकर मेहनत करने और व्यापार करने का निर्णय लेता है।

उसके पास अपने पिता की एक भारी लोहे की तराजू थी। यात्रा के दौरान उसे सुरक्षित रखने के लिए वह तराजू एक महाजन के पास धरोहर के रूप में छोड़ देता है।

कई वर्षों बाद जब जीर्णधन वापस लौटता है और अपनी तराजू माँगता है, तो महाजन झूठ बोल देता है कि “तराजू को चूहे खा गए।”

जीर्णधन समझ जाता है कि महाजन उसकी मूल्यवान तराजू हड़पना चाहता है। लेकिन वह गुस्से में आकर विवाद नहीं करता। इसके बजाय वह अपनी बुद्धि से ऐसी योजना बनाता है कि महाजन को स्वयं अपना झूठ स्वीकार करना पड़ता है।

यह कहानी केवल “जैसे को तैसा” का संदेश नहीं देती, बल्कि यह भी सिखाती है कि अन्याय या धोखे का सामना करते समय जल्दबाजी और क्रोध के बजाय बुद्धि, धैर्य और सही समय पर सही जवाब देना अधिक प्रभावी हो सकता है।

पूरी कहानी
[ Short Panchatantra Stories in Hindi ]

जैसे को तैसा कहानी

बहुत समय पहले एक गाँव में जीर्णधन नाम का एक युवक रहता था।

वह एक व्यापारी परिवार से था। उसके पिता के समय परिवार काफी समृद्ध था, लेकिन समय बदलने के साथ परिवार की संपत्ति धीरे-धीरे समाप्त हो गई।

जीर्णधन समझदार और मेहनती था।

वह अक्सर सोचता।

“यदि मैं इसी तरह गाँव में बैठा रहा, तो अपनी स्थिति कभी नहीं बदल पाऊँगा। मुझे किसी दूसरे स्थान पर जाकर मेहनत करनी चाहिए।”

आखिरकार उसने परदेश जाकर व्यापार करने का निर्णय लिया।

लेकिन उसके पास व्यापार शुरू करने के लिए बहुत अधिक धन या सामान नहीं था।

उसके पास केवल एक मूल्यवान वस्तु थी।

वह थी उसके पिता के समय से चली आ रही भारी लोहे की तराजू।

जीर्णधन ने सोचा कि इतनी भारी तराजू को यात्रा में साथ ले जाना उचित नहीं होगा।

यदि यह रास्ते में चोरी हो गई, तो उसे बहुत नुकसान हो जाएगा।

इसलिए उसने गाँव के एक धनी और प्रतिष्ठित महाजन के पास जाकर कहा।

“महाजन जी, मैं व्यापार के लिए परदेश जा रहा हूँ। यह लोहे की तराजू मेरे पिता की निशानी है। मैं इसे आपके पास धरोहर के रूप में छोड़ना चाहता हूँ। जब मैं वापस आऊँगा, तब इसे ले लूँगा।”

महाजन ने मुस्कुराते हुए कहा।

“चिंता मत करो जीर्णधन। तुम्हारी तराजू मेरे पास पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।”

जीर्णधन ने महाजन पर विश्वास किया और तराजू उसके पास छोड़कर परदेश चला गया।

जीर्णधन ने मेहनत से धन कमाया

जीर्णधन ने परदेश में बहुत मेहनत की।

उसने व्यापार सीखा, लोगों से अच्छे संबंध बनाए और धीरे-धीरे उसका काम चल पड़ा।

कई वर्ष बीत गए।

मेहनत और समझदारी के कारण उसने पर्याप्त धन कमा लिया।

अब वह अपने गाँव वापस लौटना चाहता था।

जब जीर्णधन अपने गाँव पहुँचा, तो सबसे पहले वह महाजन के घर गया।

उसने कहा।

“महाजन जी, मैं वापस आ गया हूँ। कृपया मेरी वह लोहे की तराजू मुझे लौटा दीजिए, जो मैंने आपके पास धरोहर के रूप में रखी थी।”

महाजन के मन में लालच जाग उठा।

उसे लगा कि जीर्णधन कई वर्षों तक बाहर रहा है। शायद वह अपनी तराजू को भूल चुका होगा।

महाजन ने गंभीर चेहरा बनाया और बोला।

“अरे जीर्णधन, मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है।”

जीर्णधन ने पूछा।

“क्या हुआ।”

महाजन ने कहा।

“तुम्हारी तराजू तो चूहे खा गए।”

जीर्णधन कुछ क्षण शांत रहा।

उसे तुरंत समझ में आ गया कि महाजन झूठ बोल रहा है।

इतनी भारी लोहे की तराजू को चूहे कैसे खा सकते थे।

लेकिन उसने महाजन से बहस नहीं की।

वह शांत स्वर में बोला।

“अगर चूहों ने तराजू खा ली, तो इसमें आपकी क्या गलती। जो हुआ, वह हुआ।”

महाजन मन ही मन बहुत खुश हुआ।

उसने सोचा।

“यह तो बहुत सीधा आदमी है। बिना सवाल किए मेरी बात मान गया।”

लेकिन उसे नहीं पता था कि जीर्णधन के मन में एक योजना बन चुकी थी।

जीर्णधन ने महाजन को उसकी ही चाल में फँसाया

कुछ समय बाद जीर्णधन ने महाजन से कहा।

“मैं नदी पर स्नान करने जा रहा हूँ। अगर आपको कोई आपत्ति न हो, तो अपने बेटे धनदेव को भी मेरे साथ भेज दीजिए। उसे भी नदी देखने का मौका मिल जाएगा।”

महाजन को इसमें कोई बुराई नहीं लगी।

उसने अपने बेटे से कहा।

“धनदेव, जीर्णधन चाचा के साथ नदी पर जाओ।”

धनदेव खुशी-खुशी जीर्णधन के साथ चला गया।

नदी के पास पहुँचने के बाद जीर्णधन धनदेव को एक सुरक्षित स्थान पर ले गया और उसे एक गुफा में बैठा दिया।

फिर उसने गुफा के प्रवेश पर एक भारी पत्थर रख दिया।

कुछ समय बाद जीर्णधन अकेला महाजन के घर लौट आया।

महाजन ने अपने बेटे को साथ न देखकर तुरंत पूछा।

“जीर्णधन, मेरा बेटा कहाँ है।”

जीर्णधन ने बिल्कुल शांत भाव से उत्तर दिया।

“उसे तो एक चील उठाकर ले गई।”

महाजन का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।

वह चिल्लाया।

“क्या तुम मुझे मूर्ख समझते हो। क्या कोई चील एक बच्चे को उठाकर ले जा सकती है।”

जीर्णधन ने शांत स्वर में कहा।

“जब आपके घर के चूहे एक भारी लोहे की तराजू खा सकते हैं, तो एक चील किसी बच्चे को क्यों नहीं उठा सकती।”

महाजन समझ गया कि जीर्णधन ने उसकी झूठी बात को उसी के सामने रख दिया है।

लेकिन अब मामला केवल दोनों के बीच नहीं था।

महाजन ने गुस्से में कहा।

“तुमने मेरे बेटे को छिपा दिया है। मैं तुम्हारे खिलाफ शिकायत करूँगा।”

जीर्णधन ने कहा।

“बिल्कुल। चलिए, न्याय के सामने चलते हैं।”

न्याय के सामने खुला महाजन का झूठ

दोनों न्याय करने वाले अधिकारी के सामने पहुँचे।

महाजन ने शिकायत की।

“इस व्यक्ति ने मेरे बेटे को चुरा लिया है। वह कहता है कि मेरे बेटे को चील उठा ले गई। यह बिल्कुल असंभव है।”

न्याय करने वाले व्यक्ति ने जीर्णधन से पूछा।

“क्या तुमने सचमुच उसके बेटे को छिपाया है।”

जीर्णधन ने कहा।

“नहीं। उसे तो चील उठा ले गई।”

न्याय करने वाला व्यक्ति हैरान रह गया।

उसने कहा।

“क्या तुम सच में मानते हो कि एक चील बच्चे को उठा सकती है।”

जीर्णधन ने विनम्रता से उत्तर दिया।

“महाराज, मैं भी यही सोचता हूँ कि यह संभव नहीं है।”

फिर उसने महाजन की ओर देखकर कहा।

“लेकिन यदि इनके घर के चूहे एक भारी लोहे की तराजू खा सकते हैं, तो चील भी बच्चे को उठा सकती है।”

यह सुनते ही वहाँ मौजूद लोगों को पूरी बात समझ में आने लगी।

न्याय करने वाले व्यक्ति ने महाजन से पूछा।

“क्या सचमुच चूहों ने लोहे की तराजू खा ली थी।”

महाजन के पास अब कोई उत्तर नहीं था।

वह समझ चुका था कि उसका झूठ सामने आ गया है।

आखिरकार उसने स्वीकार किया।

“नहीं। तराजू चूहों ने नहीं खाई। मैंने झूठ बोला था। तराजू मेरे पास सुरक्षित है।”

सच सामने आया

न्याय करने वाले व्यक्ति ने आदेश दिया कि महाजन जीर्णधन की तराजू वापस करे।

इसके बाद जीर्णधन ने भी महाजन के बेटे धनदेव को गुफा से सुरक्षित बाहर निकालकर उसके पिता को सौंप दिया।

महाजन को अपनी गलती पर शर्मिंदगी हुई।

उसने अपनी लालच के कारण एक ईमानदार व्यक्ति की वस्तु हड़पने की कोशिश की थी।

लेकिन जीर्णधन ने क्रोध या हिंसा का रास्ता नहीं चुना।

उसने महाजन की ही बात को उसके सामने रखकर उसका झूठ उजागर कर दिया।

इस तरह जीर्णधन ने अपना अधिकार वापस पाया और महाजन को भी अपनी गलती का एहसास हुआ।

यही कारण है कि इस कहानी को “जैसे को तैसा” कहा जाता है।

इस कहानी का संदेश यह नहीं है कि हर धोखे का जवाब उसी तरह धोखा देकर देना चाहिए। बल्कि इसका गहरा संदेश यह है कि जब कोई व्यक्ति गलत तर्क या छल का सहारा ले, तो समझदारी और धैर्य से उसकी बात की असंगति सामने लाई जा सकती है।

बुद्धि से दिया गया जवाब कई बार क्रोध से दिए गए जवाब से अधिक प्रभावी होता है।

“जैसे को तैसा कहानी” के मुख्य पात्र

जीर्णधन


जीर्णधन कहानी का मुख्य पात्र है। वह मेहनती, समझदार और धैर्यवान व्यक्ति है। महाजन द्वारा धोखा दिए जाने के बाद भी वह तुरंत क्रोधित नहीं होता और अपनी बुद्धि से समस्या का समाधान निकालता है।

महाजन


महाजन एक धनी लेकिन लालची व्यक्ति है। वह जीर्णधन की लोहे की तराजू हड़पने के लिए झूठ बोलता है और कहता है कि उसे चूहे खा गए।

धनदेव


धनदेव महाजन का पुत्र है। जीर्णधन उसे अपने साथ नदी पर ले जाता है और उसके माध्यम से महाजन को उसकी झूठी बात का एहसास कराता है।

न्याय करने वाला व्यक्ति


वह दोनों पक्षों की बात सुनता है और अंत में महाजन के झूठ को सामने लाने में मदद करता है।

पंचतंत्र की इस प्रसिद्ध कहानी से क्या सीख मिलती है

1. बुद्धिमानी से समस्या का समाधान किया जा सकता है।


जीर्णधन ने कठिन परिस्थिति में घबराने के बजाय सोच-समझकर योजना बनाई और अपना अधिकार वापस पाया।

2. लालच व्यक्ति से गलत काम करवा सकता है।


महाजन के पास पहले से धन था, फिर भी उसने दूसरे की मूल्यवान वस्तु हड़पने के लिए झूठ बोला।

3. झूठ लंबे समय तक छिपा नहीं रह सकता।


महाजन ने तराजू के बारे में झूठ बोला, लेकिन उसकी अपनी बात ही बाद में उसके झूठ को उजागर करने का कारण बन गई।

4. क्रोध के बजाय धैर्य से काम लेना चाहिए।


जीर्णधन चाहता तो महाजन से तुरंत झगड़ा कर सकता था, लेकिन उसने शांत रहकर बेहतर समाधान खोजा।

5. गलत तर्क का जवाब उसी तर्क की कमजोरी दिखाकर दिया जा सकता है।


महाजन ने कहा कि चूहों ने लोहे की तराजू खा ली। जीर्णधन ने उसी असंभव तर्क को बच्चे के गायब होने के संदर्भ में सामने रखकर महाजन का झूठ उजागर किया।

6. अपने अधिकारों की रक्षा के लिए समझदारी जरूरी है।


अन्याय होने पर चुप रहना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। शांत रहकर उचित तरीके से अपने अधिकार के लिए खड़ा होना भी आवश्यक है। जैसे को तैसा कहानी मैं भी ऐसा ही सिखाया है।

आज के जीवन में पंचतंत्र की इस कहानी का महत्व

“जैसे को तैसा कहानी” की यह पंचतंत्र कहानी आज के जीवन में भी कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों से जुड़ती है।

आज परिवार, स्कूल, नौकरी और व्यापार में कभी-कभी हमें ऐसे लोगों का सामना करना पड़ सकता है जो अपनी गलती छिपाने के लिए झूठ या गलत तर्क का सहारा लेते हैं।

ऐसी स्थिति में तुरंत गुस्सा करने के बजाय शांत रहना अधिक उपयोगी हो सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति ने आपके सामान या पैसे के बारे में गलत दावा किया है, तो भावनात्मक बहस करने के बजाय प्रमाण, रिकॉर्ड या उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी बात रखना अधिक प्रभावी हो सकता है।

ऑनलाइन दुनिया में भी यह सीख उपयोगी है। किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप देखने के बाद तुरंत विश्वास करने या आगे बढ़ाने के बजाय जानकारी के स्रोत की जाँच करनी चाहिए।

कहानी यह भी समझाती है कि चतुराई और धोखे में अंतर होता है। महाजन की चतुराई स्वार्थ और लालच पर आधारित थी, जबकि जीर्णधन की बुद्धिमानी का उद्देश्य अपने साथ हुए अन्याय को उजागर करना था।

बच्चों के लिए इस कहानी का संदेश विशेष रूप से उपयोगी है। यदि कोई उनके साथ अन्याय करे, तो उन्हें बदला लेने के बजाय किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति, शिक्षक या माता-पिता की सहायता लेकर समस्या का समाधान खोजने की आदत विकसित करनी चाहिए।

इसलिए “जैसे को तैसा” केवल पुरानी पंचतंत्र कहानी नहीं है। यह हमें आज भी सिखाती है कि धैर्य, विवेक और सही तर्क के साथ अन्याय का सामना किया जा सकता है।

माता-पिता और शिक्षकों के लिए चर्चा प्रश्न

  1. जीर्णधन परदेश क्यों जाना चाहता था।
  2. उसके पास कौन-सी महत्वपूर्ण वस्तु थी।
  3. जीर्णधन ने अपनी लोहे की तराजू महाजन के पास क्यों रखी।
  4. महाजन ने तराजू के बारे में क्या झूठ बोला।
  5. जीर्णधन ने महाजन से तुरंत झगड़ा क्यों नहीं किया।
  6. जीर्णधन ने महाजन के बेटे को अपने साथ क्यों ले जाने को कहा।
  7. महाजन को उसके ही तर्क का जवाब कैसे मिला।
  8. क्या जीर्णधन का तरीका उचित था। अपने उत्तर का कारण बताइए।
  9. यदि आप जीर्णधन की जगह होते, तो क्या करते।
  10. लालच ने महाजन के निर्णय को किस तरह प्रभावित किया।
  11. जैसे को तैसा कहानी में बुद्धिमानी और चालाकी में क्या अंतर दिखाई देता है।
  12. क्या “जैसे को तैसा” का अर्थ हमेशा बदला लेना होता है।
  13. आज के जीवन में ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ हो सकती हैं जहाँ हमें शांत रहकर अपने अधिकार की रक्षा करनी पड़े।
  14. इस जैसे को तैसा कहानी से आप अपने जीवन में कौन-सी एक आदत अपनाना चाहेंगे।

कठिन शब्दों का अर्थ

शब्दअर्थ
जीर्णधनकहानी का मुख्य पात्र।
प्रतिष्ठितजिसे समाज में सम्मान प्राप्त हो।
परदेशअपना स्थान छोड़कर कोई दूसरा देश या दूर का स्थान।
छलकिसी को धोखा देने का तरीका।
तर्ककिसी बात को समझाने या सिद्ध करने के लिए दिया गया कारण।
षड्यंत्रकिसी उद्देश्य के लिए बनाई गई गुप्त योजना।

संबंधित कहावतें

1. जैसी करनी वैसी भरनी।


मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार परिणाम प्राप्त करता है। महाजन ने जीर्णधन के साथ छल किया, लेकिन अंत में उसका झूठ ही उसके लिए परेशानी बन गया।

2. लालच बुरी बला है।


महाजन के लालच ने उसे एक ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया जहाँ उसे अपना झूठ स्वीकार करना पड़ा।

3. बुद्धि बड़ी या बल।


जीर्णधन ने अपनी समस्या को बल या लड़ाई से नहीं, बल्कि बुद्धि और तर्क से हल किया।

बच्चों के लिए गतिविधियाँ

गतिविधि 1: कहानी का अभिनय।


बच्चे जीर्णधन, महाजन, धनदेव और न्याय करने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाकर कहानी का छोटा नाटक प्रस्तुत कर सकते हैं।

गतिविधि 2: सच या झूठ पहचानें।


बच्चों के सामने कहानी से जुड़े कुछ कथन रखें और उनसे पूछें कि कौन-सा कथन सच है और कौन-सा झूठ।

इससे कहानी की घटनाओं को याद करने के साथ-साथ समझने की क्षमता भी विकसित होगी।

गतिविधि 3: “मैं जीर्णधन होता तो।”


बच्चों से पाँच से आठ वाक्यों में लिखने को कहें कि यदि उनकी कोई मूल्यवान वस्तु किसी व्यक्ति ने वापस करने से मना कर दी, तो वे क्या करेंगे।

गतिविधि 4: कहानी का वैकल्पिक अंत।


जैसे को तैसा कहानी समझाने के लिए बच्चों से पूछें।

“अगर जीर्णधन ने महाजन से लड़ाई करने के बजाय सीधे न्यायाधीश के पास जाकर शिकायत की होती, तो कहानी कैसे बदलती।”

बच्चे अपनी कल्पना से नया अंत लिख सकते हैं।

गतिविधि 5: तराजू का चित्र बनाइए।


बच्चों को पारंपरिक लोहे की तराजू का चित्र बनाने दें और उसके नीचे कहानी की एक सीख लिखने को कहें।

गतिविधि 6: बुद्धिमानी बनाम चालाकी।


जैसे को तैसा कहानी समझाने के लिए एक कागज को दो हिस्सों में बाँटें।

एक तरफ लिखें “बुद्धिमानी।”

दूसरी तरफ लिखें “स्वार्थी चालाकी।”

फिर बच्चों से कहानी के पात्रों के व्यवहार के उदाहरण लिखने को कहें।

पंचतंत्र भारतीय नीति-कथा परंपरा का एक प्रसिद्ध हिस्सा है। इसकी कहानियों में मनुष्य, पशु-पक्षी और अन्य पात्रों के माध्यम से बुद्धिमानी, मित्रता, सावधानी, व्यवहार और सही निर्णय लेने जैसी जीवन की महत्वपूर्ण बातों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

“जैसे को तैसा कहानी” जैसी कहानियों में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि व्यवहारिक बुद्धिमानी भी दिखाई देती है।

इस कहानी में जीर्णधन को एक ऐसे व्यक्ति का सामना करना पड़ता है जो उसकी संपत्ति हड़पने के लिए असंभव बात को सच बताने की कोशिश करता है।

जीर्णधन की विशेषता यह है कि वह अपनी समस्या का समाधान केवल क्रोध से नहीं करता। वह सामने वाले व्यक्ति की बात को ध्यान से समझता है और फिर उसी के तर्क की कमजोरी को सामने लाता है।

यह कहानी बच्चों को यह समझाने में मदद कर सकती है कि हर समस्या का समाधान ताकत या बहस से नहीं होता। कई बार शांत दिमाग, सही प्रश्न और उचित तर्क अधिक प्रभावी होते हैं।

आज के जीवन में भी यह सीख उपयोगी है। किसी विवाद या गलत दावे का सामना होने पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय तथ्य, प्रमाण और तार्किक सोच का सहारा लेना अधिक उचित हो सकता है।

पंचतंत्र की कथाओं के अलग-अलग संस्करण मिलते हैं। इसलिए अलग पुस्तकों और परंपराओं में इस कहानी के पात्रों और घटनाओं का विवरण कुछ अलग हो सकता है। “Tit for tat” नाम से यह कथा पंचतंत्र की कहानी-सूचियों में भी दर्ज है।

FAQ – जैसे को तैसा कहानी से जुड़े सामान्य प्रश्न

“जैसे को तैसा” कहानी किस बारे में है।

“जैसे को तैसा” पंचतंत्र की एक कहानी है जिसमें जीर्णधन नाम का व्यक्ति एक महाजन के धोखे का बुद्धिमानी से जवाब देता है और अपनी लोहे की तराजू वापस प्राप्त करता है।

जीर्णधन कौन था।

जीर्णधन एक व्यापारी परिवार का समझदार युवक था। परिवार की संपत्ति कम होने के बाद वह परदेश जाकर मेहनत और व्यापार के माध्यम से धन कम करता है।

जीर्णधन की तराजू किसकी थी।

तराजू उसके परिवार की पुरानी और मूल्यवान वस्तु थी, जिसे उसके पिता के समय से सुरक्षित रखा गया था।

जीर्णधन ने तराजू महाजन के पास क्यों रखी।

वह व्यापार के लिए परदेश जा रहा था और यात्रा के दौरान भारी तराजू को साथ ले जाना नहीं चाहता था। इसलिए उसने उसे महाजन के पास धरोहर के रूप में रखा।

महाजन ने तराजू के बारे में क्या कहा।

महाजन ने झूठ बोलते हुए कहा कि तराजू को चूहे खा गए।

जीर्णधन को कैसे पता चला कि महाजन झूठ बोल रहा है।

जीर्णधन समझदार था और जानता था कि चूहे भारी लोहे की तराजू नहीं खा सकते। इसलिए उसे तुरंत महाजन की बात पर संदेह हो गया।

लेखिका

Urvashi अवतार

इस कहानी की प्रकाशित तिथि:

इस कहानी की अंतिम अपडेट तिथि:

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