AUTHOR-URVASHI

✍️ Urvashi

लेखिका
[Meet the Creator]

Author of the Story and website - Urvashi

नमस्ते! मैं उर्वशी हूँ—’हिंदी कथा कोष’ (Hindikathakosh.com) की संस्थापक, लेखिका।

मेरा हमेशा से मानना रहा है कि कहानियाँ सिर्फ शब्दों का ताना-बाना नहीं होतीं; ये वो जादुई खिड़कियाँ हैं जिनसे बच्चे इस दुनिया को देखना और समझना सीखते हैं। एक अच्छी कहानी हमारे भीतर के इंसान को बेहतर बनाती है और हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती है।

साहित्य से मेरा गहरा नाता: बचपन की वे सुनहरी यादें

कहानियों से मेरा यह रिश्ता आज का नहीं है। बचपन से ही मुझे लघु कथाएँ (Short stories) पढ़ने का बेहद शौक रहा है, विशेषकर मुंशी प्रेमचंद जी की कहानियाँ। जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मैंने प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद और रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान लेखकों की लगभग हर किताब और रचना पढ़ डाली। उनके लेखन ने न केवल मेरे विचारों को गहराई दी, बल्कि मेरे जीवन और मेरे व्यक्तित्व को भी एक नया आकार दिया।

‘पूस की रात’, ‘पंच परमेश्वर’ और ‘दो बैलों की कथा’ जैसी कहानियों ने मेरे बाल-मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि आज भी जब मैं उन दिनों को याद करती हूँ, तो भावुक हो जाती हूँ। बचपन की वे यादें (Nostalgia) और साहित्य का वह जादुई अहसास मुझे आज भी है।

एक माँ की उलझन से एक वेबसाइट तक का सफर

साहित्य के प्रति इसी गहरे प्रेम के बावजूद, ‘हिंदी कथा कोष’ की शुरुआत किसी बड़े व्यावसायिक विचार से नहीं हुई थी।

मुझे रोज़ रात को अपनी बेटी को कहानियाँ सुनाना बहुत पसंद था। लेकिन जब भी मैं उसके लिए इंटरनेट पर कोई अच्छी और नई हिंदी कहानी खोजती, तो मुझे काफी निराशा होती। मैंने देखा कि इंटरनेट पर बच्चों के लिए ऐसी साफ-सुथरी और अच्छी वेबसाइट्स बहुत कम हैं, जिन पर माता-पिता आँख बंद करके भरोसा कर सकें। एक माँ होने के नाते मुझे यह बात खटकी।

तभी मैंने सोचा कि क्यों न मैं खुद इंटरनेट पर एक ऐसी जगह बनाऊँ, जहाँ हमारे बचपन की उन खूबसूरत कहानियों की यादें भी हों और आज के बच्चों के लिए अच्छी सीख वाली कहानियाँ भी मिल सकें।

मेरा उद्देश्य क्या है?

मैं इस मंच के ज़रिए सिर्फ कहानियाँ नहीं लिख रही हूँ, बल्कि एक खोती हुई परंपरा को सहेजने की कोशिश कर रही हूँ। मेरा लक्ष्य है:

  • पंचतंत्र की सूझबूझ, तेनाली रामा की हाज़िरजवाबी, अकबर-बीरबल के किस्से और हमारी पुरानी लोककथाओं की सीख आज के डिजिटल बच्चों तक पहुँचाना।

  • बच्चों के लिए एक सुरक्षित मंच देना और बड़ों को उनके बचपन की सुनहरी यादों में वापस ले जाना।

  • हर कहानी के अंत में एक ऐसी सकारात्मक सीख (Moral) देना, जो जीवन भर काम आए।

आपके बिना यह सफर अधूरा है। मुझे अपने पाठकों के विचार पढ़ना सबसे अच्छा लगता है। यदि आप मुझे कोई सुझाव देना चाहते हैं, अपनी पसंदीदा कहानी साझा करना चाहते हैं, या बस यूं ही बात करना चाहते हैं, तो बेझिझक मुझे contact@hindikathakosh.com पर लिखें।

कहानियों के इस खूबसूरत सफर में मेरा साथ देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

सप्रेम (With love),

उर्वशी

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