हंस और कछुए की कहानी – ज्यादा बोलने का भयानक नतीजा

हंस और कछुए की कहानी | लकड़ी के सहारे आसमान में उड़ते हंस और कछुए की कहानी का दृश्य

सोने का अंडा देने वाली मुर्गी

अलिफ लैला की कहानियाँ हमें रोमांचक घटनाओं के माध्यम से जीवन की महत्वपूर्ण सीख देती हैं। इन कहानियों में कभी बुद्धिमानी की परीक्षा होती है, तो कभी दोस्ती, साहस और सावधानी का महत्व समझाया जाता है। हंस और कछुए की कहानी भी ऐसी ही एक शिक्षाप्रद कथा है, जिसमें एक बतख अपने डर के कारण अपना पुराना ठिकाना छोड़ देती है और एक समझदार कछुए से उसकी मित्रता हो जाती है।

कछुआ बतख को समझाता है कि केवल भाग्य या ईश्वर पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। जीवन में अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहना और खतरे को पहचानना भी जरूरी है। लेकिन जब बतख को लगता है कि अब उसके आसपास कोई खतरा नहीं है, तो वह कछुए की चेतावनी को अनदेखा कर देती है। उसकी यही लापरवाही अंत में उसके लिए घातक साबित होती है।

यह अलिफ लैला की कहानी बच्चों को सिखाती है कि विश्वास और सावधानी दोनों जीवन में जरूरी हैं। हमें कठिन समय में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अच्छे मित्रों की सलाह को भी गंभीरता से सुनना चाहिए।

पूरी कहानी

नदी के बीच चट्टान पर पहुँची बतख

बहुत समय पहले की बात है। दूर-दूर तक फैली हरी-भरी घाटियों और नीले आसमान से घिरी एक विशाल नदी बहती थी। नदी का पानी साफ और ठंडा था। उसके बीचोंबीच एक बड़ी-सी चट्टान खड़ी थी, जहाँ अक्सर पक्षी उड़कर आते और कुछ देर आराम करते थे।

एक दिन एक बतख आसमान में ऊँचा उड़ते हुए उसी चट्टान पर आ पहुँची। उसने अपने पंख समेटे और आराम से बैठ गई।

वह चारों ओर का सुंदर दृश्य देखकर खुश हो रही थी।

“वाह! यहाँ तो कितनी ठंडी हवा चल रही है। नदी का पानी भी कितना सुंदर दिखाई देता है। कुछ देर यहीं आराम करता हूँ।”

बतख ने अपनी गर्दन घुमाई और नदी के बहते पानी को देखने लगी।

तभी अचानक उसकी नजर पानी में बहती एक अजीब वस्तु पर पड़ी। वह वस्तु लहरों के साथ आगे बढ़ रही थी। बतख ने ध्यान से देखा, तो वह एक मनुष्य का मृत शरीर था।

उसके शरीर पर भाले के घाव और तलवार के कटे हुए निशान दिखाई दे रहे थे।

यह देखकर बतख घबरा गई।

उसने मन ही मन सोचा, “लगता है यह व्यक्ति किसी युद्ध में मारा गया होगा। न जाने इसके साथ क्या हुआ होगा!”

वह कुछ देर तक उस मृत शरीर को देखती रही। फिर उसे लगा कि शायद यह जगह सुरक्षित नहीं है।

गिद्धों को देखकर बतख ने छोड़ी अपनी जगह

बतख अभी इसी घटना के बारे में सोच रही थी कि अचानक आसमान में तेज आवाज गूँजने लगी।

“काँव! काँव!”

उसने ऊपर देखा, तो एक बड़ा गिद्ध और कई अन्य बड़ी चिड़ियाँ उसकी ओर उड़कर आ रही थीं।

बतख डर गई।

उसने सोचा, “अगर ये सभी पक्षी यहाँ उतर आए, तो मुझे भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। यहाँ रुकना ठीक नहीं होगा।”

बिना देर किए उसने अपने पंख फैलाए और तेजी से वहाँ से उड़ गई।

वह नदी के बीच स्थित एक ऊँचे पेड़ पर जाकर बैठ गई।

कुछ देर बाद उसने नीचे बहती नदी की ओर देखा और उदास होकर बोली, “पहले मैंने पानी में एक मृत व्यक्ति का शरीर देखा। फिर इन बड़े पक्षियों को देखकर मुझे अपनी जगह छोड़नी पड़ी। ऐसा लगता है कि दुर्भाग्य मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा।”

बतख को लगने लगा था कि जहाँ भी वह जाती है, वहाँ कोई न कोई परेशानी उसका इंतजार कर रही होती है।

बतख की मुलाकात समझदार कछुए से हुई।

उसी समय नदी के पानी में कुछ हलचल हुई।

वहाँ एक कछुआ तैरता हुआ आया। वह स्वभाव से शांत और समझदार था। उसने पेड़ पर बैठी बतख को देखा और मुस्कुराते हुए पूछा, “अरे मित्र! तुम इतनी ऊँचाई पर क्यों बैठे हो? क्या बात है?”

बतख ने लंबी साँस ली और अपनी परेशानी बताने लगी।

उसने कहा, “मैं अपनी पुरानी जगह छोड़कर यहाँ आया हूँ। वहाँ पहले मुझे एक मृत व्यक्ति का शरीर दिखाई दिया और फिर गिद्धों का झुंड आ गया। जब आसपास खतरा हो, तो वहाँ रहना समझदारी नहीं है। इसलिए मैं अपनी जान बचाकर यहाँ चला आया।”

कछुए ने उसकी बात ध्यान से सुनी।

फिर उसने शांत स्वर में कहा, “मित्र, हर समय दुख और दुर्भाग्य के बारे में सोचते रहने से मन और अधिक परेशान हो जाता है। जीवन में कठिनाइयाँ आती रहती हैं, लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।”

बतख ने उसकी ओर देखा।

कछुआ आगे बोला, “अब तुम अकेले नहीं हो। मैं तुम्हारा मित्र हूँ। जब तक मैं यहाँ हूँ, तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। हमें मुश्किलों से घबराने के बजाय समझदारी से उनका सामना करना चाहिए।”

कछुए की बातें सुनकर बतख को बहुत अच्छा लगा।

उसने कहा, “तुम सच कहते हो मित्र। मेरे पास सोचने के लिए समय तो था, लेकिन मैं डर गया था। तुम्हारी बातें सुनकर अब मुझे अच्छा महसूस हो रहा है।”

धीरे-धीरे दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई।

बतख अपने पुराने ठिकाने पर लौटना चाहती थी

कुछ समय तक बतख और कछुआ साथ रहते और बातें करते रहे।

एक दिन बतख ने कहा, “मित्र, अब काफी समय बीत चुका है। चलो, वापस जाकर देखते हैं कि गिद्ध वहाँ से चले गए हैं या नहीं। शायद अब वहाँ कोई खतरा न हो।”

कछुए ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “ठीक है मित्र! चलो, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ।”

बतख अपने पंख फैलाकर उड़ गई और नदी के बीच वाली चट्टान के पास पहुँच गई।

वहाँ पहुँचकर उसने चारों ओर देखा।

गिद्ध और बड़ी चिड़ियाँ अब वहाँ मौजूद नहीं थीं। वे उस मृत शरीर को पूरी तरह खा चुके थे। चट्टान के पास केवल कुछ हड्डियाँ बची थीं।

यह देखकर बतख बहुत खुश हुई।

वह बोली, “वाह! अब तो मेरी पुरानी जगह फिर से सुरक्षित हो गई है। मेरे दुश्मन यहाँ से जा चुके हैं।”

वह तुरंत वापस कछुए के पास पहुँची और खुशी से बोली, “मित्र! अब वहाँ कोई खतरा नहीं है। मैं अपने पुराने घर में वापस जा सकती हूँ।”

कछुए ने कहा, “अगर तुम्हें लगता है कि वहाँ रहना ठीक है, तो तुम वापस जा सकती हो। लेकिन हमेशा सावधान रहना।”

बतख ने उसकी बात सुनी और अपने पुराने ठिकाने पर लौट गई।

बतख को अपनी सुरक्षा पर जरूरत से ज्यादा भरोसा

बतख फिर से उसी चट्टान और उसके आसपास के स्थान पर रहने लगी। कछुआ भी समय-समय पर उससे मिलने आता था।

दोनों मित्रों की दोस्ती पहले से भी गहरी हो गई।

समय बीतने के साथ बतख को लगने लगा कि अब उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं आएगी। वह अक्सर सोचती थी, “ऊपरवाले की मुझ पर बहुत कृपा है। वह हमेशा मेरी रक्षा करेगा। अब मुझे किसी बात का डर नहीं है।”

उसका ईश्वर पर विश्वास अच्छा था, लेकिन धीरे-धीरे वह अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह होने लगी।

वह आसपास के वातावरण पर ध्यान देना छोड़ने लगी और यह मानने लगी कि अब उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता।

कछुआ उसकी इस आदत को देखकर चिंतित रहता था।

वह कई बार बतख को समझाता, “मित्र, ईश्वर पर भरोसा रखना अच्छी बात है, लेकिन हमें अपनी तरफ से भी सावधानी बरतनी चाहिए। खतरा कभी भी आ सकता है।”

लेकिन बतख उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती थी।

कछुए ने बतख को आने वाले खतरे से सावधान किया

एक दिन बतख नदी के किनारे बैठी अपने पंख साफ कर रही थी।

आसमान में एक भूखी चील चक्कर लगा रही थी। उसकी नजर नीचे बैठी बतख पर पड़ चुकी थी।

कछुए ने चील को देख लिया।

वह तुरंत घबराकर चिल्लाया, “मित्र! सावधान हो जाओ। ऊपर देखो! आसमान में एक चील मंडरा रही है।”

लेकिन बतख ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

वह हँसते हुए बोली, “मित्र, तुम बेकार में चिंता कर रहे हो। ऊपरवाले की मुझ पर कृपा है। वह सबकी रक्षा करता है। मुझे कुछ नहीं होगा।”

कछुए ने गंभीर होकर कहा, “मैं तुम्हारे विश्वास का सम्मान करता हूँ, लेकिन केवल भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। हमें अपनी सुरक्षा के लिए भी प्रयास करना चाहिए। चील तुम्हारे बहुत पास आ रही है। बेहतर होगा कि तुम तुरंत किसी सुरक्षित जगह पर चली जाओ।”

बतख ने फिर भी उसकी बात को हल्के में लिया।

उसे लगा कि कछुआ बेवजह डर रहा है।

बतख की लापरवाही बनी उसके दुर्भाग्य का कारण

कछुआ अभी बतख को समझा ही रहा था कि अचानक चील ने आसमान से तेजी से नीचे की ओर झपट्टा मारा।

“श्श्श्श… धप्प!”

चील ने अपने मजबूत पंजों और धारदार चोंच से बतख पर हमला कर दिया।

बतख को संभलने या वहाँ से भागने का मौका तक नहीं मिला।

कुछ ही पलों में चील ने बतख को मार डाला।

यह सब देखकर कछुआ डर से काँप उठा। वह अपने मित्र को बचा नहीं पाया।

उसकी आँखें दुख से भर गईं।

वह मन ही मन बोला, “काश! मेरे मित्र ने मेरी बात मान ली होती। मैंने उसे पहले ही सावधान किया था, लेकिन उसने खतरे को गंभीरता से नहीं लिया।”

कछुए को बहुत दुख हुआ कि बतख ने अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानी नहीं बरती।

कहानी से मिली महत्वपूर्ण सीख

बतख की मृत्यु के बाद कछुए को यह बात अच्छी तरह समझ में आ गई कि केवल भाग्य या ईश्वर पर भरोसा करके अपनी जिम्मेदारियों को नहीं भूलना चाहिए।

विश्वास मन को शक्ति देता है, लेकिन समझदारी और सावधानी हमें संभावित खतरों से बचाने में मदद करती हैं।

बतख को अपने मित्र की बात सुननी चाहिए थी। यदि वह चील को देखकर तुरंत किसी सुरक्षित स्थान पर चली जाती, तो शायद अपनी जान बचा सकती थी।

इस घटना से हमें सीख मिलती है कि जीवन में अच्छे मित्रों की सलाह का सम्मान करना चाहिए और खतरे के संकेतों को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ईश्वर पर विश्वास रखिए, लेकिन अपनी सुरक्षा और जिम्मेदारी के प्रति हमेशा सतर्क रहिए।

नैतिक कहानी “हंस और कछुए” के मुख्य पात्र

बतख


बतख इस कहानी की मुख्य पात्र है। वह शुरुआत में डर के कारण अपना पुराना ठिकाना छोड़ देती है और बाद में कछुए से मित्रता करती है। लेकिन सुरक्षित महसूस करने के कारण वह सावधानी बरतना छोड़ देती है और अंत में चील का शिकार बन जाती है।

कछुआ


कछुआ शांत, धैर्यवान और समझदार है। वह बतख को हिम्मत रखने की सलाह देता है और बाद में चील को देखकर उसे सावधान भी करता है। उसका व्यवहार सच्ची मित्रता और जिम्मेदारी का उदाहरण है।

चील


चील एक शिकारी पक्षी है, जो आसमान में उड़ते हुए बतख को देख लेती है। मौका मिलते ही वह उस पर हमला कर देती है।

इस नैतिक कहानी से क्या सीख मिलती है

1. ईश्वर पर विश्वास के साथ सावधानी भी जरूरी है।


केवल भाग्य के भरोसे रहना समझदारी नहीं है। अपनी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

2. खतरे को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए।


यदि कोई खतरा दिखाई दे, तो उसे हल्के में लेने के बजाय तुरंत सुरक्षित कदम उठाना चाहिए।

3. सच्चा मित्र सही सलाह देता है।


कछुए ने बतख को बार-बार समझाया और उसे आने वाले खतरे से सावधान किया।

4. अच्छे मित्रों की बात सुननी चाहिए।


मित्र की सलाह हमारे हित में हो सकती है। इसलिए उसे बिना सोचे-समझे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

5. डर के कारण जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए।


कठिन परिस्थिति में घबराने के बजाय शांत मन से सही निर्णय लेना चाहिए।

6. सुखद समय में भी सतर्क रहना जरूरी है।


जब परिस्थितियाँ अच्छी हों, तब भी हमें अपनी जिम्मेदारियाँ नहीं भूलनी चाहिए।

आज के जीवन में इस नैतिक कहानी का महत्व

बतख और कछुए की यह कहानी आज के जीवन में भी बहुत उपयोगी है, क्योंकि कई बार हम किसी परिस्थिति को सुरक्षित मानकर सावधानी बरतना छोड़ देते हैं। बच्चों के जीवन में भी ऐसा हो सकता है।

उदाहरण के लिए, कोई बच्चा सड़क पर खेलते समय यह सोच सकता है कि वाहन चालक उसे देख लेगा, लेकिन सड़क पर खेलने का जोखिम बना रहता है। इसी तरह अनजान व्यक्ति की मीठी बातों पर भरोसा करना, इंटरनेट पर किसी अजनबी से निजी जानकारी साझा करना या किसी खतरनाक जगह पर बिना बड़े की अनुमति के जाना भी असावधानी के उदाहरण हैं। कहानी का कछुआ हमें सिखाता है कि सच्चा मित्र वही है जो जरूरत पड़ने पर सही बात कहे, भले ही वह बात सुनने में अच्छी न लगे।

वहीं बतख की गलती यह थी कि उसने अपने मित्र की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी भूल गई। इस कहानी को पढ़कर बच्चों को समझाया जा सकता है कि ईश्वर पर विश्वास रखना अच्छी बात है, लेकिन विश्वास का अर्थ यह नहीं कि हम सावधानी बरतना छोड़ दें।

हमें अपने आसपास के वातावरण को समझना चाहिए, खतरे के संकेत पहचानने चाहिए और जरूरत पड़ने पर माता-पिता या किसी जिम्मेदार व्यक्ति की सहायता लेनी चाहिए। यही सीख बड़ों के जीवन में भी लागू होती है, क्योंकि सुरक्षित और समझदारी भरा जीवन विश्वास, विवेक और जिम्मेदार व्यवहार के संतुलन से बनता है।

माता-पिता और शिक्षकों के लिए चर्चा प्रश्न

  1. बतख ने नदी के बीच स्थित चट्टान को छोड़ने का निर्णय क्यों लिया।
  2. कछुए ने बतख को दुख और दुर्भाग्य के बारे में क्या समझाया।
  3. बतख और कछुए के बीच दोस्ती कैसे हुई और कछुआ कैसा मित्र साबित हुआ।
  4. बतख अपने पुराने ठिकाने पर वापस क्यों लौटना चाहती थी।
  5. कछुए ने बतख को चील के बारे में चेतावनी देते समय क्या सलाह दी थी।
  6. बतख ने कछुए की बात को गंभीरता से क्यों नहीं लिया और इसका क्या परिणाम हुआ।
  7. यदि आपका कोई मित्र किसी खतरे को अनदेखा कर रहा हो, तो आप उसे किस तरह समझाएँगे।
  8. इस हंस और कछुए की कहानी से ईश्वर पर विश्वास और अपनी जिम्मेदारी निभाने के बीच क्या संबंध समझ में आता है।

कठिन शब्दों का अर्थ

शब्दअर्थ
घाटीपहाड़ों के बीच स्थित नीची और खुली जगह।
चट्टानपत्थर का बड़ा और कठोर हिस्सा।
दुर्भाग्यबुरा समय या विपरीत परिस्थिति।
गिद्धमृत जीवों का मांस खाने वाला बड़ा पक्षी।
धैर्यकठिन परिस्थिति में शांत बने रहने का गुण।
सतर्कताखतरे को पहचानने के लिए सावधान रहना।

संबंधित कहावतें

1. सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।


इसका अर्थ है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

2. होशियार को इशारा काफी।


इसका अर्थ है कि समझदार व्यक्ति छोटी-सी चेतावनी से भी खतरे को समझ जाता है।

3. दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है।


इसका अर्थ है कि पहले नुकसान उठा चुका व्यक्ति आगे अधिक सावधानी बरतता है।

बच्चों के लिए गतिविधियाँ

गतिविधि 1: कहानी के पात्रों का चित्र बनाइए।


बच्चों से बतख, कछुए और चील का चित्र बनाने को कहें। फिर उनसे प्रत्येक पात्र के स्वभाव के बारे में दो-दो वाक्य लिखवाएँ।

गतिविधि 2: सही निर्णय चुनिए।


बच्चों के सामने कुछ परिस्थितियाँ रखें, जैसे सड़क पर गेंद चली जाना, अनजान व्यक्ति का बुलाना या किसी मित्र को खतरे में देखना। उनसे पूछें कि ऐसी स्थिति में सुरक्षित निर्णय क्या होगा।

गतिविधि 3: सच्चे मित्र की पहचान।


बच्चों से पूछें कि कछुए ने एक अच्छे मित्र की कौन-सी विशेषताएँ दिखाईं। उनसे ऐसे तीन गुण लिखने को कहें जो एक अच्छे मित्र में होने चाहिए।

गतिविधि 4: कहानी का अभिनय।


बच्चों को बतख, कछुए और चील की भूमिकाएँ दें। उनसे कहानी का छोटा नाटक तैयार करवाएँ, जिसमें कछुआ बतख को सावधानी बरतने की सलाह देता है।

गतिविधि 5: कहानी का नया अंत लिखिए।


बच्चों से कहें कि वे कहानी का ऐसा नया अंत लिखें जिसमें बतख कछुए की चेतावनी सुनती है और चील से अपनी जान बचा लेती है।

नैतिक कहानियाँ ऐसी रोचक कथाएँ होती हैं जिनमें पात्रों और घटनाओं के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को समझाया जाता है। इनमें कभी जानवरों की मित्रता दिखाई जाती है, तो कभी किसी राजा, साधारण व्यक्ति या बच्चे के निर्णयों के परिणाम बताए जाते हैं। इन कहानियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि पाठकों को ईमानदारी, साहस, दया, धैर्य, समझदारी और जिम्मेदारी जैसे गुणों पर विचार करने का अवसर देना भी है। नैतिक साहित्य की परंपरा में ऐसी रचनाएँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, क्योंकि वे जीवन के व्यवहारिक अनुभवों और मानवीय मूल्यों को कथा के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

बच्चों के लिए नैतिक कहानियाँ विशेष रूप से उपयोगी होती हैं। बच्चे कहानी के पात्रों के व्यवहार को देखकर समझ सकते हैं कि किसी निर्णय का क्या परिणाम हो सकता है। जब वे बतख को कछुए की सलाह अनदेखी करते देखते हैं, तो उन्हें समझ आता है कि केवल अच्छा महसूस करना या किसी बात पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। अपनी सुरक्षा के लिए सही कदम उठाना भी जरूरी है। इसी तरह कछुए का व्यवहार बच्चों को सच्ची मित्रता का अर्थ समझाता है। वह केवल बतख के साथ समय नहीं बिताता, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसे सही सलाह भी देता है।

माता-पिता और शिक्षक कहानी पढ़ने के बाद बच्चों से यह चर्चा कर सकते हैं कि बतख ने कौन-सी गलती की और वह अपनी सुरक्षा कैसे कर सकती थी। बच्चों को यह भी समझाना चाहिए कि किसी मित्र की सलाह हमेशा मानना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि परिस्थिति को समझकर सही निर्णय लेना जरूरी है। यदि कोई खतरा दिखाई दे, तो बच्चों को किसी जिम्मेदार बड़े की मदद लेनी चाहिए।

इस प्रकार नैतिक कहानियाँ बच्चों की सोच विकसित करने, सही-गलत में अंतर समझने और अपने व्यवहार के परिणामों पर विचार करने में सहायता करती हैं। जब इन कहानियों की सीख को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ा जाता है, तब उनका वास्तविक महत्व सामने आता है।

इसी तरह की और रोचक कहानियाँ पढ़ने के लिए अलिफ लैला की कहानियाँ, पंचतंत्र की कहानियाँ और बच्चों की नैतिक कहानियाँ भी पढ़ें।

FAQ – हंस और कछुए की कहानी से जुड़े सामान्य प्रश्न

बतख और कछुए की कहानी किस संग्रह से जुड़ी है।

यह अलिफ लैला की एक नैतिक कहानी है, जिसमें बतख और कछुए की मित्रता के माध्यम से सावधानी और जिम्मेदारी का महत्व समझाया गया है।

बतख ने अपना पुराना ठिकाना क्यों छोड़ा था।

बतख ने नदी के बीच चट्टान के पास एक मृत व्यक्ति का शरीर देखा था। इसके बाद वहाँ गिद्ध और अन्य बड़े पक्षी आ गए। उनसे डरकर बतख ने अपनी जगह छोड़ दी थी।

बतख की मुलाकात कछुए से कहाँ हुई थी।

बतख की मुलाकात नदी के बीच एक ऊँचे पेड़ पर बैठने के दौरान कछुए से हुई थी। कछुए ने उसे हिम्मत रखने और दुख के बारे में लगातार न सोचने की सलाह दी थी।

कछुआ बतख को क्या समझाता था।

कछुआ बतख को समझाता था कि कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। उसे हिम्मत रखनी चाहिए और अपनी सुरक्षा के लिए सावधानी भी बरतनी चाहिए।

बतख अपने पुराने ठिकाने पर वापस क्यों गई।

जब बतख ने देखा कि गिद्ध और अन्य पक्षी वहाँ से चले गए हैं, तो उसे लगा कि अब उसकी पुरानी जगह सुरक्षित है। इसलिए वह वापस लौट गई।

लेखिका

Urvashi अवतार

इस कहानी की प्रकाशित तिथि:

इस कहानी की अंतिम अपडेट तिथि:

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