लोमड़ी और मुर्गी की कहानी
अलिफ लैला की कहानियाँ अपनी रोमांचक घटनाओं, चतुर पात्रों और जीवन से जुड़ी सीख के लिए प्रसिद्ध हैं। इन कहानियों में कभी ताकत की परीक्षा होती है, तो कभी बुद्धिमानी और धैर्य से बड़ी से बड़ी मुश्किल को हल किया जाता है। लोमड़ी और मुर्गी की कहानी भी ऐसी ही एक रोचक कथा है, जिसमें एक भूखा लोमड़ा अपनी मीठी बातों से मुर्गे को फँसाने की कोशिश करता है, लेकिन मुर्गे की सूझबूझ उसकी योजना को नाकाम कर देती है।
एक दिन गाँव का एक बूढ़ा मुर्गा दाना चुगते-चुगते घने जंगल में पहुँच जाता है। वहाँ उसकी मुलाकात एक चालाक लोमड़े से होती है। लोमड़ा उसे झूठी दोस्ती और जंगल में शांति स्थापित होने की कहानी सुनाकर नीचे बुलाना चाहता है। लेकिन अनुभवी मुर्गा उसकी बातों में नहीं आता और अपनी बुद्धिमानी से खुद को सुरक्षित बचा लेता है।
यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि मीठी बातों पर तुरंत भरोसा करने के बजाय परिस्थिति को समझना चाहिए। संकट के समय घबराने के बजाय धैर्य और समझदारी से काम लेना ही सच्ची चतुराई है।
- लोमड़ी और मुर्गी की कहानी
- पूरी कहानी
- नैतिक कहानी "लोमड़ी और मुर्गी की कहानी" के मुख्य पात्र
- इस नैतिक कहानी से क्या सीख मिलती है
- आज के जीवन में इस नैतिक कहानी का महत्व
- माता-पिता और शिक्षकों के लिए चर्चा प्रश्न
- कठिन शब्दों का अर्थ
- संबंधित कहावतें
- बच्चों के लिए गतिविधियाँ
- नैतिक कहानियों के बारे में
- FAQ – लोमड़ी और मुर्गी की कहानी से जुड़े सामान्य प्रश्न
- लेखिका
पूरी कहानी
शेख के आँगन में रहने वाला बूढ़ा मुर्गा
बहुत समय पहले की बात है। एक हरे-भरे गाँव में एक शेख रहता था। उसके घर के बड़े आँगन में बहुत से मुर्गे और मुर्गियाँ रहते थे। कोई सुनहरे रंग का था, तो कोई सफेद पंखों वाला। कुछ मुर्गों की कलगी लाल थी, तो कुछ की पूँछ रंग-बिरंगे पंखों से सजी हुई थी।
उन सबमें एक बूढ़ा मुर्गा सबसे अलग था। उसकी उम्र अधिक थी और उसने अपने जीवन में बहुत कुछ देखा था। गाँव के लोग उसकी समझदारी और अनुभव का सम्मान करते थे। वह जानता था कि हर परिस्थिति में जल्दबाजी करना ठीक नहीं होता।
एक सुबह सूरज की सुनहरी किरणें खेतों पर फैल रही थीं। बूढ़ा मुर्गा दाना चुगने के लिए आँगन से बाहर निकला। उसे रास्ते में अनाज के दाने, तिल और छोटे-छोटे कीड़े मिलते गए। वह खाने में इतना मग्न हो गया कि उसे पता ही नहीं चला कि वह गाँव से बहुत दूर निकल आया है।
जंगल में लोमड़े से सामना
कुछ समय बाद मुर्गे ने सिर उठाकर चारों ओर देखा। अब न गाँव दिखाई दे रहा था और न ही शेख का घर। चारों तरफ ऊँचे पेड़, घनी झाड़ियाँ और सुनसान रास्ते थे। हवा चलने पर पत्ते सरसराते, तो मुर्गे का दिल घबराने लगता।
वह बुदबुदाया, “अरे! मैं तो बहुत दूर आ गया हूँ। अब घर वापस जाने का रास्ता कैसे मिलेगा?”
तभी झाड़ियों के पीछे से चर्र-चर्र की आवाज सुनाई दी। मुर्गा चौकन्ना हो गया। उसने ध्यान से देखा, तो एक लोमड़ा धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था। लोमड़े के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उसकी नजर मुर्गे पर टिकी हुई थी।
मुर्गा समझ गया कि वह खतरे में है। लोमड़ा उससे कहीं अधिक ताकतवर था और उसे अपना भोजन बनाने का मौका नहीं छोड़ता।
मुर्गे ने मन ही मन कहा, “अगर मैं यहीं खड़ा रहा, तो यह लोमड़ा मुझे पकड़ लेगा। मुझे तुरंत कोई सुरक्षित जगह ढूँढ़नी होगी।”
उसी समय उसकी नजर पास की एक ऊँची दीवार पर पड़ी। उसने अपने पंख फड़फड़ाए और तेजी से उड़कर दीवार के ऊपर जा बैठा। अब लोमड़ा नीचे था और मुर्गा उसकी पहुँच से बाहर।
लोमड़े की झूठी दोस्ती
लोमड़ा दीवार के नीचे पहुँचा और ऊपर बैठे मुर्गे को देखकर मुस्कुराया। उसने सोचा कि यदि वह मुर्गे को अपनी मीठी बातों में उलझा ले, तो शायद उसे नीचे आने के लिए मना सकता है।
वह बड़े प्यार से बोला, “सलाम अलैकुम, मेरे प्यारे दोस्त! तुम कैसे हो? क्या तुम मुझे पहचानते नहीं? हम तो पुराने मित्र हैं।”
मुर्गा चुप रहा। उसने लोमड़े की ओर देखा, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।
लोमड़े ने फिर कहा, “अरे भाई, मेरे सलाम का जवाब तो दो। क्या तुम मुझसे नाराज हो? मैं तो तुम्हारा हालचाल पूछने आया हूँ।”
मुर्गा उसकी बातों को ध्यान से सुन रहा था। उसे पता था कि लोमड़ा उसे पकड़ने का अवसर खोज रहा है। इसलिए उसने तय किया कि वह बिना सोचे-समझे नीचे नहीं उतरेगा।
लोमड़े को मुर्गे की चुप्पी खटकने लगी। उसने अपनी चाल बदलते हुए कहा, “तुम्हें एक खुशखबरी सुनानी है। जंगल में अब शांति स्थापित हो गई है। शेर और चील ने मिलकर ऐसा नियम बनाया है कि कोई जानवर किसी दूसरे जानवर को नुकसान नहीं पहुँचाएगा।”
फिर उसने गर्व से कहा, “मैं शेर का दूत हूँ। मैं तुम्हें यह संदेश देने आया हूँ कि अब सभी जानवर मिल-जुलकर रह सकते हैं। इसलिए नीचे आ जाओ। तुम्हें मुझसे डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
मुर्गे ने लोमड़े की चाल पहचान ली
मुर्गे ने मन ही मन सोचा, “यह लोमड़ा मुझे अपना दोस्त बता रहा है, जबकि मैं जानता हूँ कि वह मुझे पकड़ना चाहता है। अगर जंगल में सचमुच शांति स्थापित हो गई होती, तो भी मुझे बिना जाँच किए इसकी बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए।”
वह शांत बैठा रहा। लोमड़ा बार-बार उसे नीचे आने के लिए कहता रहा।
“अरे, मैं सच बोल रहा हूँ। क्या तुम्हें शांति के इस नए नियम पर विश्वास नहीं है? कम से कम नीचे आकर मुझसे बात तो करो।”
मुर्गा जानता था कि डरकर भागना या गुस्से में जवाब देना उसके लिए ठीक नहीं होगा। उसे ऐसी तरकीब सोचनी थी जिससे लोमड़ा स्वयं वहाँ से चला जाए।
कुछ देर बाद मुर्गे ने नीचे झाँका और शांत स्वर में कहा, “लोमड़े भाई, जंगल में शांति स्थापित होना तो बहुत अच्छी बात है। मैं भी चाहता हूँ कि सभी जानवर सुरक्षित रहें। लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ कुछ नया होने वाला है।”
लोमड़ा चौंक गया। उसने पूछा, “नया क्या होने वाला है? तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?”
ग्रेहाउंड कुत्ते का नाम सुनकर लोमड़ा भागा
मुर्गे ने दूर की ओर देखने का नाटक किया और बोला, “मुझे नीचे धूल उड़ती दिखाई दे रही है। ऊपर चीलें भी चक्कर लगा रही हैं। लगता है कि कोई बड़ा जानवर इस ओर आ रहा है।”
लोमड़े की मुस्कान धीरे-धीरे गायब होने लगी। उसने घबराकर पूछा, “क्या तुम बता सकते हो कि वह कौन है?”
मुर्गे ने कुछ पल रुककर कहा, “अभी साफ दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन शायद वह एक बड़ा ग्रेहाउंड कुत्ता है।”
ग्रेहाउंड का नाम सुनते ही लोमड़ा बुरी तरह घबरा गया। उसके कान खड़े हो गए और उसकी पूँछ नीचे झुक गई। वह जानता था कि शिकारी कुत्ता उसके लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
वह हकलाते हुए बोला, “ग्रेहाउंड! अरे, मुझे तो अभी जाना होगा। मैं तुमसे फिर कभी मिलूँगा।”
इतना कहकर लोमड़ा बिना देर किए जंगल की ओर भागने लगा।
मुर्गे ने उसे पुकारकर कहा, “अरे भाई, तुम क्यों भाग रहे हो? तुम तो कह रहे थे कि जंगल में अब शांति है और कोई किसी को नुकसान नहीं पहुँचाएगा।”
लोमड़ा भागते-भागते चिल्लाया, “हाँ, लेकिन शायद उस नए कुत्ते को शांति के नियम के बारे में पता नहीं होगा!”
यह कहते हुए वह झाड़ियों के बीच गायब हो गया।
मुर्गे की समझदारी ने बचाई जान
लोमड़े के चले जाने के बाद मुर्गे ने राहत की साँस ली। उसने चारों ओर देखा और यह सुनिश्चित किया कि अब कोई खतरा नहीं है। फिर वह धीरे-धीरे दीवार से नीचे उतरा।
उसने मन ही मन ईश्वर का धन्यवाद किया कि संकट के समय उसे अपनी बुद्धि का सही उपयोग करने का अवसर मिला।
मुर्गा समझ गया था कि लोमड़े की मीठी बातें केवल उसे फँसाने का तरीका थीं। यदि वह उसकी बातों पर विश्वास करके नीचे उतर जाता, तो शायद अपनी जान बचाना मुश्किल हो जाता।
अब उसने घर लौटने का रास्ता खोजने पर ध्यान दिया। वह सावधानी से आगे बढ़ता रहा और आखिरकार अपने गाँव पहुँच गया।
शेख के आँगन में पहुँचकर उसने राहत महसूस की। उस दिन के अनुभव ने उसे फिर याद दिलाया कि जीवन में केवल ताकत ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुभव और समझदारी भी बहुत काम आते हैं।
इस कहानी का अंत हमें बताता है कि संकट के समय शांत रहकर परिस्थिति को समझना और सही निर्णय लेना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
नैतिक कहानी “लोमड़ी और मुर्गी की कहानी” के मुख्य पात्र
बूढ़ा मुर्गा
बूढ़ा मुर्गा कहानी का सबसे समझदार पात्र है। वह जंगल में रास्ता भटक जाता है, लेकिन खतरे को पहचानकर ऊँची दीवार पर बैठ जाता है। वह लोमड़े की झूठी बातों में नहीं आता और अपनी सूझबूझ से सुरक्षित घर लौटता है।
चालाक लोमड़ा
लोमड़ा मुर्गे को पकड़ना चाहता है। वह झूठी दोस्ती और जंगल में शांति स्थापित होने की कहानी सुनाकर मुर्गे को नीचे बुलाने की कोशिश करता है। लेकिन उसकी चालाकी मुर्गे की बुद्धिमानी के सामने असफल हो जाती है।
शेख
शेख वह व्यक्ति है जिसके आँगन में मुर्गा रहता है। उसका घर मुर्गे के लिए सुरक्षित स्थान है, जहाँ वह अंत में वापस पहुँच जाता है।
इस नैतिक कहानी से क्या सीख मिलती है
1. मुसीबत में घबराने के बजाय सोचें।
मुर्गे ने डर के बावजूद जल्दी से सुरक्षित स्थान खोजा और अपनी जान बचाई।
2. हर मीठी बात पर भरोसा न करें।
लोमड़े ने दोस्ती और शांति का बहाना बनाया, लेकिन उसका असली इरादा मुर्गे को पकड़ना था।
3. बुद्धिमानी कई बार ताकत से अधिक उपयोगी होती है।
मुर्गा लोमड़े से कमजोर था, फिर भी उसने अपनी समझदारी से उसे हरा दिया।
4. सही समय पर सही निर्णय लें।
मुर्गे ने खतरा पहचानते ही दीवार पर बैठने का निर्णय लिया और सुरक्षित दूरी बनाए रखी।
5. धैर्य बनाए रखें।
मुर्गे ने जल्दबाजी में लोमड़े से बहस नहीं की, बल्कि सही अवसर का इंतजार किया।
6. झूठे वादों से सावधान रहें।
किसी की बात सुनने के साथ उसके इरादों और व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए।
आज के जीवन में इस नैतिक कहानी का महत्व
आज के जीवन में भी कई बार लोग मीठी बातों, झूठे वादों या दोस्ती का दिखावा करके दूसरों से अपना काम करवाने की कोशिश करते हैं।
बच्चों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर मुस्कुराता चेहरा भरोसेमंद हो, यह आवश्यक नहीं है। यदि कोई अनजान व्यक्ति उन्हें उपहार देने, कोई रहस्य बताने या अपने साथ चलने के लिए कहे, तो उन्हें उसके साथ नहीं जाना चाहिए और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को बताना चाहिए।
इंटरनेट पर भी नकली पुरस्कार, संदिग्ध लिंक और अनजान लोगों के संदेशों से सावधान रहना चाहिए। बूढ़े मुर्गे की तरह हमें किसी भी परिस्थिति में पहले अपनी सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए, फिर शांत मन से उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति पर शक किया जाए, बल्कि यह है कि भरोसा सोच-समझकर किया जाए। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि कठिन परिस्थिति में ताकतवर व्यक्ति से भिड़ना ही एकमात्र समाधान नहीं होता। कई बार दूरी बनाए रखना, मदद माँगना और बुद्धिमानी से परिस्थिति का सामना करना अधिक सुरक्षित विकल्प होता है।
माता-पिता और शिक्षकों के लिए चर्चा प्रश्न
- बूढ़ा मुर्गा जंगल में कैसे पहुँचा और वहाँ पहुँचने के बाद उसे किस खतरे का सामना करना पड़ा।
- लोमड़े ने मुर्गे को नीचे बुलाने के लिए कौन-कौन से बहाने बनाए।
- मुर्गे ने लोमड़े की बातों पर तुरंत भरोसा क्यों नहीं किया।
- मुर्गे ने ग्रेहाउंड कुत्ते का नाम लेकर लोमड़े को कैसे भगाया।
- यदि मुर्गा डरकर तुरंत दीवार से नीचे उतर जाता, तो क्या हो सकता था।
- अगर कोई अनजान व्यक्ति बच्चे को कोई आकर्षक उपहार देने का वादा करे, तो बच्चे को क्या करना चाहिए।
- इस लोमड़ी और मुर्गी की कहानी में बुद्धिमानी और ताकत के बीच क्या अंतर दिखाई देता है।
- आप मुर्गे की जगह होते, तो सुरक्षित घर लौटने के लिए कौन-से कदम उठाते।
कठिन शब्दों का अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| शेख | इस कहानी में गाँव में रहने वाला एक व्यक्ति। |
| अनुभव | किसी काम या घटना से प्राप्त जानकारी। |
| इरादा | किसी काम को करने की इच्छा या योजना। |
| दूत | संदेश पहुँचाने वाला व्यक्ति या पात्र। |
| ग्रेहाउंड | कुत्तों की एक नस्ल, जो अपनी तेज दौड़ने की क्षमता के लिए जानी जाती है। |
| बहाना | किसी वास्तविक बात को छिपाने या किसी काम को उचित दिखाने के लिए कही गई बात। |
संबंधित कहावतें
1. सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।
इसका अर्थ है कि लापरवाही करने से नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।
2. बुद्धि बल से बड़ी होती है।
इसका अर्थ है कि कई परिस्थितियों में समझदारी, शारीरिक शक्ति से अधिक उपयोगी साबित होती है।
3. दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है
इसका अर्थ है कि बुरा अनुभव होने के बाद व्यक्ति भविष्य में अधिक सावधान हो जाता है।
बच्चों के लिए गतिविधियाँ
गतिविधि 1: कहानी का चित्र बनाइए।
बच्चे एक ऊँची दीवार पर बैठे मुर्गे और नीचे खड़े लोमड़े का चित्र बनाएँ। चित्र के नीचे लिखें कि मुर्गे ने सुरक्षित रहने के लिए क्या किया।
गतिविधि 2: सही निर्णय चुनिए।
बच्चों को यह परिस्थिति दें कि कोई अनजान व्यक्ति उनसे कहता है कि वह उनका दोस्त है और उन्हें अपने साथ चलने के लिए बुलाता है। बच्चे बताएँ कि ऐसी स्थिति में सुरक्षित निर्णय क्या होगा। उन्हें समझाएँ कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ नहीं जाना चाहिए और भरोसेमंद बड़े को बताना चाहिए।
गतिविधि 3: कहानी का अभिनय कीजिए।
बच्चे मुर्गे और लोमड़े की भूमिका निभाकर कहानी का छोटा नाटक प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे वे पात्रों के व्यवहार और निर्णयों को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे।
गतिविधि 4: कहानी का नया अंत लिखिए।
बच्चों से कहें कि वे एक ऐसा अंत लिखें जिसमें मुर्गा लोमड़े से बचने के लिए कोई दूसरी समझदारी भरी तरकीब अपनाता है।
गतिविधि 5: सीख के तीन वाक्य लिखिए।
बच्चे कहानी पढ़कर तीन वाक्य लिखें। पहले में धैर्य, दूसरे में सावधानी और तीसरे में बुद्धिमानी का महत्व बताएँ।
नैतिक कहानियों के बारे में
नैतिक कहानियाँ ऐसी कथाएँ होती हैं जिनमें मनोरंजन के साथ जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों और व्यवहार की सीख भी मिलती है। इनमें जानवरों, राजाओं, साधारण लोगों और काल्पनिक पात्रों के माध्यम से ईमानदारी, दया, साहस, धैर्य, बुद्धिमानी और सावधानी जैसे गुणों को समझाया जाता है। पंचतंत्र, हितोपदेश और अलिफ लैला जैसी कथा-परंपराओं की कहानियाँ पाठकों को मनोरंजक घटनाओं के माध्यम से मानवीय व्यवहार और निर्णयों पर विचार करने का अवसर देती हैं।
बच्चों के लिए नैतिक कहानियाँ विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं, क्योंकि वे कठिन विचारों को सरल भाषा और याद रहने वाले पात्रों के माध्यम से समझाती हैं। जब बच्चे बूढ़े मुर्गे को लोमड़े की चाल पहचानते हुए देखते हैं, तो वे समझ सकते हैं कि किसी की बात सुनना और उस पर आँख बंद करके भरोसा करना अलग-अलग बातें हैं। इसी तरह, कहानी पर चर्चा करने से बच्चों को यह विचार करने में मदद मिलती है कि किसी परिस्थिति में कौन-सा निर्णय सुरक्षित और उचित होगा।
माता-पिता और शिक्षक कहानी पढ़ने के बाद बच्चों से पूछ सकते हैं कि पात्र ने ऐसा निर्णय क्यों लिया, उसके परिणाम क्या हुए और क्या कोई दूसरा विकल्प बेहतर हो सकता था। इससे बच्चों में सोचने, कारण समझने और अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने की क्षमता विकसित हो सकती है। हालांकि, नैतिक कहानी की सीख को वास्तविक जीवन की हर परिस्थिति पर बिना विचार किए लागू नहीं करना चाहिए। बच्चों को यह भी समझाना चाहिए कि सावधानी का अर्थ सभी लोगों से डरना नहीं, बल्कि परिस्थिति को समझकर उचित निर्णय लेना है।
इस तरह की और कहानियाँ पढ़ने के लिए आप अलिफ लैला की कहानियाँ, लोमड़ी की चतुराई की कहानी और बच्चों के लिए उपलब्ध अन्य नैतिक कहानियाँ भी पढ़ सकते हैं।
FAQ – लोमड़ी और मुर्गी की कहानी से जुड़े सामान्य प्रश्न
चालाक लोमड़ी और समझदार मुर्गे की कहानी किस बारे में है।
यह अलिफ लैला की एक रोचक कहानी है, जिसमें एक बूढ़ा मुर्गा जंगल में लोमड़े से सामना होने पर अपनी बुद्धिमानी और धैर्य से खुद को सुरक्षित बचा लेता है।
मुर्गा जंगल में कैसे पहुँचा।
मुर्गा शेख के घर से दाना चुगने निकला था। खाते-खाते वह गाँव से बहुत दूर निकल गया और अनजाने में घने जंगल में पहुँच गया।
लोमड़े ने मुर्गे को नीचे बुलाने के लिए क्या कहा।
लोमड़े ने झूठी दोस्ती जताई और कहा कि जंगल में शेर तथा चील ने शांति का नियम लागू कर दिया है। उसने दावा किया कि अब कोई जानवर दूसरे को नुकसान नहीं पहुँचाएगा।
मुर्गे ने लोमड़े की बात पर भरोसा क्यों नहीं किया।
मुर्गा जानता था कि लोमड़ा उसे पकड़ सकता है। इसलिए उसने उसकी मीठी बातों पर तुरंत विश्वास करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखी।
मुर्गे ने लोमड़े को कैसे भगाया।
मुर्गे ने कहा कि शायद एक बड़ा ग्रेहाउंड कुत्ता वहाँ आ रहा है। कुत्ते का नाम सुनकर लोमड़ा डर गया और जंगल की ओर भाग गया।




