लोमड़ी की चतुराई | Clever Fox

Alif Laila Story in Hindi of fox and wolf

एक बार की बात है, एक लोमड़ी और एक भेड़िया एक ही घर में रहते थे। भेड़िया बहुत ही बेरहम और स्वार्थी था, जबकि लोमड़ी नरम दिल और समझदार थी। दोनों साथ रहते हुए अपने-अपने स्वभाव के कारण आपस में संघर्ष करते रहते थे।

एक दिन लोमड़ी ने भेड़िये से कहा, “अगर तुम इसी तरह दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करते रहोगे, तो एक दिन अल्लाह इंसानों को जानवरों पर राज करने की ताकत दे देगा। इंसान चिड़ियों को पकड़ सकता है, मछलियों को जाल में फंसा सकता है, और यहां तक कि पहाड़ों को भी तोड़ सकता है। ये सब वो अपनी चालाकी और होशियारी से करता है।”

भेड़िये ने यह सुनकर गुस्से में कहा, “तुम्हें मुझसे इस तरह बात करने का कोई अधिकार नहीं है।
अगर तुमने दुबारा ऐसा कुछ कहा, तो मैं तुम्हें नुकसान पहुंचा दूंगा।”

लोमड़ी ने कहा, “ठीक है, मैं तुमसे ऐसा कुछ नहीं कहूंगी जो तुम्हें बुरा लगे,” लेकिन उसने मन में ठान लिया कि एक दिन भेड़िये से बदला जरूर लेगी।

कुछ दिनों बाद, लोमड़ी एक बागीचे में गई और देखा कि दीवार के पास एक गड्ढा खुदा हुआ है, जिसे मिट्टी और चटाई से ढका गया था। उसे समझ आ गया कि यह गड्ढा जानवरों को फंसाने के लिए खोदा गया है। उसने सोचा, “काश, मेरा दुश्मन भेड़िया इस गड्ढे में गिर जाए।”

लोमड़ी ने योजना बनाई और घर आकर भेड़िये से कहा, “अल्लाह ने तुम्हारे लिए बागीचे में घुसने का आसान रास्ता बनाया है। वहाँ ढेर सारे फल लगे हैं और बाग का मालिक मर चुका है। अब वहाँ कोई खतरा नहीं है।”

भेड़िये ने लोमड़ी की बात पर विश्वास कर लिया और दोनों बागीचे की ओर चल दिए। जब भेड़िया गड्ढे के पास पहुँचा, तो लोमड़ी ने कहा, “यहीं से अंदर जाओ, दीवार पहले से टूटी हुई है।” भेड़िया गड्ढे के ऊपर से चला और बीच में पहुँचते ही गड्ढे में गिर पड़ा।

लोमड़ी खुशी से नाचने लगी और गड्ढे के पास जाकर भेड़िये को चिढ़ाने लगी। भेड़िया रोने लगा और बोला, “मुझ पर रहम करो और मुझे यहाँ से बाहर निकालो। मैं वादा करता हूँ कि आगे से कभी किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करूंगा।”

लोमड़ी ने सोचा कि भेड़िये को सबक सिखाना चाहिए, लेकिन भेड़िये की हालत देखकर उसे दया आ गई। उसने अपनी पूंछ गड्ढे में लटकाई ताकि भेड़िया उसे पकड़कर बाहर आ सके। लेकिन भेड़िया ने लोमड़ी को खींच लिया, जिससे लोमड़ी भी गड्ढे में गिर गई।

गड्ढे में फंसी लोमड़ी ने चालाकी से कहा, “अगर हम दोनों यहाँ रहेंगे, तो मर जाएंगे। मुझे तुम्हारी मदद से बाहर निकलने दो। फिर मैं तुम्हें भी बाहर निकाल दूंगी।” भेड़िया राजी हो गया। लोमड़ी ने भेड़िये के कंधे पर चढ़कर गड्ढे से बाहर छलांग लगा दी।

बाहर निकलते ही भेड़िये ने चिल्लाकर कहा, “मुझे मत भूलना, मुझे भी बाहर निकालो।”
लेकिन लोमड़ी ने जवाब दिया, “तुमने मुझसे जो बुरा किया, उसका यही अंजाम है। अब तुम अपनी करनी का फल भुगतो।”

इसके बाद लोमड़ी ने बागीचे के रखवालों को बुलाकर गड्ढे के बारे में बताया। रखवालों ने आकर भेड़िये को पत्थरों से मार दिया। लोमड़ी खुशी-खुशी अपने घर लौट गई और वहाँ सुखी जीवन जीने लगी।

शिक्षा :

धैर्य और चतुराई से बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है।

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