“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा” — ये पंक्तियाँ सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। इसे ‘तराना-ए-हिंदी’ के नाम से भी जाना जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत एकता और अखंडता का सबसे बड़ा प्रतीक बना। आज भी भारतीय सेना के बैंड और स्कूलों में इस गीत की गूँज सुनाई देती है। इस लेख में हम इस अमर गीत के पूर्ण बोल (Lyrics), इसके गूढ़ अर्थ और इसे लिखने वाले कवि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
सारे जहाँ से अच्छा – कविता हिंदी में (Full Lyrics)
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा
पर्बत वो सब से ऊँचा हम-साया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा
गोदी में खेलती हैं इस की हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिन के दम से रश्क-ए-जिनाँ हमारा
ऐ आब-रूद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझ को
उतरा तिरे किनारे जब कारवाँ हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
यूनान ओ मिस्र ओ रूमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा
सारे जहाँ से अच्छा – कविता का अर्थ और भावार्थ
इस कविता के हर शेर (Stanza) में भारत की भौगोलिक सुंदरता और यहाँ की संस्कृति का गहरा वर्णन है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- मातृभूमि की श्रेष्ठता:
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलसिताँ हमारा। कवि भारत की तुलना एक ऐसे ‘गुलसिताँ’ (बगीचे) से करते हैं जहाँ हम सभी देशवासी ‘बुलबुल’ की तरह चहकते हैं। इक़बाल का मानना है कि पूरी दुनिया के बगीचों में भारत सबसे सुंदर और खुशहाल है। - देश से गहरा जुड़ाव:
ग़ुर्बत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में। कवि कहते हैं कि यदि हम ‘ग़ुर्बत’ (परदेस या विदेश) में भी हों, तो भी हमारा मन हमेशा अपने ‘वतन’ (देश) में ही रहता है। इंसान शरीर से कहीं भी रहे, उसकी पहचान और उसकी आत्मा अपने देश से ही जुड़ी होती है। - हिमालय का गौरव:
पर्बत वह सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का। यहाँ हिमालय पर्वत का वर्णन किया गया है। वह इतना ऊँचा है कि ‘आसमाँ का हमसाया’ (आसमान का पड़ोसी) मालूम पड़ता है। वह हमारा ‘संतरी’ (पहरेदार) और ‘पासबाँ’ (रक्षक) बनकर उत्तर दिशा में खड़ा है। - प्रकृति और नदियाँ:
गोदी में खेलती हैं इसकी हज़ारों नदियाँ। भारत की भूमि इतनी उपजाऊ और समृद्ध है क्योंकि यहाँ हज़ारों नदियाँ बहती हैं। इन नदियों के कारण यह देश ‘रश्क-ए-जनाँ’ (स्वर्ग के लिए भी ईर्ष्या का विषय) बन गया है, यानी स्वर्ग भी भारत की सुंदरता को देखकर जलता है। - सांप्रदायिक सद्भाव:
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। यह इस गीत की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है। कवि स्पष्ट संदेश देते हैं कि कोई भी धर्म ‘बैर’ (दुश्मनी) करना नहीं सिखाता। हम सब ‘हिन्दी’ हैं, यानी हम सब की साझा पहचान ‘हिंदुस्तानी’ होना है। - भारतीय सभ्यता की अमरता:
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। कवि गर्व से कहते हैं कि दुनिया की कई पुरानी सभ्यताएं (यूनान, मिस्र, रोम) समय की मार से मिट गईं, लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी जीवित है। ‘दौर-ए-ज़माँ’ (समय का चक्र) भले ही सदियों से हमारा दुश्मन रहा हो, लेकिन हमारी ‘हस्ती’ (अस्तित्व) को कोई मिटा नहीं सका।
कवि का परिचय: अल्लामा मोहम्मद इक़बाल
अल्लामा मोहम्मद इक़बाल (1877–1938) आधुनिक युग के एक महान कवि, दार्शनिक और विचारक थे। हिंदी और उर्दू साहित्य में उनका स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उनके बारे में कुछ मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:
- परिचय: उनका जन्म 9 नवंबर 1877 को सियालकोट (तत्कालीन अविभाजित भारत) में हुआ था। उन्हें ‘शायर-ए-मशरिक’ (पूर्व का कवि) के नाम से भी जाना जाता है।
- सारे जहाँ से अच्छा: भारत में वे अपनी अमर रचना ‘तराना-ए-हिंदी’ (सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा) के लिए हर दिल में बसे हुए हैं। यह गीत आज भी भारतीय गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
- दार्शनिक गहराई: इक़बाल ने अपनी कविताओं के माध्यम से ‘खुदी’ (आत्म-सम्मान या स्वयं की पहचान) का दर्शन दिया। उनका मानना था कि इंसान को अपने व्यक्तित्व को इतना बुलंद करना चाहिए कि ईश्वर भी उसकी रज़ा पूछे।
- प्रमुख कृतियाँ: उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में ‘बांग-ए-दरा’, ‘बाल-ए-जिब्रील’, ‘ज़रब-ए-कलीम’ (उर्दू) और ‘असरार-ए-खुदी’ (फ़ारसी) शामिल हैं।
- वैश्विक प्रभाव: वे केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक गहरे राजनीतिक विचारक भी थे, जिनके विचारों ने दक्षिण एशिया के इतिहास और साहित्य पर गहरा प्रभाव डाला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: “सारे जहाँ से अच्छा” का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया में हमारा देश भारत सबसे सुंदर और श्रेष्ठ है। ‘गुलसिताँ’ का अर्थ बगीचा है और ‘बुलबुलें’ का अर्थ देशवासी है।
प्रश्न: इस कविता में गंगा नदी का उल्लेख क्यों किया गया है?
उत्तर: कवि ने गंगा का उल्लेख भारतीय सभ्यता के उद्गम और गौरव को दर्शाने के लिए किया है, जहाँ प्राचीन काल से ही संस्कृतियों का संगम हुआ है।
प्रश्न: “यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा” वाली पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि दुनिया की प्राचीन सभ्यताएं (यूनान, मिस्र और रोम) समय के साथ नष्ट हो गईं, लेकिन भारतीय संस्कृति और सभ्यता आज भी जीवित और अटूट है।
प्रश्न: इस गीत को संगीतबद्ध किसने किया था?
उत्तर: यद्यपि यह एक कविता है, लेकिन इसे सबसे लोकप्रिय धुन प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर ने दी थी।
प्रश्न: ‘हिन्दी हैं हम’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: यहाँ ‘हिन्दी’ शब्द किसी भाषा के लिए नहीं, बल्कि ‘हिंद के निवासी’ (Indians) के लिए इस्तेमाल हुआ है, जो हमारी साझा राष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
अल्लामा इक़बाल द्वारा रचित “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की महानता का दस्तावेज़ है। यह हमें याद दिलाता है कि विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। इतिहास के तमाम उतार-चढ़ावों और विदेशी आक्रमणों के बावजूद हमारी सभ्यता का सुरक्षित रहना इस बात का प्रमाण है कि “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।” आज की युवा पीढ़ी के लिए यह गीत देशभक्ति की प्रेरणा का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है। हमें इस विरासत को संजोकर रखना चाहिए और इसकी पंक्तियों में छिपे ‘प्रेम और सद्भाव’ के संदेश को अपने जीवन में उतारना चाहिए। यदि आपको यह विस्तृत जानकारी और कविता के बोल पसंद आए हों, तो इसे अपने परिजनों के साथ साझा करें और भारत के इस गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने में हमारी मदद करें।
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