📖 पुष्प की अभिलाषा: माखनलाल चतुर्वेदी की कालजयी कविता के बोल और भावार्थ 🪶

पुष्प की अभिलाषा - माखनलाल चतुर्वेदी की फोटो

हिंदी साहित्य के ‘एक भारतीय आत्मा’ कहे जाने वाले पंडित माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित “पुष्प की अभिलाषा” (Pushp ki Abhilasha) कविता देशभक्ति की पराकाष्ठा है। यह कविता एक फूल के माध्यम से यह बताती है कि सच्चा सम्मान किसी देवता के चरणों में या सम्राटों के शव पर चढ़ने में नहीं, बल्कि देश के वीरों के चरणों की धूल बनने में है।

पुष्प की अभिलाषा – कविता हिंदी में (Full Lyrics)

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, डाला जाऊँ,

चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।

मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक

पुष्प की अभिलाषा – कविता का अर्थ और भावार्थ

इस कविता में माखनलाल चतुर्वेदी जी ने एक पुष्प (फूल) की इच्छा को बहुत ही मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है:

  1. मोह का त्याग:
    फूल कहता है कि उसे अप्सराओं के गहनों का हिस्सा बनने या प्रेमियों की माला बनकर किसी को रिझाने की कोई चाहत नहीं है।
  2. अहंकार से मुक्ति:
    वह राजाओं के शव पर चढ़ाए जाने या भगवान की मूर्ति पर सजकर अपने भाग्य पर गर्व करने की इच्छा भी नहीं रखता।
  3. सर्वोच्च इच्छा:
    अंत में, फूल वनमाली (माली) से विनती करता है कि उसे उस रास्ते पर फेंक दिया जाए जहाँ से देशभक्त और वीर जवान अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए गुजरते हैं।

कवि का परिचय: माखनलाल चतुर्वेदी

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी (1889–1968) आधुनिक हिंदी साहित्य के एक महान स्तंभ थे। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 1889 में मध्य प्रदेश में हुआ था। वे एक महान कवि, लेखक और पत्रकार थे। उन्हें ‘एक भारतीय आत्मा’ (A Indian Soul) के उपनाम से भी जाना जाता है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीयता और बलिदान की भावना कूट-कूट कर भरी होती है।

  • परिचय: उनका जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव में हुआ था। उन्हें साहित्य जगत में ‘एक भारतीय आत्मा’ के उपनाम से जाना जाता है।
  • साहित्यिक योगदान: वे छायावाद युग के प्रखर कवि, पत्रकार और लेखक थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का स्वर प्रमुखता से मिलता है।
  • प्रसिद्ध कविता: उनकी कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ कालजयी मानी जाती है, जिसकी पंक्तियाँ—”चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ…”—आज भी हर भारतीय के मन में देशभक्ति का संचार करती हैं।
  • प्रमुख कृतियाँ: उनके महत्वपूर्ण काव्य संग्रहों में ‘हिम किरीटनी’, ‘हिम तरंगिणी’, ‘युग चारण’, और ‘साहित्य देवता’ शामिल हैं।
  • सम्मान: उन्हें 1955 में ‘हिम तरंगिणी’ के लिए हिंदी का पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से भी अलंकृत किया।
  • पत्रकारिता: उन्होंने ‘प्रभा’, ‘कर्मवीर’ और ‘प्रताप’ जैसे पत्रों का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक धार दी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: ‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इस कविता का उद्देश्य देश के नागरिकों और युवाओं में देशभक्ति और बलिदान की भावना को जागृत करना है।

प्रश्न: ‘एक भारतीय आत्मा’ किसे कहा जाता है?

उत्तर: पंडित माखनलाल चतुर्वेदी को उनके राष्ट्रवादी लेखन के कारण ‘एक भारतीय आत्मा’ कहा जाता है।

प्रश्न: यह कविता किस काल की है?

उत्तर: यह कविता छायावादोत्तर काल की राष्ट्रीय सांस्कृतिक धारा की एक प्रमुख रचना है।

प्रश्न: माखनलाल चतुर्वेदी ने यह कविता कहाँ लिखी थी?

उत्तर: उन्होंने यह कविता बिलासपुर की जेल में बंद रहने के दौरान लिखी थी, जो उनके राष्ट्रप्रेम का जीवंत उदाहरण है।

प्रश्न: इस कविता में ‘सुरबाला’ और ‘सम्राट’ शब्दों का प्रयोग क्या दर्शाता है?

उत्तर: ये शब्द दुनिया के सुख-आराम और पद-प्रतिष्ठा को दर्शाते हैं, जिन्हें एक देशभक्त पुष्प तुच्छ मानता है।

प्रश्न: “वनमाली” से फूल क्या प्रार्थना कर रहा है?

उत्तर: फूल प्रार्थना कर रहा है कि उसे किसी सजावट के काम न लाकर उस रास्ते पर बिखेर दिया जाए जहाँ से देश के रक्षक (वीर) गुजरते हैं।

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