📖 कलम आज उनकी जय बोल: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की वीर रस की अमर कविता 🪶

कलम आज उनकी जय बोल कविता का चित्रण

हिंदी साहित्य के सूर्य और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ अपनी ओजस्वी वाणी के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविता “कलम आज उनकी जय बोल” (Kalam Aaj Unki Jai Bol) उन अनगिनत और गुमनाम शहीदों को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन बदले में किसी यश या कीर्ति की कामना नहीं की। आज इस लेख में हम इस देशभक्ति कविता (Patriotic Poem) के पूर्ण बोल और उसका गहराई से विश्लेषण करेंगे।

कलम आज उनकी जय बोल – कविता हिंदी में (Full Lyrics)

जला अस्थियां बारी-बारी
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गए पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

पीकर जिनकी लाल शिखाएं
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य चन्द्र भूगोल खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल

कलम आज उनकी जय बोल – कविता का अर्थ और भावार्थ

दिनकर जी इस कविता के माध्यम से अपनी कलम (लेखनी) को आदेश देते हैं कि वह उन वीरों का यशगान करे जिन्होंने स्वार्थहीन होकर देश के लिए बलिदान दिया।

  1. इतिहास की सीमा:
    दिनकर जी कहते हैं कि यह इतिहास ‘अंधा’ है जो अक्सर केवल बड़े नामों को याद रखता है, लेकिन उन गुमनाम वीरों की वीरता के गवाह आज भी सूर्य, चंद्रमा और यह संपूर्ण भूगोल है।
  2. बलिदान की पराकाष्ठा:
    जिन वीरों ने अपनी अस्थियाँ जलाकर आज़ादी की चिंगारी सुलगाई और अपनी जान का कोई मोल नहीं माँगा, कलम को उनकी जय-जयकार करनी चाहिए।
  3. गुमनाम शहीद:
    वे शहीद उन छोटे दीपकों की तरह थे जो तूफानों में भी जलते रहे और बिना किसी प्रशंसा की इच्छा रखे चुपचाप बुझ गए (शहीद हो गए)।

कवि का परिचय: रामधारी सिंह ‘दिनकर’

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908-1974) हिंदी के एक प्रमुख लेखक, कवि और निबंधकार थे। उन्हें आधुनिक युग का ‘श्रेष्ठ वीर रस का कवि’ माना जाता है। उन्हें ‘उर्वशी’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार और ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी कविताओं में विद्रोह, क्रांति और राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम मिलता है।

  • परिचय: उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। उन्हें आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में जाना जाता है।
  • राष्ट्रकवि: अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत और ओजस्वी रचनाओं के कारण उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनकी कविताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय जनता में क्रांति की लहर पैदा की थी।
  • प्रमुख रचनाएँ: उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में ‘कुरुक्षेत्र’, ‘रश्मिरथी’, ‘उर्वशी’, ‘हुंकार’ और ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ शामिल हैं। गद्य में उनकी पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ भारतीय इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ मानी जाती है।
  • सम्मान: उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1959 में पद्म भूषण, 1959 में ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1972 में ‘उर्वशी’ के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया
  • राजनीतिक योगदान: वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे और भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के रूप में भी सेवाएँ दीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: यह कविता किसे संबोधित है?

उत्तर: यह कविता उन सभी ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

प्रश्न: दिनकर जी को ‘राष्ट्रकवि’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के गहरे स्वर मिलते हैं, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और बाद में भी भारतीयों को प्रेरित किया।

प्रश्न: दिनकर जी ने ‘कलम’ को ही जय बोलने के लिए क्यों कहा है?

उत्तर: क्योंकि कलम इतिहास लिखती है। कवि चाहते हैं कि इतिहास उन वीरों के साथ न्याय करे जिन्हें दुनिया भूल चुकी है।

प्रश्न: “बिना गर्दन का मोल” का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है बिना किसी पुरस्कार या बदले की भावना के अपना सिर (जीवन) न्योछावर कर देना।

प्रश्न: इस कविता में “अंधा इतिहास” किसे कहा गया है?

उत्तर: वह इतिहास जो केवल राजाओं और प्रसिद्ध नामों को दर्ज करता है और साधारण सैनिकों के बलिदान को अनदेखा कर देता है।

प्रश्न: “लघु दीप” यहाँ किसका प्रतीक हैं?

उत्तर: ‘लघु दीप’ उन अनगिनत क्रांतिकारियों के प्रतीक हैं जिन्होंने छोटे-छोटे स्तर पर संघर्ष किया और चुपचाप शहीद हो गए।

प्रश्न: दिनकर जी की यह रचना किस रस के अंतर्गत आती है?

उत्तर: यह ‘वीर रस’ की उत्कृष्ट रचना है, जो पाठक के मन में उत्साह और गर्व का संचार करती है।

प्रश्न: ‘कलम आज उनकी जय बोल’ कविता के मुख्य कीवर्ड्स क्या हैं?

उत्तर: इस कविता के मुख्य कीवर्ड्स ‘कलम आज उनकी जय बोल लिरिक्स’, ‘दिनकर की देशभक्ति कविता’ और ‘Kalam Aaj Unki Jai Bol meaning’ हैं।

Scroll to Top