लघु कथाएँ | Short Story for Kids in Hindi
घने जंगल के बीचोंबीच एक ऊँचे टीले पर एक शक्तिशाली और रौबदार शेर रहता था। उसकी दहाड़ सुनकर दूर-दूर तक जानवरों की रूह काँप उठती थी। कोई भी उसके रास्ते में आने की हिम्मत नहीं करता था। एक दिन दोपहर को, जब सूरज सिर पर था और गर्म हवा पेड़ों की पत्तियों को हिला रही थी, शेर अपनी गुफा में गहरी नींद सो रहा था।
तभी वहाँ एक छोटा सा चूहा भागता-भागता आ पहुँचा। वह खेलते-खेलते गुफा में घुस गया, और जाने-अनजाने में शेर के शरीर पर चढ़ गया। कभी उसकी पीठ पर भागता, कभी उसकी पूँछ खींचता — उसे तो खेल लग रहा था, पर यह खेल जल्द ही मुसीबत बन गया।
शेर की नींद खुली। उसने गरजते हुए आँखें खोलीं और अपनी भारी पंजे से चूहे को पकड़ लिया।
“कौन है जो मेरी नींद में खलल डालने की जुर्रत कर रहा है?” शेर गरजते हुए बोला।
बेचारा चूहा डर से काँपने लगा। उसने हकलाते हुए कहा, “म… माफ कर दीजिए महाराज, गलती से यहाँ आ गया। मेरा इरादा आपको परेशान करने का नहीं था।”
Short Story for Kids in Hindi
शेर ने गुर्राकर कहा, “तू इतना छोटा और निडर कैसे हो गया कि जंगल के राजा की पूँछ से खेलने लगा? अब तो तू मारा गया!”
चूहे ने हाथ जोड़कर विनती की, “महाराज, अगर आप मुझे छोड़ देंगे, तो मैं जीवन भर आपका एहसान मानूंगा। और कौन जाने, कभी मैं आपकी मदद कर पाऊँ।”
शेर ठहाका मारकर हँस पड़ा — “हा हा हा! तू मेरी मदद करेगा? ये तो मज़ाक की बात है! पर चल, तेरी जान छोड़ता हूँ। जा, छोटा है, पर दिल बड़ा है तेरा।”
और उसने चूहे को जाने दिया। चूहा खुशी से उछलता हुआ चला गया, “धन्यवाद, महाराज! मैं आपका यह उपकार कभी नहीं भूलूँगा।”
कुछ दिन बीते। एक सुबह, शेर जंगल में घूमने निकला। तभी उसके पैर एक शिकारी के लोहे के जाल में फँस गए। वह दहाड़ने लगा, “बचाओ! कोई है जो मुझे छुड़ाए?” उसकी गर्जना से पेड़ काँपने लगे, पर कोई जानवर पास आने की हिम्मत नहीं कर सका।
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आवाज़ सुनकर वही छोटा चूहा भागता हुआ वहाँ पहुँचा। उसने देखा कि शेर बुरी तरह जाल में उलझा हुआ है।
चूहे ने तुरंत कहा, “महाराज, चिंता मत कीजिए, मैं हूँ ना! आज मैं अपना वादा निभाऊँगा।”
वह अपने तेज़ दाँतों से जाल की रस्सियाँ काटने लगा — चू-चू, चू-चू की आवाज़ गूँजने लगी। कुछ ही देर में जाल कट गया, और शेर आज़ाद हो गया।
शेर ने गहरी साँस ली, फिर मुस्कराते हुए कहा, “छोटे दोस्त, आज तुमने सच्चे अर्थों में साबित कर दिया कि कोई भी छोटा नहीं होता। मदद करने के लिए ताकत नहीं, बस नीयत चाहिए होती है।”
चूहा गर्व से मुस्कुराया और बोला, “महाराज, जिस दिन आपने मुझे बख्शा था, उसी दिन किस्मत ने तय कर दिया था कि एक दिन मैं आपका ऋण चुकाऊँगा।”
दोनों ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुराए। उस दिन से शेर और चूहा घनिष्ठ मित्र बन गए। अब शेर हर छोटे जीव का सम्मान करने लगा, और जंगल में सच्ची मित्रता की मिसाल कायम हो गई।
शिक्षा:
कभी किसी को छोटा या कमजोर मत समझो। सच्ची मदद के लिए ताकत नहीं, बल्कि सच्चे दिल की ज़रूरत होती है।




