लघु कथाएँ | Short Inspirational Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव के किनारे एक भूखा कुत्ता भटकता फिर रहा था। पेट में भूख से गुड़गुड़ाहट हो रही थी, आँखों में बेचैनी थी, और वह हर गली-मोहल्ले में सूँघता फिर रहा था कि शायद कहीं कुछ खाने को मिल जाए। वह कूड़े के ढेर के पास गया, वहाँ सूंघा — पर कुछ नहीं मिला। किसी के दरवाजे के पास गया, पर सब जगह सन्नाटा था। आखिर वह थककर कसाई की दुकान के पास जा पहुँचा।
कसाई की दुकान के बाहर उसे एक रसदार, बड़ी और ताजी हड्डी दिखाई दी। उसकी आँखें चमक उठीं, और मुँह से लार टपकने लगी। उसने चारों ओर देखा — कोई नहीं था। झट से उसने वह हड्डी मुँह में दबाई और अपनी पूँछ हिलाते हुए भाग चला। उसके मन में खुशी उमड़ रही थी, “अब तो मज़े से पेट भर जाऊँगा! कोई मुझे ढूँढ भी नहीं पाएगा।”
वह दौड़ता-दौड़ता गाँव के बाहर पहुँचा और एक नदी के किनारे बने पुल पर चढ़ गया। पानी शांत था, आसमान का नीला रंग उसमें झलक रहा था। कुत्ते ने सोचा, “इस पार तो लोग हैं, पर उस पार जंगल है। वहाँ जाकर आराम से बैठूँगा और कोई परेशान भी नहीं करेगा।”
Short Inspirational Story in Hindi
जैसे ही वह पुल के बीच पहुँचा, उसने नीचे झाँका — और वहीँ ठिठक गया।
उसे लगा जैसे नीचे पानी में एक और कुत्ता खड़ा है — ठीक उसकी तरह! और आश्चर्य की बात तो यह थी कि उस कुत्ते के मुँह में भी एक हड्डी थी!
वह अपनी परछाई नहीं पहचान पाया। उसकी आँखें लालच से चमक उठीं। उसने सोचा, “वाह! नीचे वाले कुत्ते के पास तो मेरी हड्डी से भी बड़ी हड्डी है! अगर मैं उसकी भी ले लूँ, तो दो हड्डियाँ हो जाएँगी। फिर तो कई दिन पेट भरकर खा सकूँगा।”
यह सोचते ही उसके मन में लालच ने घर कर लिया। उसने ज़ोर से गुर्राना शुरू किया — “भौंऽ! भौंऽऽऽ!”
लेकिन जैसे ही उसने मुँह खोला, वह हड्डी जो उसके मुँह में थी, छपाक! की आवाज़ के साथ नदी में गिर पड़ी।
Short Inspirational Story in Hindi
वह घबरा गया। पानी में झुककर उसने देखा, पर अब वहाँ कोई और कुत्ता नहीं था — सिर्फ़ बहता हुआ पानी और उसकी डूबी हुई हड्डी।
वह नदी के किनारे बैठ गया, मुँह लटकाए और आँखों में पछतावा भरा हुआ।
धीरे से बड़बड़ाया, “काश, मैं लालच न करता… मेरी अपनी हड्डी तो थी ही, पर दूसरों की चाह में सब खो दिया।”
उस दिन के बाद उसने एक बात अपने दिल में बैठा ली —
“लालच में कभी सुख नहीं, केवल पछतावा मिलता है।”
शिक्षा:
लालच का परिणाम हमेशा नुकसान होता है। जो हमारे पास है, उसी में संतोष रखना सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।




