वफादार कुत्ते की कहानी | Motivational Story in Hindi
एक घने जंगल के किनारे एक शिकारी रहता था। वह पेशे से शिकार करता था — निपुण, तेज और चतुर। उसके पास कई शिकारी कुत्ते थे, जो उसके सबसे बड़े सहायक थे। ये कुत्ते अच्छी तरह प्रशिक्षित थे, तेज़ दौड़ते थे और जंगली जानवरों की गंध सूंघने में माहिर थे। शिकारी उनका मालिक भर नहीं था, बल्कि उनका सेनापति था — और ये कुत्ते उसकी सेना।
उन सभी कुत्तों में एक बूढ़ा कुत्ता था — शेरू।
शेरू बाकी सब से अलग था। सालों पहले जब वह जवान था, तब उसकी फुर्ती, ताकत और वफादारी की चर्चा पूरे इलाके में होती थी। ना जाने कितने हिरण, खरगोश, लोमड़ियाँ और जंगली जानवर उसने अपने मालिक के लिए पकड़े थे। शिकारी भी शेरू पर बहुत गर्व करता था। वह हमेशा कहा करता, “अगर जंगल में कोई कुत्ता सच में राजा कहलाने लायक है, तो वो मेरा शेरू है!”
शेरू भी अपने मालिक पर जान छिड़कता था। चाहे जंगल में कितनी भी मुश्किल परिस्थिति हो, वह कभी पीछे नहीं हटता था। पर वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता।
साल बीतते गए, और उम्र ने शेरू की रफ़्तार पर असर डालना शुरू कर दिया। उसके जो दाँत कभी लोहे जैसे मजबूत थे, अब बूढ़ेपन से कमजोर हो गए थे। जो आंखें कभी रात में भी दूर का शिकार देख लेती थीं, अब धुंधली होने लगी थीं। उसकी चाल में वह पुरानी रफ्तार नहीं रही थी, पर उसके दिल में अब भी वही वफादारी धड़कती थी।
वफादार कुत्ते की कहानी
एक दिन सुबह-सुबह शिकारी अपने सारे कुत्तों को लेकर शिकार पर निकला। मौसम साफ़ था, हवा में जंगल की मिट्टी की महक थी। कुछ ही देर में झाड़ियों के बीच से एक छोटा-सा हिरण का बच्चा निकल कर भागा।
“पकड़ो!” शिकारी ने चिल्लाया, और सारे कुत्ते दौड़ पड़े।
सबसे आगे जवान कुत्ते थे — तेज़, चुस्त, ताक़तवर।
शेरू भी पीछे नहीं रहा। बूढ़े शरीर के बावजूद उसने पूरी ताक़त लगा दी। उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, लेकिन उसकी नज़र हिरण पर जमी हुई थी। जंगल की ज़मीन ऊबड़-खाबड़ थी, रास्ता कठिन था, पर शेरू का इरादा मजबूत था।
आख़िरकार, जब बाकी कुत्ते पीछे रह गए, शेरू ने छलांग लगाई और हिरण की टांग पकड़ ली।
लेकिन अफसोस — उसके दांत अब पहले जैसे मजबूत नहीं थे।
हिरण ने ज़ोर का झटका दिया और उसके पकड़ से छूटकर भाग गया।
शेरू वहीं गिर पड़ा — हांफता हुआ, थका हुआ, मगर अपनी पूरी कोशिश कर चुका था।
शिकारी यह दृश्य देखकर गुस्से से आग-बबूला हो गया।
“नालायक! इतनी देर से पीछा कर रहा था और फिर भी पकड़ नहीं पाया?” वह गरजा।
उसने अपना हंटर उठाया और गुस्से में शेरू पर हाथ उठाने ही वाला था कि तभी शेरू ने ऊपर देखा।
वफादार कुत्ते की कहानी
उसकी आंखों में थकान थी, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा वफादारी और दर्द था।
वो कुछ नहीं बोला, लेकिन उसकी आंखें जैसे कह रही थीं —
“मालिक… मैंने कभी तेरा आदेश नहीं टाला। जब मैं जवान था, मैंने तेरे लिए अपनी जान तक खतरे में डाली। आज अगर मेरी ताकत चूक गई, तो क्या मैं तेरी नज़रों में गुनहगार बन गया? मैं आज भी तेरा वही वफादार साथी हूं, बस शरीर अब पहले जैसा नहीं रहा। क्या अब मैं सज़ा के लायक हूं?”
शिकारी का हाथ वहीं रुक गया। उसका गुस्सा धुएं की तरह उड़ गया।
उसने शेरू की आंखों में झांका — और उसे अपने ही बीते दिनों की याद आ गई।
वो दिन जब शेरू ने उसके आदेश पर खतरनाक जंगलों में दौड़ लगाई थी, जब उसने घायल होकर भी शिकार पकड़ा था।
शिकारी की आंखें भर आईं। उसने हंटर नीचे गिरा दिया और झुककर शेरू को अपने सीने से लगा लिया।
“माफ कर, शेरू,” वह धीमे स्वर में बोला। “आज मैं भूल गया कि वफादारी उम्र नहीं देखती। तू बूढ़ा ज़रूर हो गया है, पर मेरे लिए तू आज भी वही शेरदिल साथी है।”
शेरू ने थकी सांसों के साथ अपनी पूंछ हिलाई, जैसे कह रहा हो — “मालिक, अब तू समझ गया।”
शिकारी उसे उठाकर घर ले गया, और उस दिन से उसने तय किया कि शेरू अब शिकार पर नहीं जाएगा।
अब वह उसका साथी नहीं, उसका परिवार था।
शिक्षा:
वफादारी और प्रेम उम्र या ताकत से नहीं, दिल से मापा जाता है। हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि जिन्होंने हमारे अच्छे दिनों में साथ दिया, उन्हें बुढ़ापे या कमजोरी में तिरस्कार नहीं, सम्मान मिलना चाहिए।




