शेर और भेड़िया की चालाकी | Motivational Story in Hindi
एक घने, रहस्यमयी जंगल में एक शेर और एक भेड़िया रहते थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी — ऐसी दोस्ती, जिसमें शेर की ताकत और भेड़िए की चालाकी एक-दूसरे को पूरा करती थी। शेर जंगल का राजा था, और भेड़िया उसका सलाहकार, मंत्री और कभी-कभी चतुर साथी। दोनों अक्सर मिलकर शिकार पर निकलते, और साथ में खाते। जंगल के बाकी जानवर उनसे डरते भी थे और उनका सम्मान भी करते थे।
एक दिन सूरज सिर पर था, हवा में गर्मी का असर और पत्तों के नीचे चहकते झींगुरों की आवाज़ पूरे जंगल में गूंज रही थी। शेर और भेड़िया तीन दिन से शिकार नहीं कर पाए थे। भूख के कारण दोनों की चाल सुस्त पड़ गई थी।
शेर ने भारी आवाज़ में कहा, “भेड़िए, अब तो हालत खराब हो गई है। अगर आज कुछ न मिला, तो भूख से मेरी दहाड़ भी निकलनी बंद हो जाएगी।”
भेड़िया मुस्कुराया, पर उसके पेट में भी चूहे दौड़ रहे थे। उसने कहा, “महाराज, चिंता मत कीजिए। मैं आपको आज कुछ खास खिलाऊँगा — ऐसा शिकार, जिसे खाकर आपकी ताकत लौट आएगी।”
शेर ने उसकी बात पर भरोसा किया और बोला, “चलो, देखते हैं तुम्हारी चालाकी कितनी काम की है।”
दोनों जंगल से बाहर की दिशा में निकल पड़े। चलते-चलते वे एक पहाड़ी के नीचे पहुँचे। हवा में हल्की ठंडक थी, और दूर से कुछ मिमियाने की आवाज़ आई — “मिमि… मिमि…”
भेड़िया चौकन्ना होकर रुका, कान खड़े किए, और बोला, “महाराज! ये आवाज़ सुनी आपने? ये तो भेड़ों की है! जरूर आस-पास कोई भेड़बाड़ा होगा। आज तो हमारी किस्मत चमक गई।”
शेर और भेड़िया की चालाकी
शेर की आँखें चमक उठीं। उसने जीभ फेरते हुए कहा, “हम्म… भेड़ें! रसदार और मुलायम मांस… बस अब जल्दी कर। बहुत भूख लगी है, पेट की आग मुझे बेचैन कर रही है।”
भेड़िया बोला, “आप यहीं पेड़ की छाँव में आराम कीजिए, मैं जाकर देखता हूँ। अगर मौका मिला, तो एक बढ़िया भेड़ पकड़ लाता हूँ।”
शेर ने आलसी अंदाज़ में सिर हिलाया, “ठीक है, पर ज्यादा देर मत लगाना।”
भेड़िया चुपचाप झाड़ियों में से होता हुआ आवाज़ की दिशा में बढ़ा। कुछ ही दूरी पर उसने देखा — एक बड़ा, मजबूत लकड़ी का बाड़ा। अंदर दर्जनों भेड़ें मिमिया रही थीं। लेकिन यह देख उसका चेहरा उतर गया।
भेड़बाड़े के चारों ओर ऊँची लकड़ी की दीवारें थीं, दरवाज़े पर मोटे ताले जड़े हुए थे, और सबसे डरावनी बात — बाहर चार-पाँच बड़े शिकारी कुत्ते गश्त लगा रहे थे। उनकी आँखें लाल थीं और दाँत बाहर निकले हुए थे। वे किसी भी हरकत पर भौंक उठते।
भेड़िये ने निगलते हुए सोचा, “अरे बाप रे! अगर मैं अंदर गया, तो ये कुत्ते मुझे चीर डालेंगे। यहाँ शिकार करना मतलब मौत को न्योता देना।”
वह कुछ देर छिपकर सोचने लगा — “अगर खाली हाथ लौटा, तो शेर मुझे भूख में ही खा जाएगा। और अगर अंदर घुसा, तो ये कुत्ते नोच डालेंगे। अब क्या करूँ?”
कुछ पल के विचार के बाद उसकी आँखों में चमक आई — “हाँ, क्यों न एक कहानी ही गढ़ दूँ?”
वह मुस्कुराया, झाड़ियों से निकलकर तेज़ी से वापस लौटा और शेर के पास पहुँचा।
शेर उठकर बोला, “कहाँ रह गए थे? क्या शिकार मिला?”
भेड़िया बड़ी शांति से बोला, “महाराज, मैंने भेड़ें तो देखीं, पर अफसोस… वे सब बहुत दुबली-पतली हैं। उनके शरीर में जरा भी मांस नहीं है। लगता है महीनों से घास तक नहीं खाईं। उनका शिकार करना आपके जैसे राजा के लिए अपमान होगा।”
शेर ने थोड़ा चौंककर कहा, “क्या सच में? आवाज़ तो ऐसी आ रही थी जैसे पूरा झुंड वहाँ चर रहा हो।”
शेर और भेड़िया की चालाकी
भेड़िया बात को बढ़ाते हुए बोला, “हां महाराज, आवाज़ें तो आईं, पर वे सब बस कमजोर जानवर हैं। मैं तो सोचता हूँ, हमें कुछ और शिकार ढूंढना चाहिए — जैसे हिरण या जंगली सूअर। आखिर आप जंगल के राजा हैं, और राजा को कमजोर भोजन शोभा नहीं देता।”
शेर ने थोड़ा गौर किया, फिर बोला, “हम्म… बात तो ठीक है। मुझे भी छोटी चीज़ों से पेट नहीं भरता। चलो, किसी और दिशा में चलते हैं।”
भेड़िया राहत की साँस लेते हुए मुस्कुराया, “बहुत ठीक कहा, महाराज! चलिए, उधर नदी के पास अक्सर हिरणों का झुंड आता है।”
दोनों वहाँ से आगे बढ़ गए। शेर को लगा कि उसने सही निर्णय लिया है, जबकि भेड़िया मन-ही-मन खुश था कि उसकी जान बच गई और शेर को कुछ शक भी नहीं हुआ।
रास्ते में शेर ने कहा, “भेड़िए, तुम वाकई बुद्धिमान हो। मैं ताकतवर हूँ, पर तुम्हारी चालाकी ही हमें सही दिशा दिखाती है।”
भेड़िया सिर झुकाकर बोला, “महाराज, आपकी कृपा है। मेरा काम बस आपकी सेवा करना है।”
लेकिन उसके दिल में एक बात थी — “कभी-कभी चालाकी ताकत से ज्यादा काम आती है।”
और वह दिन उसके जीवन की सबसे बड़ी जीतों में से एक बन गया — क्योंकि उसने बिना खून बहाए, बिना झगड़ा किए, अपनी जान और सम्मान दोनों बचा लिए।
शिक्षा:
बुद्धिमानी कभी-कभी ताकत से बड़ी होती है। संकट के समय समझदारी और सही निर्णय ही असली वीरता है। डर कर भागना कमजोरी नहीं, बल्कि जीवित रहने की बुद्धि है।




