लालची कुत्ते की कहानी | Hindi Motivational Story
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से कस्बे में एक चालाक लेकिन थोड़ा लालची कुत्ता रहता था। उसका दिन बस दो कामों में बीतता था — कुछ खाने की तलाश करना और मौका मिलते ही किसी दुकान से कुछ चुराकर भाग जाना। कस्बे के लोग उसे पहचानने लगे थे। बच्चे उसे देखकर हँसते और कहते, “देखो-देखो, वही चोर कुत्ता फिर आया!” लेकिन कुत्ता किसी की परवाह नहीं करता था। उसे तो बस पेट भरना था — चाहे चोरी से ही क्यों न हो।
एक दिन दोपहर के वक्त जब सूरज सिर पर था, वह गलियों में घूम रहा था। तभी उसे कसाई की दुकान से मांस की लुभावनी खुशबू आई। उसने देखा कि दुकान के बाहर मेज पर ताजे लाल मांस के बड़े-बड़े टुकड़े रखे हुए थे। कुत्ते के मुँह से पानी टपकने लगा।
वह धीरे-धीरे दुकान के पास पहुँचा और चारों तरफ देखा — कोई ध्यान नहीं दे रहा था। उसने सोचा, “यह तो सही मौका है। अगर अभी झपट्टा मारूँ, तो मज़े से भाग सकता हूँ।”
पलक झपकते ही उसने एक बड़ा सा मांस का टुकड़ा मुँह में दबाया और दौड़ पड़ा।
“अरे! चोर!” कसाई चिल्लाया, पर तब तक कुत्ता काफी दूर निकल चुका था।
लालची कुत्ते की कहानी
अब कुत्ते के मन में बस एक ही बात घूम रही थी — “कोई देख न ले, जल्दी से किसी सुरक्षित जगह पहुँच जाऊँ और शांति से मांस खा लूँ।”
वह भागता-भागता कस्बे से बाहर निकला और एक लकड़ी के पुल पर पहुँचा। पुल के नीचे गहरा पानी बह रहा था। वह धीरे-धीरे सावधानी से पुल पार करने लगा ताकि मांस उसके मुँह से गिर न जाए।
अचानक उसने नीचे पानी में झाँका। और तभी उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं!
नीचे पानी में उसे एक और कुत्ता दिखा — और हैरानी की बात यह थी कि उस कुत्ते के मुँह में भी मांस का टुकड़ा था!
कुत्ता सोच में पड़ गया, “अरे वाह! ये तो मेरे जैसा ही दिखता है, लेकिन इसने भी मांस पकड़ा है। अगर मैं इसका टुकड़ा भी छीन लूँ, तो मेरे पास दो-दो टुकड़े होंगे! आज तो मज़ा आ जाएगा!”
लालची कुत्ते की कहानी
वह अपनी लालच में मुस्कराया और गुर्राने लगा — “घुर्र्र… छोड़ दे वो मांस!”
उसने फिर गुर्राकर झपट्टा मारा — और सीधा पानी में गिर पड़ा!
जैसे ही उसका मुँह पानी से टकराया, मांस का टुकड़ा उसके मुँह से छूटकर नदी में जा गिरा। और नीचे कोई दूसरा कुत्ता तो था ही नहीं — वह तो उसका खुद का प्रतिबिंब था!
अब न मांस रहा, न मज़ा। कुत्ता पानी में छपछपाता हुआ किनारे आया, पूरा भीग गया, और खाली पेट बैठ गया।
उसकी आँखों में पछतावे की झलक थी। उसने आकाश की ओर देखा और बुदबुदाया, “अगर मैंने लालच न किया होता, तो अब पेट भरकर खा रहा होता।”
उस दिन के बाद, उस कुत्ते ने कभी किसी और का हिस्सा छीनने की कोशिश नहीं की। उसे समझ आ गया कि लालच हमेशा नुकसान देता है।
शिक्षा:
लालच हमेशा हानि का कारण बनता है। जो हमारे पास है, उसी में संतोष करना ही सच्ची बुद्धिमानी है।




