🐦‍⬛ चतुर कौआ और पानी का घड़ा | Crow and the Water Pot 🏺

प्रेरणादायक कहानियाँ | Motivational Stories in Hindi | प्यासा कौआ कहानी

गर्मियों के दिन थे — आसमान से जैसे आग बरस रही थी। सूरज सिर पर धधकता अंगारा बना हुआ था। धरती तपकर लाल हो चुकी थी, और हवा में लपटें सी उठ रही थीं। पेड़-पौधे मुरझा गए थे, नदी-तालाब सूख चुके थे, और सारे जानवर पेड़ों की छाँव में छिपे थे।

उसी झुलसती दोपहर में, एक छोटा-सा काला कौआ आसमान में उड़ता जा रहा था।
उसके पंख थक चुके थे, और उसकी चोंच सूखकर खुरदुरी हो गई थी।
वह बार-बार अपने गले में खराश महसूस कर रहा था — प्यास से उसकी हालत खराब हो रही थी।

वह खुद से बड़बड़ाया,
“ओह! अगर अब कहीं पानी न मिला, तो मैं तो यहीं गिर जाऊँगा।”

वह इधर-उधर मंडराने लगा — कभी पेड़ों के बीच झाँकता, कभी सूखे तालाबों के किनारे उतरता, कभी किसी पुराने बर्तन को देखता।
लेकिन हर जगह निराशा ही मिली — सब जगह सिर्फ़ धूल, सूखी मिट्टी और गर्म हवा।

थोड़ी देर बाद वह थककर एक बड़ी चट्टान पर आ बैठा।
साँसें फूल रही थीं, आँखों में थकान थी, लेकिन वह हार मानने वाला नहीं था।
उसने आसमान की तरफ देखा और बुदबुदाया,
“भगवान, कहीं तो पानी होगा… मैं अभी नहीं रुकूँगा।”

प्यासा कौआ कहानी

वह फिर से उड़ा।
थोड़ी दूर जाने पर उसे धूप में कुछ चमकती हुई चीज़ दिखाई दी।
कौए की आँखों में चमक आ गई।
“अरे! वो क्या है?”
वह तुरंत उस दिशा में उड़ चला।

पास जाकर देखा — वहाँ एक पुराना घड़ा रखा था, किसी के घर के बाहर।
कौए का दिल उछल पड़ा।
वह चहकते हुए बोला,
“वाह! शायद इसमें पानी हो!”

वह झट से घड़े के किनारे बैठा और अंदर झाँका —
हाँ! घड़े में पानी था… लेकिन बहुत नीचे।
इतना नीचे कि उसकी चोंच वहाँ तक पहुँच ही नहीं पा रही थी।

प्यासा कौआ कहानी

कौए ने कई बार कोशिश की — कभी सिर झुकाया, कभी घड़े को ठोका, कभी उछलकर देखने की कोशिश की —
पर सब बेकार।

वह थोड़ा निराश हुआ, मगर तुरंत खुद को संभाल लिया।
“नहीं, ऐसे हार नहीं मान सकता,” उसने खुद से कहा।
“समाधान तो ज़रूर होगा।”

वह घड़े के चारों ओर घूमने लगा, हर कोण से उसे देखने लगा।
तभी उसकी नज़र पास पड़ी कुछ छोटे-छोटे कंकड़ों पर।
कौए के दिमाग़ में बिजली सी कौंधी।
“अरे! अगर मैं ये कंकड़ एक-एक करके घड़े में डाल दूँ, तो पानी ऊपर आ जाएगा!”

बस, फिर क्या था!
उसने बिना समय गँवाए एक कंकड़ उठाया और घड़े में डाल दिया — टक!
फिर दूसरा… तीसरा… चौथा…
धीरे-धीरे पानी ऊपर उठने लगा।
हर बार जब घड़े में कंकड़ गिरता, तो कौए का उत्साह बढ़ जाता।
वह बोल उठा,
“हां! यही उपाय है! बस थोड़ी और मेहनत!”

प्यासा कौआ कहानी

वह और तेजी से कंकड़ डालने लगा।
कभी एक पंजे से, कभी चोंच से।
कुछ देर में पानी सचमुच ऊपर तक आ गया।
अब उसकी चोंच आसानी से उस तक पहुँच सकती थी।

कौए ने झुककर ठंडा, मीठा पानी पिया।
उसके सूखे गले को जैसे जीवन मिल गया।
उसकी आँखों में चमक लौट आई, चेहरे पर संतोष झलकने लगा।

वह मुस्कुराया और बोला,
“समझदारी और मेहनत से कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है।”

फिर अपने पंख फैलाकर वह खुशी-खुशी आसमान की ऊँचाइयों में उड़ गया —
हल्का, आज़ाद और संतुष्ट।

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