भेड़िया आया कहानी | Motivational Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव के किनारे, घने जंगलों की तलहटी में एक खूबसूरत हरा-भरा मैदान था। गांव के लोग अपने मवेशियों और भेड़ों को वहीं चरने भेजा करते थे। उसी गांव में एक चंचल, नटखट लेकिन समझदार बालक रहता था — उसका नाम था अर्जुन।
अर्जुन को गांव वालों ने यह जिम्मेदारी दी थी कि वह रोज़ भेड़ों को पहाड़ी के उस पार चराने ले जाए और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखे। अर्जुन इस जिम्मेदारी को बहुत गर्व से निभाता था। हर सुबह सूरज निकलते ही वह अपनी लंबी लकड़ी की लाठी उठाता, सीटी बजाते हुए भेड़ों के झुंड को लेकर पहाड़ी की ओर निकल पड़ता। रास्ते में उसकी बांसुरी की मधुर धुन जंगल की हवा में घुल जाती।
पहाड़ी पर घास का हरा समंदर था, ठंडी हवा थी, और चारों तरफ सन्नाटा फैला था। भेड़ें खुशी-खुशी चरतीं और अर्जुन पेड़ की छांव में बैठकर आसमान को निहारता या बांसुरी बजाता।
लेकिन धीरे-धीरे यह शांति उसे उबाऊ लगने लगी। दिन-प्रतिदिन वही काम, वही जगह, वही बकरियाँ — अर्जुन को सब कुछ एक जैसा लगने लगा। वह सोचने लगा —
“अरे यार, हर दिन यही एकरस जीवन! न कोई बात करने वाला, न कोई हँसी-मज़ाक! कुछ रोमांच होना चाहिए!”
और बस, यहीं से उसकी शरारती बुद्धि जाग उठी।
एक दिन, उसने सोचा — “क्यों न थोड़ा मज़ाक किया जाए?”
वह अचानक पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गया और ज़ोर से चिल्लाने लगा —
“भेड़िया आया! भेड़िया आया! जल्दी आओ, भेड़ें खा जाएगा!”
भेड़िया आया कहानी
गांव में खेतों में काम कर रहे लोग उसकी चीख सुनकर घबरा गए। किसी ने हल फेंका, किसी ने डंडा उठाया, कोई दरांती लेकर दौड़ा। सभी बिना देर किए पहाड़ी की ओर भाग पड़े।
पर जब वे वहां पहुंचे, तो सामने का नज़ारा देखकर सब दंग रह गए —
भेड़ें शांति से घास चर रही थीं, और अर्जुन ज़ोर-ज़ोर से हँस रहा था!
एक बुजुर्ग किसान ने गुस्से में कहा, “क्या यही तुम्हारा भेड़िया है?”
अर्जुन हँसते हुए बोला, “अरे नहीं चाचा, मैं तो बस मज़ाक कर रहा था! आपको दौड़ते देख बड़ा मज़ा आया!”
गांव वाले नाराज़ होकर लौट गए। जाते-जाते एक बूढ़ी औरत ने कहा,
“बेटा, ऐसे झूठे मज़ाक से कभी किसी का भला नहीं होता। अगर कल सच में भेड़िया आ गया, तो कौन आएगा तुम्हारी मदद करने?”
अर्जुन ने हँसते हुए बात टाल दी। लेकिन उसने उस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।
कुछ दिन बाद, एक सुबह जब आसमान में बादल छाए थे और हवा कुछ अजीब सी थी, अर्जुन भेड़ों को लेकर फिर पहाड़ी की ओर गया। सब कुछ शांत था। वह पेड़ की छांव में बैठा बांसुरी बजाने ही वाला था कि अचानक झाड़ियों के पीछे से भयानक गुर्राहट सुनाई दी।
वह ठिठक गया। झाड़ियों के पीछे से एक विशालकाय भेड़िया बाहर आया — उसकी लाल आँखें चमक रही थीं, दांत बाहर निकले हुए थे, और उसके कदम धीमे लेकिन डरावने थे।
भेड़ें मिमियाने लगीं, डर से एक-दूसरे से सट गईं। अर्जुन का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसने पूरी ताकत से चिल्लाया —
“भेड़िया आया! भेड़िया आया! कोई है क्या? बचाओ!”
भेड़िया आया कहानी
उसकी आवाज़ गांव तक पहुंची, लेकिन इस बार किसी ने ध्यान नहीं दिया।
“अब तो रोज़ यही नाटक करता है,” एक आदमी बोला।
“झूठा लड़का, फिर मज़ाक कर रहा होगा,” दूसरे ने कहा।
कोई नहीं आया।
भेड़िये ने अर्जुन की आंखों में डर देखा और समझ गया कि इस बार कोई उसकी मदद करने नहीं आएगा। उसने झपट्टा मारा, एक भेड़ की गर्दन दबोची, और झुंड से अलग करके जंगल की ओर भाग गया।
अर्जुन ज़मीन पर बैठा रह गया, आँसू उसकी आँखों से बह निकले। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ।
शाम को जब वह गांव लौटा, तो फूट-फूटकर रो पड़ा —
“माफ कर दो! आज सच में भेड़िया आया था। मैंने मज़ाक-मज़ाक में सबका भरोसा तोड़ दिया। मेरी वजह से एक भेड़ मर गई।”
गांव वाले भी दुखी हुए, पर उन्होंने कहा,
“बेटा, जब विश्वास एक बार टूट जाता है, तो कोई भरोसा नहीं करता। याद रखना, झूठ का अंत हमेशा पछतावे में होता है।”
अर्जुन ने हाथ जोड़कर सब से माफी मांगी और उस दिन उसने सच्चाई और जिम्मेदारी का असली अर्थ समझा। उसने निश्चय किया कि अब कभी झूठ नहीं बोलेगा और अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाएगा।
शिक्षा:
झूठ बोलने वाला व्यक्ति जब सच भी बोलता है, तब भी कोई उस पर विश्वास नहीं करता। विश्वास की कीमत बहुत बड़ी होती है — उसे खोना आसान है, लेकिन दोबारा पाना लगभग असंभव।




