🦢 सुनहरा हंस | Golden Goose 🥚

नैतिक कहानियाँ | Top Moral Stories in Hindi | Short Moral Stories in Hindi

बहुत समय पहले की बात है। एक दूर-दराज़ के राज्य में एक राजा और रानी रहते थे। उनका राज्य समृद्ध था, प्रजा सुखी थी और महल में किसी प्रकार की कमी नहीं थी। राजा न्यायप्रिय था और रानी भी दयालु स्वभाव की मानी जाती थी। केवल एक बात उनके दिल को दुखी करती थी—उनके कोई संतान नहीं थी। वे अकसर ईश्वर से प्रार्थना करते कि उन्हें एक प्यारा-सा बच्चा मिले, जिससे उनका जीवन पूर्ण हो सके।

इसी दुख के बीच एक दिन एक अद्भुत घटना घटी। महल के विशाल तालाब में अचानक एक चमचमाता सफ़ेद हंस आकर बैठा। उस हंस के पंख मोती जैसे चमक रहे थे और उसकी आँखों में एक अलग ही तेज़ था। राजा और रानी ने कभी ऐसा सुंदर पक्षी नहीं देखा था। अगले ही दिन जब सुबह का सूरज निकला, तो वह हंस तालाब से बाहर आया और महल के आँगन में एक सुनहरा अंडा रख दिया।

महल में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। रानी ने चमकते अंडे को हाथ में उठाया और राजा को दिखाते हुए बोली, “देखो महाराज! यह तो असली सोने का अंडा है!” राजा भी आश्चर्यचकित रह गया। उन्होंने दरबारियों को बुलाया और अंडे की जाँच करवाई। सबने पुष्टि की कि यह अंडा शुद्ध सोने का है।

उस दिन से वह हंस रोज़ एक सुनहरा अंडा देने लगा। धीरे-धीरे राजा और रानी और भी धनी हो गए। उनके ख़ज़ाने में सोने-चाँदी का ढेर लग गया। प्रजा भी सुखी रही क्योंकि राजा ने उस संपत्ति का उपयोग भलाई के कामों में किया।

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लेकिन समय बीतने के साथ रानी के मन में एक नया विचार जन्म लेने लगा। वह सोचने लगी, “अगर यह हंस रोज़ एक अंडा देता है, तो इसके पेट में और भी अंडे होंगे। अगर मैं सारे अंडे एक साथ पा लूँ, तो मेरे पास अपार धन होगा और फिर मुझे कभी इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।”

धीरे-धीरे यह विचार लालच में बदल गया। रानी रात-दिन इसी के बारे में सोचती रहती। वह अधीर हो गई थी।

एक दिन, जब हंस ने अपना रोज़ का अंडा देने के लिए आँगन में प्रवेश किया, रानी ने उसे पकड़ लिया। हंस घबराकर बोला,
“महारानी! आप यह क्या कर रही हैं? मैं तो रोज़ एक अंडा देता हूँ, धैर्य रखिए। यही नियम है।”

लेकिन रानी के कानों पर जूँ तक न रेंगी। उसने कठोर स्वर में कहा,
“मुझे अब रोज़ का इंतज़ार नहीं करना। मुझे अभी के अभी सारे अंडे चाहिए!”

हंस ने कई बार समझाने की कोशिश की कि ऐसा संभव नहीं है। लेकिन लालच में अंधी रानी ने उसकी एक न सुनी। उसने ज़बरदस्ती हंस का पेट चीरा और अंडे निकालने का प्रयास किया।

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लेकिन जैसे ही उसने यह किया, जादुई हंस वहीं प्राणहीन होकर गिर पड़ा। और उसके साथ ही उनकी किस्मत भी मानो तालाब में डूब गई। रानी ने जब उसके पेट को देखा, तो वहाँ से कोई अंडा नहीं निकला। सारी आशाएँ मिट गईं।

राजा ने यह दृश्य देखा तो उसके आँसू निकल आए। उसने दुःखी होकर कहा,
“हे रानी, तुम्हारे लालच ने हमें सब कुछ छीन लिया। जो धन हमें धीरे-धीरे मिलता था, वही सच्चा सौभाग्य था। लेकिन अधीरता और लालच ने हमें कंगाल बना दिया।”

रानी पछतावे से रोने लगी, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। हंस मर चुका था और उसके साथ ही सुनहरे अंडों का सिलसिला भी ख़त्म हो गया।

उस दिन के बाद राजा और रानी को गहराई से यह शिक्षा मिली कि लालच मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।

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