🕊️ चालाक लोमड़ी और चतुर सारस | Clever Fox & the Wise Stork 🦊

नैतिक कहानियाँ | Top Moral Stories in Hindi | लोमड़ी सारस की दोस्ती

बहुत, बहुत समय पहले की बात है।
एक घना, विशाल और रहस्यमय जंगल था —
जहाँ सूरज की किरणें भी घने पेड़ों की डालियों से छनकर बड़ी मुश्किल से ज़मीन पर पहुँच पाती थीं।
चारों ओर हरियाली, झींगुरों की आवाज़, पक्षियों की चहचहाहट और हवा में गीली मिट्टी की खुशबू।

जंगल में हर तरह के जीव-जंतु रहते थे — हाथी, हिरण, बंदर, खरगोश, भालू और बेशक एक लोमड़ी भी।
वह लोमड़ी दिखने में भले ही साधारण थी, लेकिन दिमाग के मामले में सबको मात देती थी।
वह मीठी ज़ुबान वाली, चालाक और बहुत स्वार्थी थी।
उसका एक ही सिद्धांत था — “मिठास से वश में करो, और मौका पाकर फायदा उठाओ।”

उसी जंगल में एक सारस भी रहता था — ऊँचा, सुंदर और दिल से बहुत नेक।
वह हर किसी की मदद करता, किसी से बुरा नहीं सोचता।
उसके स्वभाव में इतनी सादगी थी कि लोग कहते,
“यह सारस नहीं, भोलापन का सागर है।”

एक दिन लोमड़ी ने उसे तालाब किनारे मछलियाँ पकड़ते देखा और सोचा —
“अरे वाह! यह तो भोला-भाला लगता है।
अगर इसे अपना दोस्त बना लूँ, तो कभी भूखों नहीं रहना पड़ेगा।
इससे तो रोज़ ताज़ा मछली मिल जाएगी!”

लोमड़ी सारस की दोस्ती

बस फिर क्या था — लोमड़ी ने चाल चली।

वह धीमी चाल से सारस के पास पहुँची और बोली,
“अरे सारस भाई! तुम्हारी चोंच तो कितनी सुंदर है, और ये पंख… वाह! जैसे बर्फ़ से बने हों!”

सारस ने विनम्रता से मुस्कराते हुए कहा,
“धन्यवाद मित्र, आप बहुत दयालु हैं।”

लोमड़ी बोली,
“मुझे तो लगता है हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन सकते हैं। क्या कहते हो?”

भोला सारस खुश होकर बोला,
“बिलकुल, सच्ची दोस्ती से बढ़कर कुछ नहीं होता।”

और इस तरह लोमड़ी की मीठी बातों में आकर, सारस उसका मित्र बन गया।

कुछ दिन बाद, लोमड़ी अपनी चाल को अमल में लाने का समय आ गया।
उसने सारस से कहा,
“मित्र सारस! कल तुम मेरे घर भोजन पर ज़रूर आना। मैंने तुम्हारे लिए बहुत स्वादिष्ट सूप बनाया है।”

सारस बहुत खुश हुआ।
“वाह! क्या बात है मित्र, मैं ज़रूर आऊँगा!”

अगले दिन जब सारस लोमड़ी के घर पहुँचा, तो लोमड़ी ने पूरे नाटक के साथ उसका स्वागत किया —
“आइए-आइए, मेरे प्यारे मित्र! आपका स्वागत है!”

लोमड़ी सारस की दोस्ती

उसने खाना परोसा — सुगंधित सूप, जो देखने में बेहद स्वादिष्ट लग रहा था।
लेकिन… लोमड़ी ने वह सूप परोसा था एक चौड़े और चपटे थाल में।

लोमड़ी ने अपनी जीभ से चटखारे लेते हुए कहा,
“वाह! कितना मज़ेदार है!”
और फिर वह मज़े से सूप चाटने लगी।

पर बेचारा सारस — उसकी लंबी, पतली चोंच उस थाल में बिलकुल बेकार थी।
वह चाहे जितना भी झुकता, सूप उसकी चोंच से फिसल जाता।
भूखा, प्यासा, बेबस वो बस लोमड़ी को देखता रह गया।

लोमड़ी ने हँसकर पूछा,
“क्यों मित्र, सूप का स्वाद कैसा लगा?”

सारस ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“बहुत स्वादिष्ट है मित्र… बस आज कुछ तबियत ठीक नहीं लग रही, इसलिए ज़्यादा खा नहीं पा रहा।”

इतना कहकर उसने शालीनता से विदा ली।
पर उसके मन में गहराई तक चोट पहुँच चुकी थी।

अगले दिन सुबह-सुबह लोमड़ी के घर दस्तक हुई।
“टप-टप-टप!”
दरवाज़ा खुला तो सामने सारस खड़ा था।

लोमड़ी सारस की दोस्ती

“मित्र लोमड़ी,” सारस बोला,
“कल का खाना वाकई बहुत स्वादिष्ट था!
आज मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे घर आओ।
मैंने तुम्हारे लिए कुछ विशेष बनाया है।”

लोमड़ी मन ही मन मुस्कुराई —
“लगता है ये भी मेरी तरह भोला है! चलो, आज भी मुफ्त का भोजन मिलेगा।”
और वह सारस के घर चल पड़ी।

सारस ने बड़े आदर से लोमड़ी का स्वागत किया।
“मित्र, बैठो… आज मैंने तुम्हारे लिए वही सूप बनाया है जो तुम्हें पसंद है।”

लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया।
लेकिन जैसे ही उसने देखा —
सूप एक लंबी, पतली सुराही में परोसा गया था,
जिसका मुँह इतना छोटा था कि लोमड़ी की थूथनी उसमें जा ही नहीं सकती थी!

सारस ने मुस्कुराते हुए अपनी लंबी चोंच उस सुराही में डाली और आराम से सूप पीने लगा।
बेचारी लोमड़ी ने जितना भी प्रयास किया, उसका एक घूंट भी अंदर नहीं गया।

लोमड़ी सारस की दोस्ती

सारस ने उसी अंदाज़ में पूछा,
“कहो मित्र लोमड़ी, सूप का स्वाद कैसा लगा?”

लोमड़ी ने शर्म से सिर झुका लिया।
उसके दिल में पछतावे की लहर दौड़ गई।
उसे याद आया कि उसने भी कल यही अपमान किया था।

वह धीरे से बोली,
“मित्र, आज मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ।
मैंने तुम्हारे साथ जो किया, वह गलत था। मुझे माफ़ कर दो।”

सारस ने मुस्कुराकर कहा,
“मित्रता में छल नहीं, सच्चाई और समानता होनी चाहिए।
अब चलो, पुरानी बातें भूल जाते हैं।”

दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया,
और उसके बाद लोमड़ी ने सीखा — चालाकी कभी भी सच्ची मित्रता की जगह नहीं ले सकती।

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