🦊 कौआ और लोमड़ी की कहानी | The Story of Crow & Fox 🐦‍⬛

नैतिक कहानियाँ | Top Moral Stories in Hindi | कौआ और लोमड़ी की कहानी

बहुत बहुत समय पहले की बात है।
एक घने, हरियाले जंगल में एक काला-कलूटा कौआ रहता था। उसका रंग थोड़ा फीका था, आवाज़ और भी फीकी — जब भी गाने की कोशिश करता, तो उसकी “काँव काँव” से पूरा जंगल गूंज उठता।

उसकी इस करकश आवाज़ से जानवरों का सब्र जवाब दे जाता।
हिरण कान झटककर भाग जाते, बंदर टहनी पर से टहनी पर छलाँग लगा देते, और छोटे-छोटे तोते अपनी चहचहाहट रोककर कहीं दूर उड़ जाते।

बेचारा कौआ अकेला रह जाता।
वह अक्सर दुखी होकर सोचता — “काश… मेरी आवाज़ भी कोयल जैसी मीठी होती। तब सब मेरे दोस्त होते, मेरी बातें सुनते… मुझे प्यार करते।”

फिर खुद को संभालता, “चलो, जो मिला है, उसी में खुश रहो।”

सूरज सिर पर था, धूप तप रही थी, और भूख ने कौए का बुरा हाल कर रखा था।
वह उड़ता-उड़ता जंगल से बाहर गाँव की तरफ़ निकल गया।
अचानक उसकी नज़र ज़मीन पर पड़ी एक गोल, गरम-गरम रोटी पर पड़ी “अरे वाह! आज तो भगवान खुद मुझ पर मेहरबान हैं!”

कौआ और लोमड़ी की कहानी

उसने झटपट रोटी उठाई, अपने पंजों में दबाई और पंख फड़फड़ाते हुए एक ऊँचे पेड़ पर जाकर बैठ गया।
उसके चेहरे पर संतोष की चमक थी।

उसी समय नीचे से एक भूखी लोमड़ी गुज़र रही थी।
सुबह से उसने कुछ नहीं खाया था। उसका पेट गुड़गुड़ा रहा था।
जब उसने ऊपर देखा — पेड़ पर कौआ बैठा था, और उसके पंजों में रोटी!

लोमड़ी की आँखें चमक उठीं, मुँह में पानी आ गया। “हूँ… रोटी चाहिए, पर वो ऊपर है। अगर मैं ज़ोर से बोलूँगी तो उड़ जाएगा। तो… दिमाग़ लगाना होगा।”

वह पेड़ के नीचे आकर, सबसे मीठी आवाज़ में बोली — “अरे वाह! क्या बात है कौआ महाराज! आज तो आप कुछ ज़्यादा ही सुंदर लग रहे हैं! आपकी चमकती काली पंखुड़ियाँ, आपकी चाल… एकदम राजसी!”

कौआ थोड़ा चौंका।
उसने नीचे झाँका — “ये लोमड़ी मुझे सुंदर कह रही है? क्या सच में मैं अच्छा दिखता हूँ?”

कौआ और लोमड़ी की कहानी

लोमड़ी ने अपनी बात जारी रखी — “महाराज, मैंने तो सुना है कि इस जंगल में एक पक्षी रहता है जिसकी आवाज़ इतनी मधुर है कि सब जानवर उसके गीत सुनकर झूम उठते हैं। अब तो मुझे पूरा यक़ीन है… वो आप ही होंगे!”

कौआ का मन फूला नहीं समाया।
उसे लगा — “वाह! ये लोमड़ी तो सच्ची समझदार है, जिसने मेरे अंदर की प्रतिभा पहचान ली!”

लोमड़ी ने बड़ी चालाकी से कहा — “पर महाराज, सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं होता। अगर आप ज़रा एक सुर छेड़ दें, तो मैं जान लूँ कि आप ही वो महान गायक हैं जिनकी चर्चा पूरे जंगल में है।”

कौआ अब बस इसी मौके की तलाश में था — “लोमड़ी ने मेरी तारीफ़ की है, अब मैं उसे दिखाता हूँ कि मेरी आवाज़ कितनी दमदार है!”

उसने सीना चौड़ा किया, चोंच ऊपर उठाई और ज़ोर से गाने लगा — “काँव… काँव… काँव…”

जंगल में उसकी आवाज़ गूंज उठी, पर उसी पल “ठप्” — रोटी उसके मुँह से गिरकर नीचे आ गिरी।

कौआ और लोमड़ी की कहानी

लोमड़ी तो पहले से ही तैयार थी।
उसने झपट्टा मारा, रोटी उठाई और चाव से खाने लगी।
फिर सिर उठाकर मुस्कुराई — “धन्यवाद, कौआ महाराज! आपने गाना भी सुनाया और मेरा पेट भी भर दिया।”

इतना कहकर वह आराम से पूँछ हिलाती हुई चली गई।

कौआ हक्का-बक्का रह गया।
उसकी आँखों में शर्म थी, मन में पछतावा। “हाय रे मेरी मूर्खता! एक झूठी तारीफ़ के चक्कर में मैं अपना खाना भी खो बैठा।”

वह धीरे-धीरे बोला — “अब समझ आया… सब जो मीठा बोलते हैं, वो सच्चे नहीं होते।”

उस दिन के बाद कौए ने तय किया — “अब कभी किसी की चापलूसी में नहीं आऊँगा।”

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