चतुराई की ताकत | Moral Stories in Hindi
एक बार की बात है।
घने जंगल में एक बहुत ताकतवर शेर रहता था — चौड़े कंधे, चमकती आँखें, और उसकी दहाड़ से पूरा जंगल काँप उठता था।
उसे सब “जंगल का राजा” कहते थे।
लेकिन उसी जंगल में एक चतुर और नटखट बंदर भी रहता था — पेड़ से पेड़ पर झूलता, कभी केले चुराता, कभी बच्चों को हँसाता।
उसकी बुद्धि इतनी तेज़ थी कि जंगल के सबसे चालाक जानवर भी उससे हार जाते।
एक दिन दोनों में बहस छिड़ गई —
मुद्दा था: “बल बड़ा या बुद्धि?”
एक दिन दोपहर की धूप में शेर एक बड़े पत्थर पर बैठा था।
पास ही बंदर पेड़ पर झूलता हुआ बोला,
“महाराज, आपकी ताकत का तो कोई जवाब नहीं, लेकिन बताइए — क्या सिर्फ ताकत से हर समस्या हल हो सकती है?”
शेर ने घमंड से सिर उठाया,
“क्यों नहीं! ताकत ही सबसे बड़ी चीज़ है। मैं जंगल का राजा हूँ क्योंकि मैं सबसे शक्तिशाली हूँ।”
बंदर मुस्कराया,
“पर महाराज, अगर किसी के पास बुद्धि हो तो वो ताकत के बिना भी जीत सकता है। देखिए, मैं छोटा हूँ, कमजोर हूँ, पर अपनी समझ से किसी भी मुश्किल का हल निकाल सकता हूँ।”
चतुराई की ताकत
शेर गरजा,
“चुप रहो, मूर्ख बंदर! मेरे सामने ताकत की बात करना बंद करो, नहीं तो एक ही झपट्टे में तुम्हें खत्म कर दूँ!”
बंदर शांति से बोला,
“महाराज, मैं आपकी ताकत को नकार नहीं रहा, पर एक दिन मैं साबित कर दूँगा कि बुद्धि ही सच्चा बल है।”
शेर ने दहाड़ते हुए कहा,
“ठीक है, जिस दिन तुम ये सिद्ध कर दोगे, मैं मान लूँगा कि बुद्धि बल से श्रेष्ठ है।”
बंदर ने सिर झुकाकर कहा,
“वचन रहा, महाराज।”
और फिर दोनों अपनी-अपनी राह चले गए।
कुछ हफ्ते बीत गए।
एक दिन शेर शिकार पर निकला।
घने जंगल में चलते-चलते वह थक गया।
अचानक उसके आगे ज़मीन पर सूखे पत्तों की परत दिखी।
वह उधर बढ़ा ही था कि धप्प! — अचानक नीचे गिर पड़ा।
चतुराई की ताकत
वह एक गहरे गड्ढे में गिर चुका था!
शेर ज़ोर से दहाड़ा —
“गुर्ररर्र! कौन है जिसने ये जाल बिछाया?”
उसने कोशिश की बाहर निकलने की, लेकिन गड्ढा बहुत गहरा था।
काफी मशक्कत के बाद वह किसी तरह बाहर निकल आया, पर उसका पैर घायल हो गया।
वह लँगड़ाते हुए चल ही रहा था कि तभी झाड़ियों से एक शिकारी निकल आया।
उसके हाथ में बंदूक थी।
शिकारी मुस्कराया —
“वाह! आज तो किस्मत ने सोने की थाली में शिकार परोसा है। घायल शेर — अब तेरा अंत निश्चित है!”
शेर गुर्राया, लेकिन घायल होने के कारण वह लड़ नहीं सका।
उसकी आँखों में डर और निराशा थी।
जैसे ही शिकारी ने निशाना साधा,
ऊपर से अचानक ठक! एक पत्थर उसके सिर पर आ गिरा।
वह चौंक गया, ऊपर देखा —
और तभी धड़ाम! — एक और पत्थर उसकी टोपी पर आ गिरा।
चतुराई की ताकत
“अरे! ये क्या हो रहा है?” शिकारी चीखा।
एक के बाद एक पत्थर बरसने लगे।
उसने डर के मारे बंदूक फेंकी और भाग खड़ा हुआ।
शेर कुछ क्षणों तक स्तब्ध खड़ा रहा।
धीरे-धीरे उसने ऊपर देखा —
पेड़ की डाल पर बैठा था वही बंदर!
बंदर मुस्कराते हुए बोला,
“महाराज, अब क्या हाल है आपके बल का? इतना शक्तिशाली शेर होते हुए भी शिकारी के सामने लाचार हो गए।”
शेर ने गहरी साँस ली और कहा,
“बंदर, ये तुमने किया?”
बंदर ने सिर हिलाया,
“हाँ महाराज। मैं कई दिनों से उस शिकारी पर नजर रखे था।
जब उसने जंगल में यह गड्ढा खोदा, मुझे समझ आ गया कि वह किसी बड़े जानवर को फँसाना चाहता है।
इसलिए मैंने पहले ही इस पेड़ पर पत्थर जमा कर लिए थे।
जब मैंने तुम्हें गिरते और घायल होते देखा, तो मुझे पता चल गया कि वक्त आ गया है।”
चतुराई की ताकत
शेर ने सिर झुकाया, उसकी आँखों में कृतज्ञता थी।
“बंदर भाई, आज तुमने मेरी जान बचाई।
अब मैं मानता हूँ — तुम्हारी बुद्धि मेरे बल से कहीं अधिक महान है।”
बंदर मुस्कराया,
“महाराज, यही सच्चाई है।
शिकारी आपसे बल में कमजोर था, पर अपनी बुद्धि से उसने आपको फँसा लिया।
और मैंने उसे अपनी बुद्धि से हरा दिया।
बल हर समय साथ नहीं देता, पर बुद्धि हमेशा रास्ता दिखाती है।”
शेर ने मुस्कराकर कहा,
“अब से इस जंगल में बुद्धि और बल दोनों बराबर माने जाएँगे —
पर बुद्धि को पहला स्थान मिलेगा।”
दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए —
शेर लँगड़ाता हुआ, और बंदर खुशी से डाल से डाल झूलता हुआ।
शिक्षा:
बल जरूरी है, लेकिन बिना बुद्धि के बल अंधा होता है। बुद्धि हमेशा रास्ता दिखाती है, जबकि बल कभी-कभी मुश्किल में छोड़ देता है।




