🍭 हैंसल और ग्रेटेल | Hansel & Gretel 🧙‍♀️

परियों की कहानियाँ | Fairy Tales in Hindi | Hansel and Gretel in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के किनारे एक गरीब लकड़हारा अपनी पत्नी और दो बच्चों—हैन्सल और ग्रेटल—के साथ रहता था। लकड़हारा मेहनती था, लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। खाने को हमेशा कमी रहती। ऊपर से उसकी दूसरी पत्नी, यानी बच्चों की सौतेली माँ, बहुत कठोर और स्वार्थी थी।

एक रात, जब चारों भूखे बैठे थे, सौतेली माँ बोली, “अब और नहीं सहा जाता! अगर हम इन दोनों बच्चों को जंगल में छोड़ दें, तो कम से कम हम दो लोग तो बचेंगे।”
लकड़हारा घबरा गया। उसने कहा, “नहीं! वे मेरे बच्चे हैं।”
पर सौतेली माँ ने ठंडी आवाज़ में कहा, “तो सब भूख से मरेंगे।”
लकड़हारा मजबूरी में चुप हो गया।

पास के कमरे में हैन्सल और ग्रेटल यह सब सुन रहे थे। ग्रेटल सिसक पड़ी, “भैया, अब क्या होगा?”
हैन्सल ने धीरे से कहा, “डर मत बहन, मैं कुछ सोच लूंगा।”

रात के अँधेरे में वह बाहर निकला और सफेद कंकड़ इकट्ठा करके अपनी जेब में भर लाया।
अगली सुबह जब सब जंगल की ओर चले, हैन्सल रास्ते में-रास्ते में वे कंकड़ गिराता गया।

जंगल के बीच पहुँचकर सौतेली माँ ने कहा, “यहीं बैठो, हम लकड़ियाँ काटने जा रहे हैं।”
लेकिन वे लौटे ही नहीं।

Hansel and Gretel in Hindi

रात गहराई तो ग्रेटल बोली, “अब हम कैसे घर जाएंगे?”
हैन्सल मुस्कुराया, “जब चाँद निकलेगा, तब देखना।”
वह चमकदार कंकड़ों की पंक्ति दिखाते हुए बोला, “यही हमारा रास्ता है।”
वे दोनों उन कंकड़ों के सहारे अपने घर लौट आए।

पिता उन्हें देखकर खुशी से रो पड़ा, “मेरे बच्चों!”
पर सौतेली माँ के चेहरे पर तमतमाहट थी। वह बोली, “अगली बार मैं सब ठीक कर दूँगी।”

कुछ दिन बाद, फिर भूख ने दरवाज़ा खटखटाया।
इस बार हैन्सल ने फिर पत्थर इकट्ठा करना चाहा, लेकिन दरवाज़ा बंद था। इसलिए उसने रोटी के टुकड़े जेब में रख लिए।

अगले दिन वे फिर जंगल की ओर चले। हैन्सल रास्ते में रोटी के टुकड़े गिराता गया।
पर रात में जब वे लौटने लगे, तो देखा—सारे टुकड़े चिड़ियाँ खा गई थीं।

अब वे पूरी तरह खो गए। तीन दिन तक भूखे-प्यासे जंगल में भटकते रहे।
तीसरे दिन, अचानक ग्रेटल ने कहा, “भैया, देखो! वहाँ वो क्या है?”

उनके सामने एक अजीब घर था—ब्रेड की दीवारें, केक की छत, और चीनी की खिड़कियाँ!
“वाह!” ग्रेटल ने हँसते हुए कहा, “ऐसा घर तो सपनों में भी नहीं देखा।”
हैन्सल ने दीवार का टुकड़ा तोड़ा, “मज़ेदार!”
तभी अंदर से आवाज़ आई, “कौन है जो मेरा घर खा रहा है?”

एक बूढ़ी औरत बाहर आई, मुस्कुराते हुए बोली, “डरो मत बच्चों, अंदर आओ। तुम्हारे लिए और भी मिठाइयाँ हैं।”
लेकिन असल में वह एक डायन थी, जो बच्चों को खा जाना चाहती थी।

उसने हैन्सल को पकड़कर पिंजरे में बंद कर दिया और ग्रेटल से बोली, “जा, खाना बना! कल तेरे भाई को खाऊँगी।”

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हर दिन वह हैन्सल से उँगली बाहर निकालने को कहती, ताकि देख सके कि वह मोटा हुआ या नहीं।
हैन्सल चालाक था। हर बार हड्डी बाहर निकाल देता। डायन की नज़र कमजोर थी, उसे धोखा हो जाता।

आखिर एक दिन वह चिल्लाई, “अब बहुत हुआ! कल तो मैं इसे खा ही लूँगी!”

उसने ग्रेटल से कहा, “ओवन गर्म कर दे!”
ग्रेटल डर से काँपते हुए बोली, “माँ, मुझे नहीं पता ओवन में झाँकते कैसे हैं?”
“ऐसे झाँकते हैं!” डायन ने झुककर अंदर देखा—और तभी ग्रेटल ने जोर से धक्का देकर दरवाज़ा बंद कर दिया!
डायन जलकर मर गई।

ग्रेटल ने दौड़कर हैन्सल को आज़ाद किया।
हैन्सल ने कहा, “बहन, अब हम घर लौटेंगे और कभी भूखे नहीं रहेंगे।”

महल जैसे घर में उन्हें सोने-चाँदी के सिक्कों से भरा बक्सा मिला।
वे उसे लेकर जंगल से निकल पड़े। रास्ते में उन्हें एक चौड़ी नदी मिली।
“अब कैसे पार करें?” ग्रेटल ने पूछा।
तभी एक सफेद हंस तैरता हुआ आया। दोनों उसके पीठ पर बैठकर नदी पार कर गए।

कई दिनों की यात्रा के बाद वे घर पहुँचे। पिता ने उन्हें देखकर आँसू बहा दिए।
“मुझे माफ़ कर दो, बच्चों,” उसने रोते हुए कहा।
सौतेली माँ मर चुकी थी। अब उनके पास सोना भी था और सच्चा प्यार भी।

उस दिन से उनका घर कभी खाली नहीं रहा—न खाने से, न खुशियों से।

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