जादुई कहानी | Fairy Tales in Hindi
बहुत समय पहले, एक दूर के राज्य में एक बेहद सुंदर, पर उतनी ही जिद्दी और घमंडी राजकुमारी रहती थी। उसकी रेशमी पोशाकें, सोने के गहने और आलीशान महल — सब कुछ उसके पास था। पर सबसे ज्यादा प्यारी उसे अपनी सोने की गेंद थी। वह दिन भर उस गेंद को उछालती, पकड़ती, और बगीचे के फव्वारे के पास खेलती रहती।
एक दिन धूप खिली थी, पंछी गा रहे थे, और राजकुमारी अपनी प्यारी गेंद के साथ बगीचे में खेल रही थी। उसने गेंद ज़ोर से उछाली, लेकिन वह उसके हाथों से फिसलकर सीधे गहरे कुएँ में जा गिरी।
राजकुमारी घबरा गई। वह कुएँ के पास झुककर देखने लगी, पर गेंद इतनी गहराई में चली गई थी कि दिखाई ही नहीं दे रही थी। वह रोने लगी, “अरे मेरी प्यारी गेंद! अब मैं क्या करूँ? कोई तो मेरी मदद करो!”
इतने में कुएँ से एक अजीब सी टर्र-टर्र की आवाज़ आई। पानी की सतह पर एक हरे रंग का मेंढक उभरकर आया। वह बोला,
“राजकुमारी, अगर मैं तुम्हारी सोने की गेंद वापस लाकर दूँ, तो क्या तुम मुझसे एक वादा करोगी?”
राजकुमारी ने हैरानी से पूछा, “किस बात का वादा?”
मेंढक बोला, “वादा करो कि तुम मुझे अपना दोस्त बनाओगी… अपने साथ महल ले जाओगी… अपने बर्तन में खाना दोगी… और अपने बिस्तर में सुलाओगी।”
जादुई कहानी
राजकुमारी को घिन सी आई। उसने मन ही मन सोचा, ‘छिः! एक मेंढक? मेरे साथ रहेगा? कभी नहीं! लेकिन अगर मैं इसे हाँ कह दूँ, तो यह गेंद तो ला ही देगा।’
वह मुस्कुराकर बोली, “हाँ हाँ, ठीक है, मैं वादा करती हूँ। बस मेरी गेंद ला दो।”
मेंढक ने ज़ोर से टर्र की, और छपाक! करके कुएँ में कूद गया। कुछ देर बाद वह गेंद को अपनी जीभ से पकड़कर बाहर ले आया। राजकुमारी खुशी से उछल पड़ी — “मेरी गेंद!” उसने झपटकर गेंद ली, और बिना कुछ कहे भाग गई। मेंढक आवाज़ लगाता रहा, “राजकुमारी! रुको! अपना वादा याद करो!” लेकिन राजकुमारी तो बहुत दूर निकल चुकी थी।
अगले दिन रात के खाने के समय, जब राजा और राजकुमारी भोजन कर रहे थे, तभी दरवाज़े पर टक टक की आवाज़ आई।
राजा ने पूछा, “इतनी देर रात कौन आया है?”
राजकुमारी का चेहरा पीला पड़ गया। उसने धीरे से कहा, “पिताजी… वो शायद एक मेंढक है… कल कुएँ के पास मैंने इसे एक वादा किया था…”
राजा गंभीर स्वर में बोले, “बेटी, जो वादा किया जाता है, उसे निभाना चाहिए। जाओ, अपने मित्र को अंदर बुलाओ।”
मन मारकर राजकुमारी उठी और दरवाज़ा खोला। सामने वही हरा मेंढक खड़ा था। उसने मुस्कुराकर कहा, “राजकुमारी, मैंने कहा था ना, हम अब दोस्त हैं।”
राजकुमारी ने नाक सिकोड़ते हुए कहा, “ठीक है, अंदर आओ…”
मेंढक उछलता हुआ अंदर आया और टेबल पर चढ़ गया। वह राजकुमारी के साथ बैठकर खाना खाने लगा।
राजकुमारी ने बड़ी मुश्किल से खाना खत्म किया — उसे यह सब बहुत बुरा लग रहा था।
लेकिन असली मुश्किल तब आई जब मेंढक बोला,
“अब मैं थक गया हूँ, राजकुमारी। चलो, तुम्हारे बिस्तर में थोड़ा आराम कर लूँ।”
जादुई कहानी
राजकुमारी गुस्से में उबल पड़ी, “क्या! तुम जैसे मेंढक को मैं अपने बिस्तर में सुलाऊँ? कभी नहीं!”
वह चीखी और गुस्से में मेंढक को उठाकर दीवार की ओर फेंक दिया!
और तभी कुछ अद्भुत हुआ — जैसे ही मेंढक दीवार से टकराया, एक चमकदार रोशनी फैली। जहाँ मेंढक था, वहाँ अब एक सुंदर राजकुमार खड़ा था!
राजकुमारी की आँखें फटी की फटी रह गईं।
राजकुमार मुस्कुराकर बोला, “राजकुमारी, मैं एक शापित राजकुमार था। मुझ पर जादू किया गया था कि जब तक कोई सच्चे दिल से मुझे स्वीकार नहीं करेगा, मैं मेंढक ही रहूँगा। तुम्हारी ईमानदारी — चाहे गुस्से में ही सही — ने मुझे आज़ाद कर दिया।”
राजकुमारी का दिल बदल गया। उसने शरमाते हुए कहा, “मुझे माफ़ कर दो। मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया।”
राजकुमार ने मुस्कुराकर कहा, “अब सब ठीक है। सच्ची दया और दोस्ती ही जादू तोड़ती है।”
कुछ दिनों बाद दोनों की शादी हो गई। वे सच्चे मित्र और साथी बनकर सदा खुश रहे।
शिक्षा:
कभी भी किसी के रूप या स्थिति को देखकर उसे तुच्छ मत समझो। सच्ची सुंदरता हमेशा दिल में होती है, चेहरे में नहीं।




