परियों की कहानियाँ | Fairy Tales Stories in Hindi
बहुत समय पहले की बात है, एक व्यापारी था जिसकी तीन बेटियाँ थीं। उसकी सबसे छोटी बेटी का नाम था — ब्यूटी। जैसे उसका नाम, वैसे ही उसका मन और चेहरा — दोनों सुंदर। वह विनम्र, दयालु और समझदार थी। उसे दूसरों की मदद करना और किताबें पढ़ना बहुत पसंद था। लेकिन उसकी बड़ी बहनें उससे बिल्कुल उलट थीं — घमंडी, स्वार्थी और दिखावे की शौकीन।
एक दिन व्यापारी किसी ज़रूरी काम से लंबी यात्रा पर निकलने वाला था। जाने से पहले उसने तीनों बेटियों से पूछा — “बेटियों, मेरे लौटते समय तुम्हें क्या उपहार चाहिए?”
बड़ी बेटी बोली, “मुझे सोने का हार चाहिए।”
दूसरी ने कहा, “मुझे सबसे सुंदर रेशमी कपड़े चाहिए।”
ब्यूटी मुस्कुराई और बोली, “मुझे बस एक गुलाब का फूल चाहिए, जो आप खुद मेरे लिए तोड़ें।”
पिता ने प्रेम से सिर हिलाया और यात्रा पर निकल पड़ा।
यात्रा के दौरान अचानक बहुत तेज़ तूफ़ान आया। व्यापारी रास्ता भटक गया और एक सुनसान रास्ते से गुजरते हुए एक अजीब, रहस्यमयी महल तक जा पहुँचा। महल अंदर से बहुत सुंदर था, लेकिन उसमें कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
फिर भी, जैसे कोई अदृश्य हाथ उसका ख्याल रख रहा हो — उसे गरम खाना मिला, आरामदायक बिस्तर मिला, और उसने एक शांत रात बिताई।
सुबह जब वह जाने लगा, तो उसने ब्यूटी की बात याद की — “एक गुलाब का फूल।”
उसने महल के बगीचे से एक सुंदर लाल गुलाब तोड़ा — बस उसी क्षण, एक भयानक गरजती आवाज़ आई!
“किसने मेरे बगीचे से गुलाब तोड़ा?”
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व्यापारी ने पीछे देखा तो उसके सामने एक विशाल, डरावना जानवर (बीस्ट) खड़ा था। उसकी आँखें अंगारों जैसी लाल थीं, आवाज़ भारी और भयंकर।
व्यापारी काँपता हुआ बोला, “मैं… मैं बस अपनी बेटी के लिए यह फूल ले जा रहा था।”
बीस्ट ने दहाड़ते हुए कहा, “तुमने मेरे बगीचे की चोरी की है! अब इसकी सज़ा तुम्हें या तुम्हारी बेटी को भुगतनी होगी!”
बेचारा व्यापारी डर गया। बीस्ट ने उसे कहा कि वह घर जाकर अपनी बेटी से कहे — या तो वह खुद वापस आए या पिता यहीं हमेशा के लिए कैद रह जाए।
घर लौटकर व्यापारी ने सब कुछ बताया। ब्यूटी ने पिता का चेहरा देखा और शांत स्वर में बोली, “पिताजी, आपकी जान से बढ़कर कुछ नहीं। मैं उस महल जाऊँगी।”
जब ब्यूटी बीस्ट के महल पहुँची, तो उसे डर तो बहुत लगा, पर जल्द ही उसने महसूस किया कि बीस्ट बाहर से जितना भयानक है, अंदर से उतना ही दयालु।
वह उसके लिए सुंदर कपड़े मंगवाता, स्वादिष्ट खाना खिलाता, और हर शाम विनम्रता से बातें करता।
धीरे-धीरे दोनों में एक अजीब-सी दोस्ती होने लगी।
हर रात बीस्ट उससे पूछता, “क्या तुम मुझसे शादी करोगी, ब्यूटी?”
और हर बार ब्यूटी मुस्कुराकर कहती, “अभी नहीं, बीस्ट।”
कई महीने बीत गए। एक दिन ब्यूटी को अपने पिता और परिवार की याद सताने लगी। बीस्ट ने उदास मन से कहा, “ठीक है, जाओ। लेकिन सात दिन बाद ज़रूर लौट आना, नहीं तो मैं मर जाऊँगा।”
ब्यूटी ने वादा किया और घर लौट आई।
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लेकिन जब उसकी बड़ी बहनों ने देखा कि ब्यूटी अब पहले से कहीं ज़्यादा खुश, सुंदर और आत्मविश्वासी लग रही है, तो वे जलन से भर उठीं। उन्होंने चाल चली और उसे वापस जाने से रोक लिया।
जब ब्यूटी सातवें दिन के बाद भी नहीं लौटी, तो उसे बेचैनी हुई। एक रात उसने सपना देखा कि बीस्ट बगीचे में पड़ा है, आधा मरा हुआ। वह डर के मारे जागी और तुरंत महल भागी।
वहाँ उसने देखा — सपना सच था! बीस्ट बगीचे में पड़ा था, उसकी साँसे धीमी हो रही थीं।
ब्यूटी की आँखों में आँसू आ गए। उसने रोते हुए कहा, “ओह बीस्ट, मुझे माफ़ कर दो! मुझे अब एहसास हुआ है कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ! हाँ, मैं तुमसे शादी करूँगी!”
जैसे ही उसके होंठों से ये शब्द निकले, एक जादुई रोशनी चमकी — और बीस्ट की भयानक शक्ल गायब हो गई!
उसकी जगह एक सुंदर राजकुमार खड़ा था।
राजकुमार मुस्कुराया और बोला, “ब्यूटी, मैं एक श्राप में बँधा था। एक जादूगरनी ने कहा था कि जब तक कोई मुझे मेरे रूप के परे देखकर सच्चे दिल से प्यार नहीं करेगा, तब तक मैं इस रूप में रहूँगा। तुम्हारे प्यार ने मुझे मुक्त कर दिया।”
ब्यूटी मुस्कुराई, और उनके चारों ओर फूल खिल उठे। जल्द ही दोनों का विवाह हुआ और वे हमेशा ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे।
शिक्षा:
कभी भी किसी के रूप या स्थिति को देखकर उसे तुच्छ मत समझो। सच्ची सुंदरता हमेशा दिल में होती है, चेहरे में नहीं।




