अलिफ़ लैला | One Thousand & One Nights
पहाड़ की एक गुफा में एक लोमड़ा रहता था। यह गुफा ऊँची और सुरक्षित थी, लेकिन वह लोमड़ा अपने ही स्वभाव के कारण अकेला था। लोमड़े की एक आदत थी, जब भी उसके घर में कोई बच्चा पैदा होता, वह उसे पाल-पोसकर बड़ा करने की बजाय, भूख के कारण खुद खा जाता। लोमड़े को यह एहसास था कि अगर वह ऐसा न करे, तो उसके बच्चे बड़े होकर उसके जीवन में खुशी ला सकते थे। लेकिन भूख और स्वार्थ उसे ऐसा करने से रोक देते।
एक दिन, उसी पहाड़ के पास वाले पेड़ पर एक कौए ने अपना घोंसला बना लिया। कौआ बुद्धिमान और सतर्क था। वह अपनी नजर हर समय पेड़, जमीन और आस-पास के जीवों पर रखता था। जब लोमड़े ने कौए को देखा, तो उसने सोचा कि इस कौए से दोस्ती कर लेना अच्छा होगा। कौआ हर दिन आस-पास घूमता और चीजें ढूंढता था। लोमड़ा सोचने लगा कि अगर कौआ उसका दोस्त बन जाए, तो वह उसके लिए खाना जुटाने में मददगार हो सकता है।
लोमड़े की दोस्ती की पेशकश :
लोमड़ा कौए के पास गया और बड़े ही मीठे शब्दों में बोला, “ओ बुद्धिमान कौए, मैं तुम्हें सलाम करता हूँ। तुम मेरे पड़ोसी हो, और पड़ोसी का हक़ पड़ोसी पर होता है। मैं तुमसे सच्चे मन से दोस्ती करना चाहता हूँ। हम दोनों साथ रहकर एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।”
कौआ सतर्क था। उसने तुरंत जवाब दिया, “तुम्हारे शब्दों में मिठास तो है, लेकिन सच कहूँ तो तुम्हारी नीयत साफ नहीं लगती। तुम जंगली जानवर हो, और मैं चिड़िया हूँ। हमारी प्रकृति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। दोस्ती करना तो दूर, मैं तुम्हारे इरादों पर भरोसा भी नहीं कर सकता।”
लोमड़ा चालाकी से मुस्कुराया और बोला, “तुम्हें मुझ पर विश्वास करना चाहिए। मैं तुम्हें एक दिलचस्प कहानी सुनाता हूँ, जिससे तुम समझ सकोगे कि दोस्ती कितनी महत्वपूर्ण होती है।”
खटमल और चुहिया की कहानी :
लोमड़े ने कहानी शुरू की, “बहुत समय पहले, एक बड़े शहर में एक अमीर सौदागर रहता था। वह बहुत धनवान था और हर रात एक आरामदायक बिस्तर पर सोता था। एक रात, एक भूखा खटमल उस सौदागर के बिस्तर में जा छुपा। सौदागर के नाजुक शरीर को देखकर खटमल की भूख बढ़ गई। उसने सौदागर को काटकर उसका खून पी लिया।
सौदागर को दर्द हुआ और वह जाग गया। उसने तुरंत अपने नौकरों को बुलाया और खटमल को ढूँढने का आदेश दिया। लेकिन खटमल तेज था। वह वहाँ से भागकर पास ही एक चुहिया के बिल में छिप गया। जब चुहिया ने खटमल को अपने घर में देखा, तो उसने पूछा, ‘तुम यहाँ क्यों आए हो? न तुम मेरी जाति के हो, न ही मेरे जैसे। तुम मेरे घर में क्या कर रहे हो?’
खटमल ने दयनीय स्वर में कहा, ‘मुझे मरने से बचने के लिए तुम्हारे घर में शरण लेनी पड़ी। मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारे घर में कोई गड़बड़ी नहीं करूँगा और इस दया का बदला जरूर चुकाऊँगा।’ चुहिया ने कुछ सोचकर कहा, ‘अगर तुम सचमुच ऐसा करोगे, तो तुम यहाँ रह सकते हो। लेकिन याद रखना, मेरी दया का गलत फायदा मत उठाना।’ खटमल ने वादा किया और चुहिया के घर में रहने लगा। धीरे-धीरे उनके बीच दोस्ती गहरी होती गई। खटमल हर रात सौदागर के बिस्तर पर जाता और दिन में चुहिया के घर लौट आता।
एक दिन सौदागर ढेर सारी दीनारें लेकर घर आया। उसने उन्हें अपने बिस्तर के पास रख दिया। चुहिया ने सिक्कों की खनक सुनी और उसकी आँखें चमक उठीं। उसने खटमल से कहा, ‘क्या तुम मेरी मदद करोगे? मुझे उन सिक्कों को अपने बिल में ले जाना है।’ खटमल बोला, ‘यह काम आसान नहीं है। अगर हम पकड़े गए, तो यह हमारी बदकिस्मती होगी।’
चुहिया ने उसे आश्वस्त किया और योजना बनाई। उस रात खटमल ने सौदागर को बार-बार काटा, जिससे सौदागर परेशान होकर अपने कमरे से बाहर चला गया। चुहिया ने मौके का फायदा उठाकर धीरे-धीरे सभी सिक्के अपने बिल में खींच लिए। इस तरह खटमल ने चुहिया के उपकार का बदला चुकाया।’
कौए की प्रतिक्रिया :
कौआ कहानी सुनकर मुस्कुराया और बोला, “यह कहानी अच्छी है, लेकिन इसमें यह भी दिखता है कि हर दोस्त पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अगर मैं तुम्हारे जैसे चालाक लोमड़े से दोस्ती करूँ, तो यह मेरी सबसे बड़ी गलती होगी। तुमने पहले भी अपनी जाति के जानवरों के साथ विश्वासघात किया है। मैं तो केवल यह जानता हूँ कि चालाकी कभी खत्म नहीं होती। भले ही तुम सीधे तरीके से न जीत सको, लेकिन धोखे से जरूर कुछ हासिल करने की कोशिश करोगे।”
चिड़िया और गरुड़ की कहानी :
कौआ अपनी बात को समझाने के लिए बोला, “एक बार की बात है, एक चिड़िया एक भेड़ की पीठ पर बैठी थी। उसने देखा कि एक गरुड़ ने एक नन्हे मेमने को अपने पंजों में पकड़ लिया और आसमान में उड़ गया। चिड़िया ने गरुड़ की नकल करने की कोशिश की और एक बड़े मेमने के ऊपर बैठ गई। लेकिन जैसे ही उसने उड़ने की कोशिश की, उसके पैर मेमने की ऊन में फँस गए।
चरवाहे ने यह देखा और चिड़िया को पकड़ लिया। उसने चिड़िया को अपने बच्चों के खेलने के लिए दे दिया। इस तरह, नकल करने के चक्कर में चिड़िया फँस गई। तुम भी ऐसे ही हो, लोमड़े। अपनी चालाकी से दूसरों को फँसाते हो, लेकिन एक दिन तुम्हारी चालाकी तुम्हारे ही खिलाफ हो जाएगी।”
लोमड़े की हार :
लोमड़ा इस बातचीत से हताश हो गया। उसने दाँत पीसते हुए कहा, “तुम मुझसे भी बड़े धोखेबाज हो।”कौआ हँसते हुए बोला, “धोखेबाज वही देखता है जो दूसरे के मन में छिपा है। अब तुम जाओ और शांति से रहो। मैं तुम्हारी चालाकियों का हिस्सा नहीं बनूँगा।”
लोमड़ा अपना गुस्सा दबाकर अपने गुफा में लौट गया। उसने सोचा, “कभी-कभी चालाकी से ज्यादा जरूरी है सच्चाई और भरोसा। शायद इस कौए ने मुझे सही सबक सिखाया।”
शिक्षा :
चापलूसी और छलावे से बचकर रहें। सच्ची मित्रता और सहयोग सतर्कता और समझदारी से ही मिलती है।
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