अलिफ़ लैला | Alif Laila ki Kahani
एक बार की बात है, एक बतख ऊँची उड़ान भरते हुए बहती नदी में स्थित एक चट्टान पर जा बैठा। वहाँ, पानी की एक तेज़ लहर एक मृत शरीर को बहाकर चट्टान के पास ले आई। उत्सुक बतख ने उस शरीर को ध्यान से देखा। वह एक इंसान का शव था, जिसके शरीर पर भाले और तलवार के गहरे घाव साफ दिखाई दे रहे थे।
बतख ने सोचा, “शायद यह व्यक्ति बुरे कर्म करता था, इसलिए लोगों ने इसे मार डाला होगा। अब वे लोग शांतिपूर्वक रह सकते हैं।”
अभी वह यही सोच रहा था कि तभी एक गिद्ध और अन्य बड़ी चिड़ियाँ आसमान से उसकी ओर आने लगीं। यह देखकर बतख ने सोचा, “यह जगह अब मेरे लिए सुरक्षित नहीं है।” वह तुरंत वहाँ से उड़कर एक नदी के बीच स्थित एक बड़े पेड़ पर जा बैठा।
उसने चारों ओर देखा और सोचा, “मुझे अपना घर छोड़ना पड़ा। पहले वह मरा हुआ शरीर देखा, जिससे डरकर मैं भागा। अब इन बड़ी चिड़ियों ने मुझे बेघर कर दिया। यह दुख और दुर्भाग्य मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहे।”
इसी बीच, नदी में एक कछुआ तैरता हुआ आया। उसने बतख को सलाम किया और पूछा, “तुम यहाँ इतनी दूर क्यों आए हो, मित्र?”
बतख ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “जहाँ दुश्मन हों, वहाँ रहना समझदारी नहीं है। इसलिए मैं अपनी जन्मभूमि छोड़कर यहाँ आया हूँ।”
कछुआ समझदार और दयालु था। उसने कहा, “चिंता मत करो, अब मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा। मैं तुम्हारा साथ दूँगा और हर मुश्किल में तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा। दुख से घबराओ मत, क्योंकि दुख केवल जीवन को कष्टमय बनाता है।”
कछुआ और बतख कुछ देर साथ चलते रहे। कछुआ ने बतख को दिलासा देते हुए कहा, “तुम्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हारे शब्दों में हमेशा समझदारी झलकेगी, और तुम्हारी चतुराई ही तुम्हारी रक्षा करेगी।”
कछुए के दिलासा देने पर बतख को बहुत सुकून मिला। फिर उसने तय किया कि वह अपनी पुरानी जगह लौटकर देखेगा। जब वह वापस चट्टान के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि वे गिद्ध और बड़ी चिड़ियाँ वहाँ से जा चुकी थीं। उन्होंने उस मृत शरीर को पूरी तरह खा लिया था, और अब वहाँ सिर्फ हड्डियाँ बची थीं।
यह देखकर बतख खुशी-खुशी कछुए के पास लौट आया और उसे बताया, “मेरे दुश्मन चले गए हैं। अब मैं अपने घर लौट सकता हूँ।” कछुआ भी उसके साथ उसके घर तक गया और देखा कि वहाँ अब कोई खतरा नहीं है। दोनों ने मिलकर खुशी-खुशी उस टापू पर जीवन बिताना शुरू कर दिया।
लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिन टिक नहीं पाई। एक दिन, एक भूखी चील अचानक वहाँ आई और अपनी तेज़ चोंच से बतख पर हमला कर दिया। चील ने बतख को मार डाला।
बतख की मौत का कारण उसकी असावधानी और गलत आत्मसंतोष था। उसने कहा था, “सब अल्लाह की मेहरबानी है। वही सबको चीज़ें देता है और सबकी रक्षा करता है।” लेकिन उसने यह नहीं समझा कि खुद की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना भी जरूरी है।
शिक्षा :
अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी परिस्थिति में अति आत्मसंतोष और लापरवाही घातक हो सकती है। जीवन में कठिनाइयों से भागने के बजाय उनका सामना करना सीखना चाहिए। हर परिस्थिति में विवेक और सावधानी को बनाए रखना जरूरी है।
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