अलिफ़ लैला की कहानियां | One Thousand & One Nights
एक समय की बात है, एक गाँव में एक शेख रहता था, जिसकी अपनी मुर्गियों और मुर्गों की देखभाल के लिए बड़ी ख्याति थी। उसके पास कई मुर्गे-मुर्गियाँ थे, जिनमें से एक बूढ़ा मुर्गा बहुत ही बुद्धिमान और दुनियादारी का जानकार था।
एक दिन यह बूढ़ा मुर्गा खेतों में घूमने निकला। चलते-चलते वह दाने और तिल खाता हुआ दूर जंगल में पहुँच गया। उसे पता ही नहीं चला कि वह अपने घर से बहुत दूर निकल आया है। जब उसने चारों तरफ देखा, तो न कोई दोस्त था, न कोई परिचित। वह उलझन में था कि अब क्या करे।
इसी बीच, उसने एक लोमड़े को अपनी ओर आते देखा। लोमड़े को देखकर मुर्गा डर के मारे काँपने लगा। तभी उसने पास में एक ऊँची दीवार देखी। मुर्गा तुरंत उड़ा और दीवार पर जा बैठा। वहाँ पहुँचकर उसने राहत की सांस ली, क्योंकि अब लोमड़ा उसे पकड़ नहीं सकता था।
लोमड़ा दीवार के नीचे पहुँचा और ऊपर बैठे मुर्गे से कहा, “अल्लाह करे तुम शांति से रहो, मेरे प्यारे दोस्त। क्या तुम मुझे नहीं पहचानते? हम तो अच्छे दोस्त हैं!”
मुर्गा उसकी बातों पर ध्यान दिए बिना दूर देखने लगा। लोमड़े ने फिर कहा, “क्या तुम मेरे सलाम का भी जवाब नहीं दोगे? क्या तुम्हें याद नहीं, हमने पहले भी दोस्ती की बातें की थीं?”
मुर्गा फिर भी चुप रहा। लोमड़े ने चालाकी से कहा, “भाई, अभी-अभी जानवरों के राजा शेर और चील ने जंगल में शांति स्थापित की है। उन्होंने मुझे अपना दूत बनाकर भेजा है। अब सब जानवर और पक्षी मिल-जुलकर रहते हैं। कोई किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता। मैं तुम्हें बुलाने आया हूँ। नीचे आ जाओ, अब डरने की कोई बात नहीं।”
पर मुर्गा समझदार था। उसने लोमड़े की बातों पर भरोसा नहीं किया और चुपचाप बैठा रहा।
लोमड़े ने बार-बार कोशिश की, लेकिन मुर्गा टस से मस नहीं हुआ। हारकर लोमड़ा झल्लाया, “तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते? क्या तुम मुझे अपने राजा के दूत के रूप में भी सम्मान नहीं दे सकते?”
तब मुर्गा बोला, “लोमड़े भाई, मैं तुम्हारी बात मानता हूँ और शांति की पहल की सराहना करता हूँ। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि हालात अब बदलने वाले हैं।”
लोमड़ा हैरानी से बोला, “कैसे बदलने वाले हैं? क्या हुआ?”
मुर्गा नीचे की तरफ देखता हुआ बोला, “मैं वहाँ धूल का बादल देख रहा हूँ और उसके ऊपर गोले में उड़ती चीलें। शायद कुछ आने वाला है।”
यह सुनते ही लोमड़ा थोड़ा असहज हो गया। उसने पूछा, “क्या तुम देख सकते हो कि वह धूल किसकी है?”
मुर्गा बोला, “अभी साफ तो नहीं दिख रहा, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि वह कोई बड़ा जानवर है। शायद ग्रेहाउंड कुत्ता हो।”
यह सुनते ही लोमड़ा डर गया और बोला, “भाई, मुझे अब यहाँ से जाना चाहिए। संभलकर रहना।”
लोमड़े को भागते देखकर मुर्गा चिल्लाया, “तुम क्यों भाग रहे हो? तुम तो कहते थे कि जंगल में अब शांति है और जो किसी को नुकसान पहुँचाएगा उसे सजा दी जाएगी?”
लोमड़ा हड़बड़ाते हुए बोला, “हां, लेकिन उस समय यह ग्रेहाउंड वहाँ नहीं था, उसे यह कानून मालूम नहीं होगा!” यह कहकर लोमड़ा वहां से तुरंत भाग गया।
लोमड़े के जाने के बाद मुर्गा दीवार से उतरा और अपनी समझदारी और हिम्मत पर गर्व महसूस किया। उसने अपने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया, जिसने उसे संकट से बचाया। फिर वह अपने मालिक के घर की ओर लौट चला।
शिक्षा :
जो खुद नियमों का पालन नहीं करता, वह दूसरों को नियमों की सीख नहीं दे सकता।
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