साहस, चतुराई और विश्वास की सीख | Bravery, Courage and Intelligence

अलिफ़ लैला की दास्तान, Story of Peacock and Goose, dear and tiger cub

बहुत समय पहले, एक मोर और उसकी पत्नी समुद्र के किनारे के जंगल में रहते थे। वहाँ की खतरनाक जंगली जानवरों से घिरी रातें उनके लिए बेचैन करने वाली थीं। डर बढ़ता गया, और उन्होंने एक नई जगह तलाशने का फैसला किया। ढूंढते-ढूंढते, वे एक सुंदर टापू पर पहुँचे। वहाँ फलदार पेड़ और मीठे पानी के नाले थे। उन्हें यह जगह स्वर्ग जैसी लगी, और उन्होंने इसे अपना नया घर बना लिया।

कुछ समय बाद, एक बतख वहाँ पहुँची। वह परेशान और डरी हुई थी। उसने कहा, “मैं आदमी से परेशान हूँ। वह बहुत चालाक है।” मोर ने उसे दिलासा दिया, “डरो मत, यहाँ कोई आदमी नहीं आ सकता। यह टापू सुरक्षित है।”

लेकिन बतख के डर की गहराई उसके शब्दों से झलक रही थी। उसने बताया कि कैसे उसे आदमी ने सताया था। आदमी के बारे में उसकी बातें सुनकर मोरनी ने कहा, “यहाँ कोई आदमी नहीं आएगा। तुम्हें अब चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।”

एक दिन बतख ने बताया कि उसने पहाड़ पर एक शेर के बच्चे से मुलाकात की थी। वह भी आदमी से डरता था। उसने गधे, घोड़े, और ऊँट से भी आदमी के खिलाफ उनकी कहानियाँ सुनीं। हर कोई आदमी की चालाकी और ताकत से भयभीत था।

गधा बोला, “आदमी मुझे अपनी सवारी के लिए इस्तेमाल करेगा, और जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा, तो मुझे मजदूरी के लिए बेच देगा।”
घोड़ा बोला, “वह मुझ पर सवारी करेगा और जब मैं कमजोर हो जाऊँगा, तो मुझे मशीन चलाने वाले के हवाले कर देगा।”
ऊँट ने कहा, “वह मेरी नाक में रस्सी डाल देगा और जब मैं थक जाऊँगा, तो मुझे मार डालेगा।”

हर जानवर की कहानी सुनकर शेर का बच्चा गुस्से में भर गया। उसने कसम खाई कि वह आदमी से लड़ेगा और उसे हराएगा।

आखिरकार, एक दिन एक बढ़ई वहाँ पहुँचा। उसने शेर के बच्चे से चालाकी से कहा कि वह उसके लिए एक घर बनाएगा। लेकिन बढ़ई ने ऐसा बक्सा बनाया जिसमें शेर का बच्चा फँस गया। उसने शेर को बेबस कर दिया और फिर बक्से को आग में फेंक दिया।

बतख ने यह घटना देखी और डर के मारे चुप हो गई। वह समझ गई कि आदमी कितना चतुर है।

कुछ दिन बाद, एक हिरन उस टापू पर आया। उसने बताया कि वह आदमी से भागकर वहाँ आया है। मोरनी ने उसे दिलासा दिया और “अल्लाह की जय हो” कहने की सलाह दी, ताकि वह सुरक्षित रह सके।

लेकिन उनकी शांति ज्यादा दिन तक नहीं रही। एक दिन, एक जहाज टापू पर आ पहुँचा। जहाज के लोगों ने बतख को पकड़ लिया और अपने साथ ले गए। मोरनी और हिरन उसकी मदद नहीं कर सके।

मोरनी ने हिरन से कहा, “बतख शायद इसलिए मरी क्योंकि उसने ‘अल्लाह की जय हो’ नहीं कहा। हमें हर हाल में ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए।” यह कहकर उन्होंने मिलकर उस टापू पर अपनी जिंदगी जारी रखी।

शिक्षा :

हर परिस्थिति में सतर्क रहें, अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करें। डर के आगे सोच-समझकर कदम उठाना ही सच्ची सुरक्षा है।

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