अलिफ लैला की कहानि | Alif Laila Stories
समुद्र किनारे फैले एक घने, रहस्यमयी जंगल में एक खूबसूरत मोर और उसकी आकर्षक, शांत स्वभाव वाली मोरनी रहते थे। रातें अक्सर काली और डरावनी होतीं, हवा में अजीब सी सरसराहट घुली रहती, और दूर कहीं जंगली जानवरों की आवाजें गूंजती रहती थीं। कई बार मोरनी डरकर मोर के पास सिमट जाती।
एक रात, जब दूर से किसी जानवर की दहाड़ सुनाई दी, मोरनी काँपते हुए बोली,
“सुनो… आज फिर वही आवाज़ आई… मैं अब यहाँ और नहीं रह पाऊँगी। यह जगह अब घर नहीं लगती।”
मोर ने उसका हाथ थामते हुए कहा,
“घबराओ मत, मेरी रानी। मैं हूँ न। लेकिन… तुम ठीक कह रही हो। अब हमें नई जगह तलाश लेनी चाहिए। जहाँ शांति हो… सुरक्षा हो।”
दोनों अगले दिन सफर पर निकल पड़े। कई दिनों तक जंगलों, पहाड़ों, झाड़ियों और अंधेरी घाटियों को पार करते हुए, वे आखिरकार समुद्र के बीच बसे एक सुंदर, सुनहरे टापू पर पहुँच गए।
वहाँ हवा में मिठास थी, चारों ओर फलदार पेड़ थे, और टापू के बीचोंबीच एक चमकदार मीठे पानी का झरना बहता था।
मोर खुशी से बोला,
“वाह! यह जगह तो स्वर्ग है!”
मोरनी ने मुस्कुरा कर कहा,
“हाँ, और यहाँ कोई खतरा भी नहीं दिख रहा। हमें यहीं बस जाना चाहिए।”
यही से उनके नए जीवन की शुरुआत हुई—शांत, सुंदर और सुरक्षित।
लेकिन यह शांति ज्यादा समय तक रहने वाली नहीं थी…
एक दिन, दोपहर को जब सूरज बादलों से आँख-मिचौली खेल रहा था, मोरनी पानी भरने झरने के पास गई। तभी उसने किसी को रोते हुए सुना।
“क… कोई है? कौन रो रहा है?” मोरनी ने झाँककर देखा।
एक थकी हुई, काँपती हुई बतख वहाँ खड़ी थी, मानो बहुत दूर से डरते-डरते भागकर आई हो।
मोरनी ने पास जाकर पूछा,
“क्या हुआ बहन? तुम इतनी परेशान क्यों हो?”
बतख आँसू पोंछते हुए बोली,
“मैं… मैं आदमी से बचकर भागी हूँ… वह बहुत चालाक है… बहुत खतरनाक…”
अलिफ लैला की कहानि
मोर और मोरनी चौंक गए।
मोर बोला,
“यहाँ आदमी कैसे आएगा? यह टापू तो समुद्र के बीच है। तुम चिंता मत करो। यहाँ तुम सुरक्षित हो।”
लेकिन बतख की आँखों में गहरा डर था।
उसने काँपती आवाज़ में कहा,
“तुम आदमी को नहीं जानते। वह धोखे से हमला करता है। वह मीठी बातों में फँसाता है… और फिर… फिर… बर्बाद कर देता है।”
मोरनी ने उसे ढाढ़स बंधाते हुए कहा,
“यहाँ भगवान की मर्जी से सब ठीक होगा। तुम शांति से रहो।”
बतख धीरे-धीरे उनके साथ रहने लगी, लेकिन आदमी का डर उसके भीतर बैठा हुआ था।
एक शाम बतख बोली,
“आज मैं पहाड़ की तरफ गई थी। वहाँ एक शेर का बच्चा मिला… वह भी आदमी के डर से भागकर आया है।”
मोर ने पूछा,
“शेर का बच्चा? वह क्यों डरता होगा आदमी से?”
बतख बोली,
“क्योंकि उसने गधे, घोड़े और ऊँट से आदमी की करनी सुनी है।”
फिर उसने एक-एक करके जानवरों की बातें बताईं—
“आदमी मुझे अपनी सवारी के लिए इस्तेमाल करेगा। और जब बूढ़ा हो जाऊँगा, तो मुझे मजदूरी पर लगा देगा… बड़ी क्रूरता से।”
“वह मुझ पर सवारी करेगा, मेरी ताकत निचोड़ लेगा। जब मैं गिरने लगूँगा… वह मुझे बदल देगा, जैसे कोई पुराना सामान।”
“मेरी नाक में रस्सी डालकर मुझे खींचेगा। और जब मैं थक जाऊँगा… मुझे मारने से भी नहीं हिचकिचाएगा।”
यह सुनते ही शेर का बच्चा आदमी से बदला लेने की कसम खा चुका था।
कुछ दिन बाद, टापू पर अचानक एक बढ़ई आ पहुँचा—लकड़ी का काम करने वाला आदमी।
शेर के बच्चे ने उसे देखा और दहाड़ते हुए बोला,
“तू… आदमी! मैं तुझे नहीं छोड़ूँगा!”
बढ़ई ने डरने का नाटक किया और बोला,
“मैं… मैं तो तुमसे दोस्ती करने आया हूँ। क्यों न मैं तुम्हारे लिए एक शानदार घर बनाऊँ?”
शेर का बच्चा थोड़ा भरोसे में आ गया।
बढ़ई ने लकड़ियाँ काटकर एक सुंदर सा डिब्बा बनाया और बोला,
“लो! यह तुम्हारा नया घर है। अंदर जाकर देखो।”
शेर का बच्चा भोलेपन से अंदर गया…
और जैसे ही गया—
अलिफ लैला की कहानि
बूम!
बढ़ई ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
शेर का बच्चा दहाड़ते हुए बोला,
“धोखेबाज़! मुझे बाहर निकाल!”
लेकिन बढ़ई ने पूरा बक्सा उठाया…
…उसे आग के ढेर में फेंक दिया।
बतख यह सब दूर से देख रही थी। उसके शरीर में काँटे खड़े हो गए।
वह धीरे से बोली,
“यही है आदमी… मीठी बातें… और फिर धोखा।”
कई दिन बाद एक थका-हारा हिरन उस टापू पर पहुँचा।
मोर ने पूछा,
“तुम कौन? यहाँ कैसे आए?”
हिरन ने भारी सांस लेते हुए कहा,
“मैं… मैं आदमी से भागकर आया हूँ। उसने मेरे कई साथियों का शिकार किया है। मैं जान बचाकर भागा हूँ।”
मोरनी ने उसे पानी पिलाया और कहा,
“डरो मत। यहाँ सुरक्षित हो। और हमेशा ‘ईश्वर की जय हो’ कहा करो, सब ठीक रहेगा।”
हिरन ने सिर हिलाया।
फिर एक शाम—
दूर समुंदर से एक बड़ा जहाज धीरे-धीरे टापू के किनारे लगा।
हिरन घबराकर बोला,
“लागता है… आदमी आ गया!”
मोरनी फुसफुसाई,
“भगवान रक्षा करे…”
जहाज से कुछ लोग उतरे।
उन्होंने टहलते-टहलते बतख को देख लिया।
एक आदमी बोला,
“अरे! बढ़िया है! इसे पकड़ लो।”
बतख चीखती रही—
“नहीं… मुझे मत ले जाओ…!”
लेकिन इंसान उसे पकड़ ले गए।
मोर और हिरन दूर छिपकर बस देखते रह गए—बेबस।
मोरनी दुखी होकर बोली,
“शायद बतख इसलिए मरी… क्योंकि उसने ‘ईश्वर की जय हो’ नहीं कहा। हमें ईश्वर का धन्यवाद हर हाल में करना चाहिए।”
हिरन ने सिर झुकाकर कहा,
“तुम सही कहती हो। आदमी से बचना मुश्किल है… सिर्फ भगवान ही हमारी रक्षा कर सकता है।”
और वे दोनों टापू पर अपनी जिंदगी आगे बढ़ाते रहे—लेकिन आदमी की चालाकी और दुनिया की सच्चाई वे कभी नहीं भूल पाए।
शिक्षा:
मनुष्य की चालाकी और लालच से बचना बहुत कठिन है। जो दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता। ईश्वर पर भरोसा और सावधानी—दोनों ही जीवन के लिए जरूरी हैं।




