खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी बच्चों के लिए एक रोचक नैतिक कहानी है, जिसमें एक भूखा भेड़िया अपनी चालाकी के कारण मुसीबत में फँस जाता है। यह कहानी बताती है कि अधूरी बात सुनकर गलत उम्मीदें पालना और बिना सोचे किसी अवसर पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
एक दिन एक सेविका छोटे बच्चे को चुप कराने की कोशिश कर रही थी। बच्चा लगातार रो रहा था, इसलिए गुस्से में सेविका ने उसे भेड़िये से डराने की धमकी दे दी। संयोग से घर के बाहर एक भूखा भेड़िया छिपा हुआ था। उसने यह बात सुन ली और सोचने लगा कि सेविका सचमुच बच्चे को उसके सामने डाल देगी।
भेड़िया लालच में आकर वहीं इंतजार करने लगा। लेकिन बच्चे के चुप हो जाने से उसकी योजना बिगड़ गई। जब वह यह देखने के लिए खिड़की के पास पहुँचा कि अंदर क्या हो रहा है, तो सेविका ने उसे देख लिया। फिर जो हुआ, उससे भेड़िये को अपनी गलती का एहसास हो गया।
यह कहानी केवल भेड़िये की चालाकी की बात नहीं करती, बल्कि सोच-समझकर बोलने, अधूरी जानकारी पर भरोसा न करने और लालच में निर्णय न लेने का महत्व भी समझाती है।
- खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा
- पूरी कहानी
- नैतिक कहानी "खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा" के मुख्य पात्र
- इस नैतिक कहानी से क्या सीख मिलती है
- आज के जीवन में इस नैतिक कहानी का महत्व
- माता-पिता और शिक्षकों के लिए चर्चा प्रश्न
- कठिन शब्दों का अर्थ
- संबंधित कहावतें
- बच्चों के लिए गतिविधियाँ
- नैतिक कहानियों के बारे में
- FAQ – "खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा" कहानी से जुड़े सामान्य प्रश्न
- लेखिका
पूरी कहानी
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे-से गाँव में एक परिवार रहता था। दोपहर का समय था। आँगन में धूप फैली हुई थी और आसपास के पेड़ों पर चिड़ियाँ चहचहा रही थीं।
घर के अंदर एक सेविका छोटे बच्चे को खाना खिला रही थी।
“चलो बेटा, एक निवाला और खा लो। फिर आराम से सो जाना।” सेविका ने प्यार से कहा।
लेकिन बच्चा अपना मुँह फेरकर बैठ गया।
सेविका ने उसे थोड़ा और खिलाने की कोशिश की, मगर बच्चा खाने के बजाय रोने लगा।
“अरे, क्या हुआ। अभी तो तुम हँस रहे थे। अब रो क्यों रहे हो।” सेविका ने उसे गोद में झुलाते हुए पूछा।
बच्चा और जोर-जोर से रोने लगा।
सेविका ने उसे खिलौना दिखाया, प्यार से पुचकारा और लोरी सुनाने की भी कोशिश की।
“चंदा मामा दूर के, पूए पकाएँ गुड़ के।”
लेकिन आज बच्चे का रोना बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
सेविका थक चुकी थी। उसने कई बार बच्चे को चुप कराने की कोशिश की, पर कोई फायदा नहीं हुआ।
आखिरकार, गुस्से में उसने कह दिया।
“अब चुप हो जा। नहीं तो तुझे भेड़िये के सामने डाल दूँगी।”
यह बात उसने केवल बच्चे को डराने के लिए कही थी। उसका सचमुच ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था।
लेकिन उसे यह पता नहीं था कि उसकी बात घर के बाहर छिपा कोई और भी सुन रहा था।
झाड़ियों के पीछे छिपा भूखा भेड़िया
घर के बाहर कुछ दूरी पर घनी झाड़ियाँ थीं। उन्हीं झाड़ियों के पीछे एक भूखा भेड़िया छिपा बैठा था।
सुबह से उसे खाने के लिए कुछ नहीं मिला था। वह गाँव के आसपास घूमता रहा, लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला।
भूख से परेशान होकर वह सोच रहा था।
“आज तो लगता है कि मुझे खाली पेट ही जंगल लौटना पड़ेगा।”
तभी उसके कानों में सेविका की आवाज पहुँची।
“चुप हो जा। नहीं तो तुझे भेड़िये के सामने डाल दूँगी।”
भेड़िया यह सुनते ही चौकन्ना हो गया।
उसने अपने कान खड़े किए और खिड़की की दिशा में देखने लगा।
“क्या कहा। बच्चे को भेड़िये के सामने डाल देगी।”
उसकी आँखों में चमक आ गई।
“अरे वाह। आज तो बिना मेहनत किए ही भोजन मिलने वाला है। मुझे किसी शिकार के पीछे भागना भी नहीं पड़ेगा।”
भेड़िया मन ही मन खुश होने लगा।
उसने सोचा कि सेविका कुछ ही देर में बच्चे को बाहर लेकर आएगी। इसलिए वह घर के पास एक सुरक्षित जगह पर बैठकर इंतजार करने लगा।
उसे लगा कि आज उसकी किस्मत चमक गई है।
लेकिन भेड़िया यह नहीं समझ पाया कि सेविका ने वह बात केवल गुस्से में कही थी।
बच्चे ने रोना बंद कर दिया
उधर घर के अंदर सेविका की धमकी सुनकर बच्चा सहम गया।
वह रोते-रोते अचानक चुप हो गया और सेविका से लिपट गया।
सेविका ने राहत की साँस ली।
“अच्छा, अब मेरा बच्चा शांत हो गया। चलो, अब आराम से लेट जाओ।”
उसने बच्चे को प्यार से थपथपाया और सुलाने की कोशिश करने लगी।
कुछ ही देर में घर के अंदर शांति छा गई।
लेकिन बाहर बैठे भेड़िये की परेशानी बढ़ने लगी।
वह सोचने लगा।
“अभी तक बच्चा बाहर क्यों नहीं आया। सेविका ने तो कहा था कि वह उसे मेरे सामने डाल देगी।”
उसने कुछ देर और इंतजार किया।
फिर उसने कान लगाकर सुनने की कोशिश की।
अंदर से न रोने की आवाज आ रही थी, न किसी के बाहर आने की आहट।
भेड़िया बेचैन हो गया।
“यह कैसी बात है। बच्चा रोना बंद कैसे कर सकता है। कहीं सेविका अपना इरादा तो नहीं बदल रही।”
उसने खुद को समझाया कि शायद बच्चा फिर से रोने लगेगा।
इसलिए वह वहीं बैठा रहा।
भेड़िये का इंतजार बढ़ता गया
काफी देर बीत गई।
भेड़िया अब परेशान हो चुका था। उसका पेट भूख से कुलबुला रहा था और इंतजार करना मुश्किल होता जा रहा था।
वह बड़बड़ाया।
“मैं कब तक यहाँ बैठा रहूँ। आखिर अंदर हो क्या रहा है।”
उसने खिड़की की ओर देखा।
उसे लगा कि अगर वह थोड़ा पास जाकर देखे, तो उसे पता चल सकता है कि बच्चा बाहर क्यों नहीं आया।
“बस एक बार अंदर झाँककर देख लेता हूँ। शायद मुझे कोई रास्ता मिल जाए।”
भेड़िया धीरे-धीरे खिड़की के पास पहुँचा।
उसने गर्दन आगे बढ़ाई और खिड़की से अंदर झाँकने लगा।
उसे उम्मीद थी कि सेविका बच्चे को गोद में लिए दिखाई देगी और जल्द ही बाहर आएगी।
लेकिन तभी उसकी नजर सेविका पर पड़ गई।
सेविका ने खिड़की के बाहर भेड़िये को देखा
सेविका बच्चे को सुलाने के बाद उठी ही थी कि उसकी नजर खिड़की की ओर गई।
खिड़की के बाहर एक बड़ा भेड़िया खड़ा था।
उसकी आँखें चमक रही थीं और वह अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था।
सेविका उसे देखकर घबरा गई।
“अरे। सचमुच भेड़िया।”
वह तुरंत खिड़की से पीछे हट गई और उसे बंद कर दिया।
फिर उसने जोर से आवाज लगाई।
“बचाओ। बचाओ। घर के बाहर भेड़िया है।”
उसकी आवाज सुनकर घर के लोग दौड़कर आए।
आसपास के पड़ोसियों ने भी शोर सुना और मदद के लिए पहुँच गए।
कुछ लोग लाठियाँ लेकर बाहर निकले, जबकि दूसरे लोगों ने दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर लीं।
भेड़िया यह सब देखकर घबरा गया।
जिस भोजन की उम्मीद में वह वहाँ बैठा था, वह तो मिला नहीं। उलटे अब लोग उसे पकड़ने के लिए बाहर आ रहे थे।
भेड़िये को अपनी गलती का एहसास हुआ
भेड़िये ने लोगों को अपनी ओर आते देखा, तो वह तुरंत पीछे हट गया।
“अरे बाप रे। यह तो बड़ी मुसीबत हो गई।”
वह तेजी से गाँव से दूर भागने लगा।
भागते हुए वह सोच रहा था।
“मैंने एक बात सुनी और बिना यह जाने कि उसका मतलब क्या था, यहीं बैठकर इंतजार करने लगा। मुझे लगा कि भोजन अपने आप मिल जाएगा। लेकिन अब तो अपनी जान बचाकर भागना पड़ रहा है।”
भेड़िया किसी तरह झाड़ियों से निकलकर जंगल में पहुँच गया।
उस दिन उसे न भोजन मिला और न ही कोई लाभ हुआ। उलटे, उसने बेकार में अपनी जान जोखिम में डाल दी।
उसे समझ आ गया कि केवल किसी बात को सुन लेना और उसके सच होने की उम्मीद कर लेना समझदारी नहीं है।
उधर घर के अंदर सेविका ने बच्चे को प्यार से अपने पास रखा। उसे भी एहसास हुआ कि बच्चे को डराने के लिए भेड़िये की धमकी देना ठीक नहीं था।
बच्चे को चुप कराने के लिए डर का सहारा लेने के बजाय उसे धैर्य और प्यार से समझाना चाहिए था।
उस दिन की घटना ने सेविका और भेड़िये, दोनों को एक सीख दी।
भेड़िये ने अधूरी बात पर भरोसा करके गलती की, जबकि सेविका ने गुस्से में बिना सोचे धमकी दे दी थी। दोनों को अपनी-अपनी गलती समझने का अवसर मिला।
नैतिक कहानी “खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा” के मुख्य पात्र
भेड़िया
भेड़िया कहानी का प्रमुख पात्र है। वह भूखा है और आसानी से भोजन पाने की उम्मीद में सेविका की बात को सच मान लेता है। उसकी जल्दबाजी और लालच उसे मुसीबत में डाल देते हैं।
सेविका
सेविका बच्चे को खाना खिलाने और उसे सुलाने की कोशिश करती है। जब बच्चा लगातार रोता है, तो वह गुस्से में भेड़िये की धमकी दे देती है। बाद में उसे एहसास होता है कि बच्चे को डराने के बजाय धैर्य और प्यार से संभालना चाहिए।
बच्चा
बच्चा कहानी में उस स्थिति को दिखाता है जहाँ छोटे बच्चों को समझने और संभालने के लिए धैर्य की जरूरत होती है। वह भेड़िये की धमकी सुनकर डर जाता है और चुप हो जाता है।
इस नैतिक कहानी से क्या सीख मिलती है
1. अधूरी बात सुनकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
भेड़िये ने सेविका की बात सुनी, लेकिन यह नहीं समझा कि वह केवल बच्चे को डराने के लिए कही गई थी। अधूरी जानकारी के आधार पर निर्णय लेने से नुकसान हो सकता है।
2. लालच में अपनी सुरक्षा को खतरे में नहीं डालना चाहिए।
भेड़िया बिना मेहनत भोजन पाने की उम्मीद में घर के पास रुका रहा। इसी लालच ने उसे लोगों के सामने उजागर कर दिया और उसे भागना पड़ा।
3. गुस्से में सोच-समझकर बोलना चाहिए।
सेविका ने बच्चे को चुप कराने के लिए भेड़िये की धमकी दी। उसके शब्दों ने बच्चे को डरा दिया। यह हमें याद दिलाता है कि गुस्से में कही गई बात दूसरों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
4. किसी बात पर विश्वास करने से पहले उसकी सच्चाई समझनी चाहिए।
भेड़िये ने यह जाँचने की कोशिश नहीं की कि सेविका सचमुच बच्चे को बाहर लाएगी या नहीं। हमें भी सुनी-सुनाई बातों पर तुरंत भरोसा करने के बजाय सही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
5. जल्दबाजी नुकसान पहुँचा सकती है।
भेड़िया धैर्यपूर्वक स्थिति को समझने के बजाय अपनी कल्पना के अनुसार आगे बढ़ता गया। यदि वह अधिक सावधानी बरतता, तो शायद इस मुसीबत में न पड़ता।
6. बच्चों को डराकर अनुशासित करना सही तरीका नहीं है।
सेविका ने बच्चे को भेड़िये से डराया। वास्तविक जीवन में बच्चों को धमकाने के बजाय प्यार, स्पष्ट निर्देश और धैर्य से समझाना अधिक उचित है।
आज के जीवन में इस नैतिक कहानी का महत्व
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी आज के जीवन में भी उपयोगी है, क्योंकि हम अक्सर अधूरी जानकारी, गलतफहमी और जल्दबाजी में निर्णय ले लेते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि कोई बच्चा अपने दोस्तों के बीच किसी बात को आधा सुनकर गलत अर्थ निकाल ले, तो बेवजह झगड़ा हो सकता है। इसी तरह, सोशल मीडिया पर किसी खबर को बिना जाँच साझा करने से गलत जानकारी फैल सकती है। भेड़िये की तरह हमें भी यह समझना चाहिए कि केवल कुछ शब्द सुन लेना पूरी सच्चाई जानने के बराबर नहीं है।
कहानी लालच के बारे में भी महत्वपूर्ण संदेश देती है। भेड़िये को लगा कि उसे बिना प्रयास भोजन मिल जाएगा। इसी उम्मीद में उसने अपने आसपास के खतरे को नजरअंदाज कर दिया। वास्तविक जीवन में भी जब कोई अवसर बहुत आसान या जरूरत से ज्यादा अच्छा दिखाई दे, तो उसके बारे में सोच-विचार करना जरूरी है।
इस कहानी का एक और पहलू बच्चों की परवरिश से जुड़ा है। सेविका ने बच्चे को डराकर चुप कराने की कोशिश की। छोटे बच्चों के लिए ऐसी धमकियाँ डर पैदा कर सकती हैं। माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए बेहतर है कि वे बच्चे की जरूरत समझें, धैर्य रखें और प्यार से उसे शांत करें।
इसलिए कहानी की सीख केवल इतनी नहीं है कि भेड़िये को उसकी चालाकी का परिणाम मिला। यह हमें सही जानकारी पर भरोसा करने, लालच से बचने और अपने शब्दों के प्रभाव को समझने की भी प्रेरणा देती है।
माता-पिता और शिक्षकों के लिए चर्चा प्रश्न
- बच्चा क्यों रो रहा था।
- सेविका ने बच्चे को चुप कराने के लिए क्या-क्या कोशिश की।
- गुस्से में सेविका ने बच्चे से क्या कहा।
- भेड़िये ने सेविका की बात क्यों सुन ली।
- भेड़िये को क्यों लगा कि उसे आसानी से भोजन मिल जाएगा।
- बच्चा चुप हो जाने पर भेड़िया क्यों परेशान हुआ।
- भेड़िया खिड़की के पास क्यों गया।
- सेविका ने भेड़िये को देखकर क्या किया।
- भेड़िये को अपनी गलती का एहसास कैसे हुआ।
- क्या भेड़िये को सेविका की बात पर तुरंत भरोसा करना चाहिए था।
- सेविका बच्चे को डराने के बजाय क्या कर सकती थी।
- गुस्से में बोले गए शब्द दूसरों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
- अगर कोई आपको कोई खबर बताए, तो उसकी सच्चाई जानने के लिए आप क्या करेंगे।
- खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी में भेड़िये की सबसे बड़ी गलती क्या थी।
- खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी से आपको कौन-सी सीख सबसे महत्वपूर्ण लगती है और क्यों।
कठिन शब्दों का अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सेविका | किसी घर में देखभाल या घरेलू काम करने वाली महिला। |
| धमकी | किसी को डराने के लिए कही गई बात। |
| जल्दबाजी | बिना पर्याप्त सोचे जल्दी में काम करना। |
| बेचैन | चिंतित या परेशान महसूस करना। |
| अनुमान | उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बात का अंदाजा लगाना। |
| गलतफहमी | किसी बात को गलत तरीके से समझ लेना। |
संबंधित कहावतें
1. पहले सोचो, फिर बोलो।
सेविका ने गुस्से में बच्चे को धमकी दी। उसे अपने शब्दों के प्रभाव के बारे में सोचना चाहिए था।
2. जल्दबाजी का काम शैतान का।
भेड़िये ने धैर्य से परिस्थिति समझने के बजाय जल्दी परिणाम पाने की उम्मीद की।
3. बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताए।
भेड़िये ने पूरी बात समझे बिना अपनी उम्मीद बना ली और अंत में उसे भागना पड़ा।
बच्चों के लिए गतिविधियाँ
गतिविधि 1: कहानी का अभिनय।
बच्चे भेड़िये, सेविका और बच्चे की भूमिका निभाकर कहानी का छोटा नाटक प्रस्तुत कर सकते हैं। अभिनय के बाद उनसे पूछें कि कौन-सा पात्र किस समय गलत निर्णय लेता है।
गतिविधि 2: सही या गलत।
नीचे दिए गए कथनों को पढ़कर बच्चे बताएँ कि वे सही हैं या गलत।
किसी बात पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई समझना उपयोगी है।
भेड़िये ने सेविका की पूरी बात समझी थी।
सेविका ने बच्चे को चुप कराने के लिए धमकी दी थी।
भेड़िया बिना सोचे भोजन मिलने की उम्मीद करने लगा।
गुस्से में बोले गए शब्द दूसरों को प्रभावित कर सकते हैं।
गतिविधि 3: अगर मैं भेड़िया होता या होती।
बच्चे पाँच से सात वाक्यों में लिखें कि यदि वे भेड़िये की जगह होते, तो सेविका की बात सुनने के बाद क्या करते। क्या वे वहीं रुकते या पहले परिस्थिति को समझने की कोशिश करते।
गतिविधि 4: धमकी के बजाय प्यार भरे शब्द।
बच्चों और बड़ों के साथ चर्चा करें कि जब कोई बच्चा रोता है या कोई बात नहीं मानता, तो उसे डराने के बजाय कौन-से शब्द कहे जा सकते हैं।
उदाहरण के लिए, “मैं देख रहा हूँ कि तुम परेशान हो। आओ, मुझे बताओ कि क्या हुआ।”
गतिविधि 5: अधूरी जानकारी से होने वाली गलतफहमी।
बच्चों को कोई छोटी घटना आधी सुनाएँ और उनसे उसका अर्थ पूछें। फिर पूरी घटना सुनाकर समझाएँ कि अधूरी जानकारी के कारण गलत निष्कर्ष निकल सकता है।
गतिविधि 6: कहानी का नया अंत।
बच्चे कल्पना करें कि भेड़िया खिड़की के पास जाने के बजाय वहाँ से चला जाता है। वे कहानी का नया अंत लिखें और बताएँ कि इससे क्या सीख मिलती है।
नैतिक कहानियों के बारे में
नैतिक कहानियाँ, जिन्हें अंग्रेजी में Moral Stories कहा जाता है, ऐसी कहानियाँ होती हैं जिनमें मनोरंजन के साथ जीवन से जुड़ी कोई उपयोगी सीख भी दी जाती है।
इन कहानियों के पात्र कभी इंसान होते हैं, तो कभी जानवर और पक्षी। उनके अनुभवों और निर्णयों के माध्यम से बच्चों को ईमानदारी, दया, धैर्य, बुद्धिमानी, संतोष और जिम्मेदारी जैसे गुण समझने का अवसर मिलता है।
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा ऐसी ही एक नैतिक कहानी है। इसमें भेड़िया एक अधूरी बात सुनकर यह मान लेता है कि उसे आसानी से भोजन मिल जाएगा। वह अपनी उम्मीद को सच मानकर इंतजार करता है, लेकिन अंत में उसकी योजना असफल हो जाती है।
कहानी यह भी दिखाती है कि गुस्से में कही गई बात का प्रभाव हमारी सोच से अलग हो सकता है। सेविका बच्चे को डराने के लिए धमकी देती है, लेकिन उसकी बात बाहर छिपे भेड़िये को गलत उम्मीद दे देती है।
बच्चों के लिए ऐसी कहानियाँ पढ़ना और उन पर चर्चा करना उपयोगी हो सकता है। माता-पिता और शिक्षक कहानी के पात्रों से जुड़े प्रश्न पूछकर बच्चों को यह सोचने के लिए प्रेरित कर सकते हैं कि कौन-सा निर्णय उचित था और कौन-सा नहीं।
नैतिक कहानियों का उद्देश्य केवल किसी पात्र को अच्छा या बुरा साबित करना नहीं है। उनका बेहतर उपयोग तब होता है जब बच्चे घटनाओं के कारणों और परिणामों को समझते हैं और अपने जीवन में उपयोगी सीख पहचानते हैं।
इस कहानी से मिलने वाली प्रमुख सीख है कि बातों का संदर्भ समझना, लालच से बचना, सोच-समझकर निर्णय लेना और अपने शब्दों के प्रभाव को पहचानना जरूरी है।
हिंदी कथा कोष पर नैतिक कहानियों का उद्देश्य बच्चों और परिवारों के लिए ऐसी सरल, रोचक और उपयोगी कथाएँ प्रस्तुत करना है, जिन्हें पढ़ने के बाद पाठक उनके संदेश पर विचार कर सकें।
FAQ – “खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा” कहानी से जुड़े सामान्य प्रश्न
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी किस बारे में है।
यह एक नैतिक कहानी है जिसमें भूखा भेड़िया सेविका की बात सुनकर बच्चे को भोजन के रूप में पाने की उम्मीद करता है, लेकिन उसकी योजना असफल हो जाती है।
भेड़िये ने सेविका की बात क्यों सुनी।
भेड़िया घर के बाहर छिपा हुआ था। उसने सेविका को बच्चे को भेड़िये के सामने डालने की धमकी देते सुना और उसे सच मान लिया।
सेविका ने बच्चे को भेड़िये की धमकी क्यों दी।
बच्चा लगातार रो रहा था और सेविका उसे चुप कराने की कोशिश में थक गई थी। गुस्से में उसने बच्चे को डराने के लिए यह बात कह दी।
भेड़िया घर के बाहर क्यों रुका रहा।
उसे लगा कि सेविका सचमुच बच्चे को बाहर लाएगी और उसे बिना शिकार किए भोजन मिल जाएगा।
भेड़िये की योजना असफल क्यों हुई।
बच्चा चुप हो गया और सेविका ने उसे बाहर नहीं निकाला। जब भेड़िया खिड़की के पास झाँकने गया, तो सेविका ने उसे देख लिया और गाँव के लोग मदद के लिए आ गए।
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी की मुख्य शिक्षा क्या है।
खूंखार भेड़िया और निडर बच्चा कहानी की मुख्य शिक्षा है कि अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। लालच और जल्दबाजी से बचना चाहिए तथा गुस्से में ऐसे शब्द नहीं बोलने चाहिए जिनसे दूसरों को डर या दुख पहुँचे।




