🐖 सूअर ने दिया ज्ञान | Shepherd & the Pig 👨‍🌾

नैतिक कहानियाँ | Top Moral Stories in Hindi | सूअर ने दिया ज्ञान

बहुत समय पहले की बात है।
हरे-भरे मैदान के बीच एक छोटा-सा चरवाहा रहता था। उसका नाम था गोपाल।
गोपाल हर सुबह सूरज के पहले उठकर अपनी भेड़ों को लेकर उस नीले आसमान तले घास चराने आ जाता।

आस-पास सब कुछ शांत और प्यारा रहता —
भेड़ों के घंटियों की टिंग-टिंग आवाज़, हवा में घास की खुशबू, और कभी-कभी कोई पंछी चिर्र-चिर्र कर उठता।

“बकरी-भैस के झुंड से अलग, हमारी भेड़ें बहुत ही सौम्य हैं,” गोपाल अक्सर मुँह में मुस्कान लिए कहता।
भेड़ें भी घास में मगन, धीरे-धीरे चबाती और कभी-कभी मिलकर एक प्यारा सा बेह! कर देतीं — जैसे कहना चाहती हों, “और दाना दे दो, भैया!”

एक सुबह, जब सूरज की पहली किरणें घास पर मोतियों सी चमक फैला रही थीं, झाड़ियों के बीच से अचानक एक मोटा-तगड़ा सूअर बाहर निकल आया!
वो ज़मीन पर लुढ़कता हुआ, खुरों से मिट्टी उछालता हुआ मैदान की ओर आया।

सूअर ने दिया ज्ञान

गोपाल की आँखें चमक उठीं। उसने सोचा, “अरे वाह! कितना बड़ा सूअर है — इसे कसाई के पास ले जाऊँ, अच्छा पैसा मिलेगा!”
ठीक वैसे ही उसने झट से सूअर को पकड़ लिया। सूअर समझ गया कि अब मुश्किल में है — और जोर-जोर से चिल्लाने लगा,
“घूँ—घूँ—घूँ! छोड़ो मुझे! बचाओ—बचाओ!”

गोपाल ने उससे दोनों टांगे रस्सी से बाँध दीं, पीठ पर उठा लिया और कसाई के रास्ते चल पड़ा।

मैदान में जो भेड़ें चुपचाप घास चर रही थीं, वे राह तकती रह गईं।
उनमें से एक हिम्मती भेड़, जिसका नाम बुल्ली था, थोड़ी दूर चल कर गोपाल के पीछे-पीछे गई और सूअर से पूछ बैठी,
“अरे भाई सूअर! तुम इतना चिल्ला क्यों रहे हो? हमें भी कभी-कभी गोपाल पकड़ लेता है, पर हम तो ऐसे चीखते नहीं। तुम बेकार में इतना हंगामा क्यों कर रहे हो?”

सूअर ने दिया ज्ञान

सूअर का चेहरा सख्त हो गया। उसने साँस ली और गुस्से से बोला,
“तुम्हें क्या मालूम, मूर्ख भेड़! जब गोपाल तुम्हें ले जाता है, तो वह तुम्हारा ऊन काटकर तुम्हें वापस छोड़ देता है—तुम्हारी जान पर तब तक कोई हाथ नहीं लगता! पर मुझे… मुझे वह मार डालेगा। मेरे मांस के लिए वह मुझे ले जा रहा है। तुम नहीं जानती कि मेरे लिए यह कितनी बड़ी बात है!”

भेड़ें साथ में खामोश हो गईं। उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि हर किसी का डर और उसकी वजह अलग होती है। बुल्ली धीरे-धीरे पीछे हटकर सोची — “हम्म… शायद मैं ही कुछ समझना छोड़ रही थी।”

सूअर की चीख ने सबको चुप कर दिया — गोपाल भी थोड़ा रुक कर उसे देखने लगा।
उसने सोचा, “मैंने भेंड़ों के लिए जो किया है, वो सूअर के लिए भी जरूरी है क्या?”
गोपाल ने सूअर की आँखों में डर देखा और थोड़ा शर्मिंदा सा हो गया। उसने रस्सी ढीली की और कहा, “ठीक है—तुम आज जाओ।”

सूअर ने दिया ज्ञान

सूअर ने साँस भरते हुए कहा, “धन्यवाद! हर प्राणी की पीड़ा अलग होती है। जो तुम्हारे लिए छोटी सी बात है, किसी और के लिए बहुत बड़ी हो सकती है।”

भेड़ें भी समझ गईं कि बोलने से पहले किसी की जगह खड़े होकर सोचना चाहिए। बुल्ली ने सभी भेड़ों से कहा,
“हमें दूसरों के दर्द पर हँसने या उन्हें तंग करने की बजाय उनकी तकलीफ समझनी चाहिए।”

उस दिन के बाद गोपाल और भेड़ें दोनों ज़्यादा दयालु और समझदार हो गए।
गोपाल ने वादा किया कि वह अब हर जानवर की कद्र करेगा और पहले से ज़्यादा सोच समझकर काम करेगा।
और भेड़ों ने भी सीखा कि दुसरे का दुख कभी छोटा नहीं होता — उसे समझना ज़रूरी है।

आशा है कि आपको यह रोचक कथा (सूअर ने दिया ज्ञान) पढ़कर आनंद आया होगा। हमारे होम पेज (Home) पर आपको कथाओं का ऐसा अनोखा संग्रह मिलेगा, जहाँ हर मनःस्थिति और हर आयु के लिए कुछ न कुछ विशेष सहेजा गया है। यहाँ प्रेरणादायी प्रसंग हैं जो जीवन को नई दिशा देते हैं, हास्य से परिपूर्ण कहानियाँ हैं जो चेहरे पर मुस्कान बिखेर देती हैं, कठिन समय में संबल देने वाली प्रेरक कथाएँ हैं, और बच्चों के लिए ऐसी नैतिक गाथाएँ भी जो उनके चरित्र और सोच को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। कुछ कथाएँ आपको बचपन की मासूम स्मृतियों में ले जाएँगी, तो कुछ आपके विचारों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए विवश करेंगी। यह संग्रह मात्र कहानियों का समूह नहीं, बल्कि एक यात्रा है—कल्पनाओं को उड़ान देने वाली, जीवन में सकारात्मकता का संचार करने वाली और हर पीढ़ी को मानवीय मूल्यों से संपन्न बनाने वाली। यहाँ हर पाठक के लिए कुछ अनोखा और अमूल्य निहित है।

Scroll to Top