ज्योतिषी की भूल | Motivational Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा-सा शांत गाँव था। चारों तरफ हरे-भरे खेत, मिट्टी की पगडंडियाँ, गायों की घंटियों की मधुर झंकार, और रात में आसमान में चमकते अनगिनत तारे — मानो धरती और आकाश का संगम वहीं होता हो। इसी गाँव में एक प्रसिद्ध ज्योतिषी रहता था। लोग कहते थे कि वह तारों की चाल देखकर भविष्य का सटीक अनुमान लगा सकता है।
उसकी शोहरत दूर-दूर तक फैली हुई थी। गाँव का कोई भी व्यक्ति अगर किसी परेशानी में होता, तो सबसे पहले उसी के पास जाता। किसान पूछते, “पंडित जी, इस बार बारिश कैसी होगी?” व्यापारी पूछते, “कौन-सा दिन सौदे के लिए शुभ रहेगा?” और जो युवक शादी की सोचते, वे पूछते, “मेरी किस्मत में कौन-सी कन्या है?”
ज्योतिषी सबको गंभीर चेहरे से देखता, आसमान की ओर निगाहें उठाता और कहता, “तारे सब बताते हैं… बस देखने की समझ चाहिए।”
उसका आत्मविश्वास इतना था कि कभी-कभी वह खुद को भविष्य का ज्ञाता समझ बैठता। उसे यकीन था कि वह तारों की चाल समझ ले तो दुनिया की हर समस्या सुलझा सकता है।
लेकिन एक कमी थी — उसकी नज़रें हमेशा आसमान में रहतीं, ज़मीन पर नहीं।
वह चलता था, तो ऊपर देखता था। बात करता था, तो ऊपर देखता था। मानो धरती की चीज़ें उसके लिए नगण्य थीं।
एक शाम की बात है। हवा में ठंडक घुल चुकी थी। दूर पहाड़ों के पीछे सूरज ढल चुका था और आसमान तारों की चादर से ढक गया था। ज्योतिषी अपने घर लौट रहा था, पर उसकी निगाहें, हमेशा की तरह, आसमान में टिकी थीं। वह सोच रहा था —
“वह जो उत्तरी तारा है… उसकी चाल थोड़ी बदली है… इसका मतलब अगले महीने कुछ बड़ा होने वाला है।”
ज्योतिषी की भूल
वह चलते-चलते खुद से बुदबुदा रहा था। तभी उसके पैर के आगे सड़क पर एक गहरा गड्ढा आया — बारिश का पानी उसमें जमा था, कीचड़ भी था। लेकिन उसकी नज़र ऊपर थी।
अगले ही पल — छपाक!
वह सीधा गड्ढे में जा गिरा।
“अरे! बचाओ! कोई है क्या?” वह चिल्लाया।
पर वहाँ आस-पास कोई नहीं था। पानी ठंडा था, कीचड़ उसकी कमर तक चढ़ गया था। उसने बाहर निकलने की कोशिश की, पर हर बार उसका पैर फिसल जाता। कपड़े कीचड़ से सने, चेहरा गंदगी से लथपथ। उसने एक बार फिर ज़ोर से पुकारा —
“अरे ओ भाई! कोई है? मैं गिर गया हूँ!”
पास के खेत में कुछ किसान काम कर रहे थे। उन्होंने आवाज़ सुनी और दौड़ते हुए आ गए। जब उन्होंने देखा कि ज्योतिषी गड्ढे में फँसा है, तो हँसी नहीं रोक पाए।
एक किसान बोला, “अरे देखो! ये तो वही पंडित जी हैं जो तारे देखकर सबका भविष्य बताते हैं!”
दूसरा बोला, “आज खुद का वर्तमान ही नहीं देख पाए!”
सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। किसी ने रस्सी फेंकी, किसी ने हाथ बढ़ाया, और आखिरकार उन्होंने ज्योतिषी को बाहर निकाल लिया।
ज्योतिषी की भूल
ज्योतिषी अब सिर से पाँव तक कीचड़ में लथपथ खड़ा था। उसकी दाढ़ी से पानी टपक रहा था, आँखें झुकी हुईं। शर्म से बोल तक नहीं पा रहा था।
तभी गाँव के एक बूढ़े व्यक्ति ने आगे बढ़कर उसके कंधे पर हाथ रखा और शांत स्वर में बोला —
“बेटा, आसमान में झाँककर भविष्य तो सब देखना चाहते हैं, पर जीवन की असली समझ उसी में है जो पैरों के नीचे की ज़मीन को भी देखे। अगर आज की राह नहीं देखोगे, तो कल का रास्ता खुद धुंधला हो जाएगा।”
ज्योतिषी ने उस वृद्ध की ओर देखा — उसकी आँखों में सच्चाई झलक रही थी। उसे महसूस हुआ कि वह अपने ज्ञान के अहंकार में इतना खो गया था कि वर्तमान की मिट्टी को भूल गया था।
उस दिन के बाद, ज्योतिषी में एक बड़ा परिवर्तन आया। वह अब चलते समय ऊपर नहीं, बल्कि सामने और नीचे देखता। जब लोग उससे भविष्य पूछने आते, तो वह मुस्कराकर कहता,
“भविष्य आसमान में नहीं, आज के कर्मों में लिखा होता है। अगर आज सही चलो, तो कल खुद सुंदर बन जाता है।”
और तब से गाँव के लोग उसे “वास्तविक ज्ञानी पंडित” कहने लगे। क्योंकि अब वह केवल तारों की नहीं, बल्कि ज़िन्दगी की भाषा समझने लगा था।
शिक्षा:
भविष्य की चिंता करने से बेहतर है वर्तमान को समझना और सही कर्म करना। जो आज की राह नहीं देखता, वह कल की मंज़िल कभी नहीं पा सकता।




