प्रेरणादायक कहानियाँ | Motivational Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। रोम के विशाल साम्राज्य में एक युवक रहता था — उसका नाम था एन्ड्रोक्लीज़। वह एक गुलाम था, लेकिन दिल का बहुत नेक, मेहनती और सच्चा इंसान। पर अफसोस! उसका स्वामी यानी रोम का सम्राट एक निर्दयी और क्रूर व्यक्ति था।
एन्ड्रोक्लीज़ दिन-रात काम करता, फिर भी उसे ठीक से खाना नहीं दिया जाता। अगर वह थककर बैठ भी जाए, तो उसके ऊपर कोड़े बरसाए जाते। धूप में झुलसता, ठंड में काँपता — उसकी जिंदगी हर पल पीड़ा से भरी थी।
एक रात जब बाकी सब सो गए, एन्ड्रोक्लीज़ चुपचाप उठा, आसमान की ओर देखा और बुदबुदाया —
“हे ईश्वर, अब मुझसे और नहीं सहा जाता। अब मुझे आज़ाद होना ही होगा।”
वह भागता गया, भागता गया — जब तक कि वह एक घने जंगल में नहीं पहुँच गया। पेड़ इतने ऊँचे थे कि सूरज की किरणें तक मुश्किल से धरती तक आतीं। एन्ड्रोक्लीज़ ने एक गुफा देखी और उसमें जा छिपा। वह थक चुका था, पर आज लंबे समय बाद उसने राहत की सांस ली।
“अब कोई मुझे नहीं ढूंढ पाएगा…” उसने सोचा।
लेकिन वह सुकून ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाया।
अचानक गुफा के बाहर से झाड़ियों में खड़खड़ाहट हुई। और अगले ही पल —
एक विशाल शेर वहाँ आ खड़ा हुआ!
एन्ड्रोक्लीज़ का चेहरा पीला पड़ गया। वह दीवार से लग गया। “अब तो मैं गया…” उसने सोचा।
पर तभी उसे कुछ अजीब लगा।
शेर हमला करने नहीं आया। वह गुर्रा तो रहा था, लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, दर्द था। वह बार-बार अपना पंजा उठाकर चाट रहा था।
एन्ड्रोक्लीज़ ने गौर से देखा — उसके पंजे में एक बड़ा नुकीला काँटा गड़ा हुआ था।
शेर दर्द से कराह रहा था।
अब एन्ड्रोक्लीज़ के भीतर का डर धीरे-धीरे पिघल गया।
वह धीरे से बोला, “डरो मत… मैं मदद करूँगा।”
वह बहुत सावधानी से शेर के पास गया, उसका पंजा पकड़ा और काँटा निकाल दिया।
शेर एक पल के लिए दहाड़ा, लेकिन फिर शांत हो गया। उसने एन्ड्रोक्लीज़ के हाथ को चाटा — जैसे धन्यवाद कह रहा हो।
उस दिन से दोनों के बीच एक अनोखी दोस्ती शुरू हुई।
एन्ड्रोक्लीज़ रोज़ शेर के लिए पानी लाता, पत्तों से पट्टी बाँधता और उससे बातें करता।
शेर भी उसे कभी नुकसान नहीं पहुँचाता — उल्टा उसके पास बैठकर शांत हो जाता।
Motivational Story in Hindi
कुछ दिनों बाद शेर पूरी तरह ठीक हो गया। एक दिन वह गुफा से बाहर निकला और जाते-जाते एन्ड्रोक्लीज़ के हाथ को चाट गया — मानो कह रहा हो, “धन्यवाद, दोस्त।”
इस बीच, रोम में सम्राट के सैनिक एन्ड्रोक्लीज़ की खोज में लगे थे। आखिर एक दिन उन्होंने उसे जंगल से पकड़ लिया और सम्राट के सामने लाकर खड़ा कर दिया।
सम्राट गरजकर बोला,
“भागने की सज़ा मौत है! जनता को उदाहरण दिखाओ — इसे अखाड़े में शेर के सामने डाला जाए!”
पूरे रोम में यह खबर फैल गई।
अगले दिन हजारों लोग अखाड़े में इकट्ठे हुए — देखने के लिए कि एक गुलाम का अंत कैसे होता है।
मंच पर सम्राट स्वयं बैठा था।
शेर को कई दिनों से भूखा रखा गया था। जैसे ही पिंजरा खोला गया, शेर दहाड़ता हुआ एन्ड्रोक्लीज़ की ओर दौड़ा।
भीड़ में सन्नाटा छा गया। कोई सांस तक नहीं ले रहा था।
लेकिन तभी —
कुछ अद्भुत हुआ।
शेर ने एन्ड्रोक्लीज़ के पास पहुँचकर उसे फाड़ा नहीं, बल्कि उसके हाथ को चाटने लगा!
भीड़ हैरान रह गई।
सम्राट की आँखें फैल गईं।
“यह क्या!” वह बोला। “क्या तुम इस शेर को जानते हो?”
एन्ड्रोक्लीज़ ने शांत स्वर में सारी कहानी सुना दी —
कैसे उसने जंगल में इस शेर की जान बचाई थी, कैसे उसकी सेवा की थी।
फिर उसने सम्राट की ओर देखा और कहा,
“महाराज, मैंने इस शेर की कुछ ही दिनों सेवा की और उसने मुझे पहचान लिया…
पर मैंने आपको वर्षों तक निष्ठा से सेवा दी, फिर भी आपने मुझे मृत्यु का दंड दे दिया।”
सम्राट के दिल पर जैसे किसी ने चोट की। उसकी आँखें नम हो गईं।
वह उठा और ऊँचे स्वर में बोला,
“एन्ड्रोक्लीज़ को तुरंत आज़ाद किया जाए! और इस वफादार शेर को भी जंगल में छोड़ दिया जाए!”
भीड़ तालियों से गूंज उठी।
एन्ड्रोक्लीज़ और शेर ने एक-दूसरे की ओर देखा — जैसे कह रहे हों, “फिर मिलेंगे, दोस्त।”
फिर दोनों अपने-अपने रास्ते चल पड़े — आज़ाद, गर्वित और हमेशा के लिए यादगार।
शिक्षा:
सच्ची दया और भलाई कभी व्यर्थ नहीं जाती। जो दूसरों की मदद करता है, उसे जीवन में किसी न किसी रूप में उसका प्रतिफल अवश्य मिलता है।




