परियों की कहानियाँ | Fairy Tales Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में एक प्यारी और मासूम लड़की अपनी माँ और दादी के साथ रहती थी। उसकी मुस्कान में ऐसी मिठास थी कि जो भी उसे देखता, उसका दिल पिघल जाता। वह दयालु थी, समझदार थी, और सबकी लाडली भी। लेकिन सबसे ज़्यादा उसे प्यार करती थी — उसकी दादी।
एक दिन दादी ने अपने हाथों से उसके लिए लाल रंग की एक सुंदर सी टोपी और ओढ़नी सिल दी। वह इतनी प्यारी थी कि लड़की उसे हर जगह पहनने लगी। धीरे-धीरे गाँव में सब लोग उसे “छोटी लाल टोपी” कहने लगे।
एक सुबह उसकी माँ ने एक टोकरी में ताज़ा फल, मक्खन, ब्रेड और केक रखे।
“बेटी,” माँ ने कहा, “तुम्हारी दादी बीमार हैं। यह टोकरी उन्हें दे आओ। लेकिन याद रखना — रास्ते में किसी अजनबी से बात मत करना, और सीधे रास्ते से जाना।”
छोटी लाल टोपी मुस्कुराई और बोली, “हाँ माँ, मैं ध्यान रखूँगी।”
माँ ने उसके माथे पर प्यार से चूमा और कहा, “शाबाश मेरी समझदार बच्ची।”
वह टोकरी उठाकर जंगल के रास्ते निकल पड़ी। चारों तरफ़ हरियाली थी, पक्षी चहक रहे थे, और सूरज की सुनहरी किरणें पत्तों के बीच से झाँक रही थीं। रास्ता इतना सुंदर था कि उसका मन खिल उठा।
थोड़ा आगे जाकर उसे रास्ते के किनारे रंग-बिरंगे फूल दिखे। उसने सोचा,
“अगर मैं दादी के लिए कुछ फूल तोड़ लूँ, तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा।”
वह रास्ते से थोड़ी दूर हटकर फूल तोड़ने लगी।
Fairy Tales Story in Hindi
उसी समय एक भूखा और चालाक भेड़िया पास के पेड़ के पीछे से उसे देख रहा था। उसकी आँखों में शरारत चमक रही थी।
“हूँ… यह नन्ही लड़की और उसकी दादी दोनों मेरा अच्छा खाना बन सकती हैं!” उसने मन में सोचा।
वह मुस्कुराता हुआ लड़की के पास आया।
“अरे प्यारी बच्ची!” उसने मीठी आवाज़ में कहा, “तुम इतनी प्यारी लग रही हो! कहाँ जा रही हो?”
छोटी लाल टोपी ने मासूमियत से कहा, “मैं अपनी दादी के घर जा रही हूँ। वो बीमार हैं, मैं उन्हें खाना और फूल देने जा रही हूँ।”
भेड़िए ने पूछा, “ओह! और तुम्हारी दादी कहाँ रहती हैं?”
लड़की बोली, “इस जंगल के पार, तीन बड़े ओक के पेड़ों के पास, फूलों के बगीचे वाले छोटे से घर में।”
भेड़िए की चालाकी जागी।
“अगर मैं शॉर्टकट से जाऊँ, तो मैं पहले पहुँच जाऊँगा!” उसने मन ही मन कहा और दौड़ पड़ा।
थोड़ी देर बाद वह दादी के घर पहुँचा।
“कौन है?” दादी ने पूछा।
भेड़िया मीठी आवाज़ में बोला, “मैं हूँ, छोटी लाल टोपी। आपके लिए खाना और फूल लाई हूँ।”
दादी को शक नहीं हुआ। जैसे ही उन्होंने दरवाज़ा खोला, भेड़िए ने छलाँग लगाई, दादी को पकड़कर अलमारी में बंद कर दिया और खुद दादी की नाइटी और टोपी पहनकर बिस्तर पर लेट गया।
कुछ देर बाद छोटी लाल टोपी वहाँ पहुँची। उसने दरवाज़ा खटखटाया।
“दादी, मैं आ गई!”
अंदर से भेड़िए ने पतली आवाज़ में कहा, “अंदर आ जाओ, बच्ची।”
Fairy Tales Story in Hindi
लड़की अंदर गई, लेकिन कुछ अजीब लगा। उसने दादी को देखा — चेहरा थोड़ा बदला-बदला लग रहा था।
“दादी,” उसने धीरे से कहा, “आपके कान कितने बड़े हैं!”
“ताकि मैं तुम्हें अच्छे से सुन सकूँ, मेरी बच्ची।”
“दादी, आपकी आँखें कितनी बड़ी हैं!”
“ताकि मैं तुम्हें साफ़ देख सकूँ।”
“दादी, आपके दाँत कितने बड़े हैं!”
“ताकि मैं तुम्हें अच्छी तरह… खा सकूँ!”
भेड़िया अचानक बिस्तर से कूदा और लड़की की ओर झपटा!
छोटी लाल टोपी ज़ोर से चीखी — “बचाओ!”
इसी बीच जंगल में गश्त कर रहा एक शिकारी वहाँ से गुज़र रहा था। उसने आवाज़ सुनी, दरवाज़ा तोड़ा और अंदर भागा।
उसने देखा — भेड़िया लड़की पर झपटा हुआ है!
शिकारी ने भेड़िए को पकड़ लिया, उसे रस्सी से बाँधा और अलमारी खोली। अंदर से दादी घबराई हुई बाहर निकलीं।
छोटी लाल टोपी ने दादी को गले लगाया और रोते हुए कहा, “मुझे माफ़ कर दीजिए, दादी… मैंने माँ की बात नहीं मानी।”
दादी ने उसके सिर पर हाथ रखा, “कोई बात नहीं, मेरी बच्ची। अब तुमने सबक सीख लिया।”
शिकारी को दोनों ने धन्यवाद दिया।
छोटी लाल टोपी ने दादी को खाना खिलाया, फूल दिए, और सबने मिलकर हँसी-खुशी खाना खाया।
उस दिन के बाद छोटी लाल टोपी ने कभी किसी अजनबी से बात नहीं की और हमेशा सीधे रास्ते से ही घर गई।
शिक्षा:
हमेशा अपने बड़ों की बात माननी चाहिए। अजनबियों पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, और अनुशासन ही हमें सुरक्षित रखता है।




