परियों की कहानियाँ | Hindi Fairy Tales Stories
बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर, मासूम और दयालु लड़की रहती थी — उसका नाम था सिंड्रेला। बचपन में ही उसकी माँ गुजर गई थी। उसके पिता ने कुछ साल बाद दूसरी शादी की, उम्मीद थी कि सिंड्रेला को नई माँ का स्नेह मिलेगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था…
उसकी सौतेली माँ और दो सौतेली बहनें बाहर से तो बहुत सभ्य लगती थीं, लेकिन भीतर से बेहद क्रूर और घमंडी थीं। वे सिंड्रेला से सारे काम करवातीं — झाड़ू लगाना, बर्तन माँजना, कपड़े धोना, खाना बनाना — और खुद आराम से रहतीं। बेचारी सिंड्रेला कभी शिकायत नहीं करती थी। वह हमेशा मुस्कुराती और ईश्वर पर भरोसा रखती।
रात को वह महल के कोने में बने पुराने, धूल भरे कमरे में सोती थी। कभी-कभी तो उसकी आँखों में आँसू भर आते, पर फिर भी वह अपने मन को कहती — “एक दिन सब ठीक होगा।”
फिर एक दिन पूरे राज्य में एक बड़ी खबर फैली — राजा अपने पुत्र, राजकुमार के लिए एक भव्य नृत्य समारोह (बॉल) रखने जा रहे हैं। राज्य की हर सुंदर युवती को उसमें आमंत्रित किया गया ताकि राजकुमार अपनी दुल्हन चुन सके।
सिंड्रेला की सौतेली बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे नए कपड़े, गहने और इत्र लेकर सजने-संवरने लगीं। सिंड्रेला ने भी हिम्मत जुटाकर पूछा, “क्या मैं भी उस बॉल में जा सकती हूँ?”
सौतेली माँ हँसकर बोली, “तुम? उस हाल में? पहले ये सारे काम खत्म करो, फिर सोचेंगे।”
फिर उसने इतने काम दे दिए कि बेचारी सिंड्रेला के पास जाने का समय ही नहीं बचा। जब सब महल चले गए, तो सिंड्रेला अकेली बैठकर रोने लगी।
तभी कमरे में एक चमकदार रोशनी फैली और एक जादुई परी माँ प्रकट हुई। उसके चेहरे पर दया थी। वह मुस्कुराकर बोली,
“मत रो, बेटी। मैं तुम्हारी मदद करने आई हूँ।”
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उसने अपनी जादू की छड़ी हिलाई —
एक साधारण कद्दू पल भर में सुनहरे रथ में बदल गया,
छह चूहे घोड़ों में बदल गए,
और सिंड्रेला की पुरानी फटी ड्रेस बदल गई चमकदार नीले गाउन में।
उसके पैरों में नाज़ुक काँच की चप्पलें चमकने लगीं।
परी माँ ने प्यार से कहा, “अब जाओ और अपने सपने पूरे करो। लेकिन याद रखना, ये जादू केवल रात के बारह बजे तक चलेगा। उसके बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा।”
सिंड्रेला ने आभार में सिर झुकाया और रथ में बैठकर महल पहुँच गई।
जब वह महल में दाखिल हुई, तो हर कोई उसकी सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध रह गया। राजकुमार ने जैसे ही उसे देखा, बस उसी पल समझ गया — यही है वो लड़की, जिसका वह इंतज़ार कर रहा था।
उन्होंने साथ में नृत्य किया, हँसे, बातें कीं — और राजकुमार ने पहली बार महसूस किया कि असली सुंदरता सादगी और दया में होती है।
लेकिन समय जैसे उड़ने लगा। घड़ी की सूइयाँ धीरे-धीरे बारह की ओर बढ़ने लगीं।
जैसे ही घड़ी ने बारह बजाए, सिंड्रेला घबरा गई —
“हे भगवान! जादू खत्म होने वाला है!”
वह भागी, सीढ़ियों से नीचे दौड़ी, और उसी हड़बड़ी में उसकी एक काँच की चप्पल गिर गई।
राजकुमार पीछे से पुकारता रह गया — लेकिन वह जा चुकी थी।
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अगले दिन पूरे राज्य में हाहाकार मच गया — राजकुमार ने फरमान जारी किया:
“जिस लड़की के पैर में यह काँच की चप्पल सही बैठेगी, वही मेरी दुल्हन बनेगी।”
राजकुमार ने हर घर जाकर चप्पल पहनवाई — लेकिन किसी के पैर में नहीं आई।
जब वह सिंड्रेला के घर पहुँचा, तो उसकी सौतेली बहनों ने खूब कोशिश की, लेकिन उनके पैर चप्पल से बड़े थे।
राजकुमार ने कहा, “क्या इस घर में कोई और लड़की है?”
सौतेली माँ झिझकी, “बस एक नौकरानी है… वह नहीं योग्य है।”
राजकुमार ने दृढ़ता से कहा, “उसे भी बुलाओ।”
सिंड्रेला आई, झुकी, और जैसे ही उसने चप्पल पहनी — वह बिल्कुल फिट आई!
राजकुमार मुस्कुरा उठा — “यही है वो!”
फिर जादुई रोशनी फैली, सिंड्रेला की पुरानी पोशाक फिर से चमकदार गाउन में बदल गई। सब हैरान रह गए।
राजकुमार ने उसका हाथ थामा और कहा, “क्या तुम मुझसे विवाह करोगी?”
सिंड्रेला की आँखों में खुशी के आँसू थे — “हाँ, राजकुमार।”
जल्द ही उनका विवाह हुआ। सिंड्रेला रानी बन गई, लेकिन उसने कभी अपनी दयालुता और विनम्रता नहीं छोड़ी।
वह सबके साथ प्यार से पेश आती और जिनके साथ उसने दुख झेले, उन्हें भी माफ़ कर दिया।
और इस तरह, वह सच्ची रानी बनी — दिल की रानी।
शिक्षा:
सच्ची सुंदरता और सफलता दया, धैर्य और सच्चे मन से मिलती है। अच्छा करने वाला अंत में हमेशा जीतता है।




