🐘 हाथी और चींटियाँ | Ants & Elephant 🐜

लघु कथाएँ | Short Stories in Hindi | Hindi Short Motivational Stories

एक बार की बात है, एक घने और हरियाले जंगल में “गजेंद्र” नाम का एक बहुत बड़ा और बलवान हाथी रहता था। उसका शरीर विशाल था, आवाज़ गरज की तरह, और चाल ऐसी कि ज़मीन हिल जाए। लेकिन जितना वह ताकतवर था, उतना ही घमंडी भी। उसे लगता था कि इस जंगल में उससे बड़ा और शक्तिशाली कोई नहीं। अपनी ताकत के नशे में वह छोटे जानवरों को परेशान करना, उन्हें डराना, और मस्ती-मजाक के नाम पर सताना अपना शौक समझता था।

जब भी वह जंगल में टहलता, उसकी भारी टाँगों से छोटे-छोटे चींटियों के घर — उनके मिट्टी के बिल — चकनाचूर हो जाते। बेचारी चींटियाँ बार-बार मेहनत कर अपने घर बनातीं, और वह हर बार उन्हें रौंद देता। लेकिन उसे कभी ज़रा भी अफ़सोस नहीं होता।

एक दिन दोपहर में, जब धूप तेज़ थी, गजेंद्र झील के किनारे पानी पीने गया। तभी उसने देखा — झील के पास एक झुंड चींटियों का कतार बनाकर पानी पीने आया है।
हाथी ने मुस्कुराते हुए सोचा, “चलो, ज़रा इन छोटे कीड़ों से मज़ाक कर लेते हैं।”
उसने अपनी सूंड से ठंडा पानी भरकर पूरे झुंड पर छिड़क दिया। बेचारी चींटियाँ बिखर गईं, कुछ तो पानी में बह भी गईं।
वे कांपते हुए बोलीं, “हाथी भाई! हमसे क्या दुश्मनी है? हमने तो तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ा।”

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हाथी ने ज़ोर से हँसते हुए कहा, “तुम सब तो मेरे पैरों तले की धूल हो! जाओ, जहां जाना है। तुम्हारे जैसे नन्हों का जंगल में कोई मोल नहीं!”

चींटियाँ गुस्से से कांप उठीं, पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। वे चुपचाप वहाँ से चली गईं, लेकिन मन में उन्होंने ठान लिया — “अब इसे सबक सिखाना ही पड़ेगा।”

अगली सुबह, जब गजेंद्र अपने पेड़ के नीचे ठंडी हवा में आराम से सो रहा था, तभी सैकड़ों चींटियाँ वहाँ पहुँच गईं।
उनकी रानी बोली, “अब समय आ गया है इसे इसके अहंकार का फल चखाने का।”
और देखते ही देखते, सारी चींटियाँ उसके विशाल शरीर पर चढ़ गईं — कोई उसकी सूंड में घुस गई, कोई कानों में, कोई उसकी आँखों के पास।
वे सब एक साथ उसे काटने लगीं।

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हाथी दर्द से चिल्लाने लगा, “आह! ओह! बचाओ! कौन हो तुम लोग?”
वह पागल होकर इधर-उधर भागने लगा, ज़मीन पर सूंड पटकने लगा, पर चींटियाँ इतनी छोटी थीं कि वह उन्हें हटा ही नहीं पा रहा था।
कुछ देर बाद जब वह पूरी तरह थक गया, तो ज़मीन पर गिर पड़ा और दया की भीख माँगने लगा —
“ओ छोटी-छोटी चींटियों! मुझे माफ कर दो। मैं समझ गया कि ताकतवर होना सब कुछ नहीं होता। मैं फिर कभी किसी को तंग नहीं करूँगा।”

चींटियों की रानी पास आई और बोली,
“हाथी, हम छोटे ज़रूर हैं, पर जब मिलजुलकर रहते हैं, तो बड़े से बड़े को भी सबक सिखा सकते हैं। याद रखो, किसी की ताकत का मज़ाक मत उड़ाओ, क्योंकि सबकी अपनी कीमत होती है।”

हाथी ने शर्म से सिर झुका लिया। उसने वादा किया कि अब वह कभी किसी छोटे जीव को नुकसान नहीं पहुँचाएगा।
उस दिन के बाद वह जंगल का सबसे दयालु प्राणी बन गया। अब वही हाथी, जो कभी दूसरों को डराता था, सबका रक्षक बन गया।

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