नैतिक कहानियाँ | Small Moral Stories in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक गरीब लेकिन ईमानदार किसान रहता था। उसका जीवन कठिनाइयों से भरा था, पर वह कभी हार नहीं मानता था। सुबह सूरज उगने से पहले ही वह उठ जाता, बैलगाड़ी तैयार करता और अपने खेतों में काम करने चला जाता। दिनभर पसीना बहाकर वह अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाता।
किसान के चार बेटे थे। वह उनसे बहुत प्यार करता था, लेकिन एक बात उसे हमेशा परेशान करती थी — उसके बेटे मेहनत से कोसों दूर थे। चारों दिनभर गाँव की चौपाल पर बैठकर बातें करते, खेलते-कूदते या बेकार घूमते रहते। न खेती में रुचि, न घर के कामों में मदद।
किसान अक्सर समझाता,
“बेटों! खेती ही हमारी असली पूँजी है। अगर तुम मेहनत करोगे तो जीवन भर सुखी रहोगे।”
लेकिन बेटे हँसकर टाल देते और कहते,
“अरे बाबा, अब मेहनत करने का ज़माना नहीं रहा। हमें भी कोई आसान रास्ता दिखाइए जिससे धन आ जाए।”
किसान यह सुनकर बहुत दुःखी हो जाता। धीरे-धीरे उसकी उम्र ढलने लगी। चेहरे की झुर्रियाँ और थका शरीर अब उसकी मेहनत की गवाही देने लगे। वह जानता था कि अब उसके पास अधिक समय नहीं बचा। उसने सोचा कि अगर बेटों को सही रास्ता नहीं दिखाया, तो वे आलस और ग़रीबी में ही जीवन बर्बाद कर देंगे।
Small Moral Stories in Hindi
एक रात किसान ने अपने बेटों को अपने पास बुलाया। उसकी आँखों में गहरी थकान थी, लेकिन स्वर में दृढ़ता थी। उसने कहा—
“बेटों! मेरी उम्र अब ज़्यादा नहीं है। मैं तुम्हें एक रहस्य बताना चाहता हूँ। हमारे खेत में बहुत सारा सोना दबा हुआ है। मेरे जाने के बाद तुम लोग पूरे खेत को गहराई तक खोदना। तुम्हें खज़ाना ज़रूर मिलेगा।”
बेटों की आँखें चमक उठीं। उन्हें लगा कि अब उनकी किस्मत खुलने वाली है। पिता की बात सुनकर वे मन ही मन खुश हो गए—“वाह! अब हमें मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, बस सोना निकालेंगे और मौज करेंगे।”
कुछ ही समय बाद किसान का निधन हो गया। बेटों ने जैसे-तैसे अंतिम संस्कार किया, लेकिन उनके मन में केवल एक ही बात घूम रही थी—खेत में दबा खज़ाना।
अगले ही दिन उन्होंने हल और फावड़े उठाए और पूरे खेत को खोदना शुरू कर दिया। दिन-रात पसीना बहाया। खेत का कोना-कोना खोद डाला, लेकिन सोने का एक टुकड़ा भी नहीं मिला।
थककर वे बैठ गए। सबसे छोटे बेटे ने झुंझलाकर कहा,
“पिता ने हमें धोखा दिया! यहाँ कोई खज़ाना नहीं है।”
दूसरे बेटे ने सिर झुका लिया और बोला,
“सही कहा, हमने बेकार मेहनत कर दी।”
Small Moral Stories in Hindi
लेकिन सबसे बड़े बेटे ने थोड़ी देर सोचकर कहा,
“भाईयों, अब जब हमने इतना मेहनत करके खेत को खोद ही डाला है, तो क्यों न इसमें बीज बो दें? कम से कम फसल तो उगेगी।”
बाकी तीनों को भी यह बात ठीक लगी। उन्होंने गुस्सा और निराशा छोड़कर खेत में बीज बोए। पानी डाला, समय पर निराई-गुड़ाई की, और खेत की देखभाल करने लगे।
कुछ ही महीनों बाद खेत लहलहाने लगा। सुनहरी फसल खड़ी थी। जब उन्होंने अनाज काटा, तो उनके गोदाम भर गए। चारों बेटों को पहली बार समझ आया कि मेहनत का फल कितना मीठा होता है।
अब उन्हें अपने पिता की बात याद आई। वे सोचने लगे—“पिता ने सही कहा था। असली खज़ाना खेत में दबा सोना नहीं, बल्कि हमारी मेहनत है। यही मेहनत हमें अनाज और समृद्धि देती है।”
उस दिन के बाद से चारों बेटों ने आलस छोड़ दिया और मेहनती बन गए। उनका घर खुशहाल हो गया और पिता की दी हुई सीख उनके जीवन का मार्गदर्शन बन गई।
शिक्षा:
मेहनत ही सबसे बड़ा खज़ाना है। जो व्यक्ति पसीना बहाता है, वही जीवन में सच्ची समृद्धि पाता है।




