माँ दुर्गा शक्ति, करुणा और विजय की देवी हैं। दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) का पाठ करने से साधक के भीतर साहस का संचार होता है और जीवन की नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। यह चालीसा न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाती है, बल्कि मानसिक अशांति और भय को भी जड़ से मिटा देती है। विशेष रूप से नवरात्रि, मंगलवार और शुक्रवार के दिन दुर्गा चालीसा का गान करना माँ भवानी को अत्यंत प्रसन्न करता है।
श्री दुर्गा चालीसा
(Durga Chalisa Lyrics in Hindi)
॥ दोहा ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
॥ चौपाई ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटी विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीन्हा। पालन हेतु अन्न धन दीन्हा॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिव शंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धर्यो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहे अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहूँ लोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म मरण ताको छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीन्हो। काम अरु क्रोध जीति सब लीन्हो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गयी तब मन पछतायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन्ह विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। मोह मदादिक सब भरमावें॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला॥
जब लगि जियूँ दया फल पाऊँ। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ॥
दुर्गा चालीसा जो नित गावै। सब सुख भोग परम पद पावै॥
कुशवाहा देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ दोहा ॥
शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे निःशंक।
माता तेरा नाम जो, लेवे सदा निःअंक॥
दुर्गाचालीसा के पाठ के लाभ
(Significance of Durga Chalisa)
हनुमान चालीसा का पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना फलदायी होता है:
- आत्मविश्वास में वृद्धि: माँ दुर्गा की स्तुति से मन का डर खत्म होता है और कॉन्फिडेंस बढ़ता है।
- सुख-समृद्धि: घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
(Durga Chalisa in Hindi)
प्रश्न: दुर्गा चालीसा के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस चालीसा के अंत में ‘कुशवाहा देवीदास’ जी का नाम आता है, जिन्हें इसका रचयिता माना जाता है।
प्रश्न: पाठ करते समय मुख किस दिशा में होना चाहिए?
उत्तर: माँ दुर्गा की पूजा करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा को ‘शक्ति’ की दिशा माना जाता है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ है।
हमें उम्मीद है कि यह चालीसा संग्रह आपकी साधना और दैनिक पूजा को सुगम बनाने में मददगार रहा होगा। चालीसा का पाठ करना न केवल इष्ट देव के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने का तरीका है, बल्कि यह हमारे आत्मबल को बढ़ाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। इन चालीस चौपाइयों की शक्ति हमारे मन को एकाग्र करती है और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करती है। हम इस संग्रह में निरंतर नई चालीसाएँ और उनके अर्थ जोड़ते रहते हैं, ताकि आपकी श्रद्धा और ज्ञान का मार्ग सदैव प्रशस्त रहे। भविष्य में अन्य देवी-देवताओं की चालीसा पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर दोबारा आना न भूलें।




